Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 राजाओं 17:1 2 राजाओं 17:2 2 राजाओं 17:3 2 राजाओं 17:4 2 राजाओं 17:5 2 राजाओं 17:6 2 राजाओं 17:7 2 राजाओं 17:8 2 राजाओं 17:9 2 राजाओं 17:10 2 राजाओं 17:11 2 राजाओं 17:12 2 राजाओं 17:13 2 राजाओं 17:14 2 राजाओं 17:15 2 राजाओं 17:16 2 राजाओं 17:17 2 राजाओं 17:18 2 राजाओं 17:19 2 राजाओं 17:20 2 राजाओं 17:21 2 राजाओं 17:22 2 राजाओं 17:23 2 राजाओं 17:24 2 राजाओं 17:25 2 राजाओं 17:26 2 राजाओं 17:27 2 राजाओं 17:28 2 राजाओं 17:29 2 राजाओं 17:30 2 राजाओं 17:31 2 राजाओं 17:32 2 राजाओं 17:33 2 राजाओं 17:34 2 राजाओं 17:35 2 राजाओं 17:36 2 राजाओं 17:37 2 राजाओं 17:38 2 राजाओं 17:39 2 राजाओं 17:40 2 राजाओं 17:41



2 राजाओं 17:20 पर टिप्पणी
इस पद का मुख्य संदेश यह है कि इस्राएल के उद्धारकर्ता परमेश्वर ने उनकी अवज्ञा और पाप के परिणाम स्वरूप उन्हें मजबूरन दमन-संहार के मार्ग पर डाल दिया। फिर भी यह कहता है कि यह घटित हुआ ताकि उनके पास से उनके विरुद्ध ईश्वरीय न्याय व्यक्त हो और वे परमेश्वर के प्रबंधन के सामने अपने रास्ते बदलें।
पदीयाकारण में पाठ की जगह
पद 17:20 बताता है कि यहोवा ने इस्राएल की सारी सन्तान को छोड़कर, उनको दुःख दिया, और लूटनेवालों के हाथ कर दिया, और अन्त में उन्हें अपने सामने से निकाल दिया। यह एक निर्णायक चक्र है जिसमें परमेश्वर के अनुसार समाज और राजनीति के गिरते हुए ढांचे के कारण यहूदियों ने अपना आत्म-ज्ञान खो दिया। यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर का वचन और व्यवस्था—जो सत्ताओं का आधार है—जब टूटती है, तब दण्ड के रूप में लूट और दमन स्पष्ट हो जाते हैं, परन्तु यह सब एक कष्ट समान अवधि के बाद, उद्धार के लिए एक चेतावनी और आह्वान भी बन जाते हैं।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस verse का मूल संदेश है कि परमेश्वर के साथ प्रवृत्ति और विश्वासहीनता का परिणाम भयावह होता है। पाप के कारण समाजिक-राजनैतिक अस्थिरता आती है और God’s sovereign justice सामने आती है। यह हमारी चेतावनी है कि दैनंदिन जीवन में भी हम अपनी आध्यात्मिक स्थिरता बनाए रखें, और ईश्वर के निर्देशों के अनुरूप चलें।
अनुसन्धान सूत्र: महत्त्वपूर्ण क्रॉस रेफ़रेंसेस
जीवन-पयोग (व्यावहारिक अनुप्रयोग)
सारांश
2 राजाओं 17:20 संकेत करता है कि परमेश्वर के साथ चेतना-आश्रित जीवन का टूटना दण्ड-प्रक्रिया के रूप में दिख सकता है—यह इस्राएल के इतिहास में स्पष्ट है—पर यह भी एक चेतावनी और सुधार का अवसर है कि लोग अपने पथ परिवर्तन करें और परमेश्वर के के आदेशों के अनुसार लौटें। यह पाठ हमारे लिए भी एक स्मरण है कि नैतिक और आस्थागत बुनियाद मजबूत हो, तो आंधियाँ भी पार हो सकती हैं।
याद रहे: नीचे उद्धृत तीन प्रसिद्ध टिप्पणीकारों के संक्षिप्त विचार केवल संदर्भ के लिए जोड़े गए हैं:
मैथ्यू हेनरी: "यह दण्ड का वास्तविक कारण यह है कि इस्राएल परमेश्वर के साथ अपना रिश्ता खो बैठा; दमन वैसा नहीं जो मनुष्य चाहता, बल्कि परमेश्वर की न्यायपूर्ण व्यवस्था है।"
एलबर्ट बार्न्स: "गिरावट भी एक चेतावनी है कि समुदाय अपने दायित्व से चूक गया है; सुधार की राह खुली है यदि वे 돌아 आएं।"
एडम क्लार्क: "इस verse में दण्ड का कठोर स्वर है, परन्तु परमेश्वर की भलाई और उद्धार की आशा भी साथ रहती है।"