Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 राजाओं 5:1 2 राजाओं 5:2 2 राजाओं 5:3 2 राजाओं 5:4 2 राजाओं 5:5 2 राजाओं 5:6 2 राजाओं 5:7 2 राजाओं 5:8 2 राजाओं 5:9 2 राजाओं 5:10 2 राजाओं 5:11 2 राजाओं 5:12 2 राजाओं 5:13 2 राजाओं 5:14 2 राजाओं 5:15 2 राजाओं 5:16 2 राजाओं 5:17 2 राजाओं 5:18 2 राजाओं 5:19 2 राजाओं 5:20 2 राजाओं 5:21 2 राजाओं 5:22 2 राजाओं 5:23 2 राजाओं 5:24 2 राजाओं 5:25 2 राजाओं 5:26 2 राजाओं 5:27



2 राजाओं 5:18 पर हिंदी टीका (HINIRV)
पाठ का संक्षेपात्मक परिचय: इस पद में नम्मन के दास के मन में एक बहुप्रश्नित विचार उभरता है—क्या वह अपनी सुरक्षा के लिए मूर्तिपूजा तक स्वीकार कर सकता है, यदि उसे अपने मालिक के प्रभाव से विवश किया जाए? यहोवा का दयालु संदेहवाद्य स्वर और दास के विवेक की आपसी टकराहट को दिखाता है। नम्मन के दास ने अपने स्वामी के भवन में पूजा-उत्साह के समय होने वाले पाप से अपने आप को अलग रखना चाहा, परन्तु उसे डर है कि बिना अनुमति के वह यह न कर ले, तो क्या यह अपराध नहीं होगा? इस पाठ में ईश्वर के आदेश और धैर्यपूर्वक नैतिक विवेक के टकराव पर विचार होता है।
पद की भूमिका और संदर्भ
यह पंक्ति एलिशा की चिकित्सा-चमत्कार के बाद के घटनाक्रम का हिस्सा है, जहाँ नम्मन के दास ने अपने स्वामी के बंधनों और सामाजिक-धार्मिक दायित्वों के बीच संतुलन बनाने का प्रयत्न किया। दास की चेष्टा यह है कि वह ऐसे समय में भी ईश्वर के भाव पर अडिग रहे और अपने कर्तव्य में ईमानदार रहे, भले ही वह अपनी सुरक्षा के लिए गलत मार्ग अपनाने का खतरा उठाए।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
1) ईश्वर के प्रति अचूक विश्वास बनाये रखना: दास की विनती स्पष्ट करती है कि उसे भय और दबाव के बावजूद ईश्वर की अनुमति और शुद्धता की रक्षा की चाहत है। उसे यह सुनिश्चित करना है कि अपने स्वामीनिष्ठ आग्रहों के कारण वह पाप की चपेट में न जाए।
2) विवेक की आवाज़ बनाम सामाजिक दबाव: जब समाज-धर्म की मान्यताओं के अनुरोध और ईश्वर के निर्देश एक-दूसरे के विरुद्ध हों, तब विवेक ही सही मार्ग दिखाता है—क्योंकि परम पिता की दृष्टि में विवेक और पवित्रता एक साथ आवश्यक है।
अन्य बाइबिल विवेच्य संघात (Cross-references)
इन संदर्भों के साथ, दास का संदेह और निर्णय—कि वह आत्म-समर्पण से बचकर ईश्वर के नियम के अनुसार चलना चाहता है—सार रखता है: सच्चा धर्म विवेक और विश्वास के साथ चलता है, भले ही रास्ते परेशानीपूर्ण हों।
व्यावहारिक आवेदन
संक्षेप
इस verse में दास की निष्ठा और विवेक की आवाज़ उभरती है—यह दर्शाती है कि भय के बावजूद ईश्वर के निर्देशों के अनुरूप चलना चाहिए, न कि दबाव के प्रभाव में पाप की राह अपनानी चाहिए। यह पाठ हमें नैतिक साहस, विवेक और परमेश्वर-आश्रय के महत्व की याद दिलाता है।
टीका-संक्षेप (पूर्व निशान):
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के लोकप्रिय अंशों में से इस प्रकार के नैतिक भाव को संक्षेप में प्रस्तुत किया गया है: ईश्वर के अनुसार चलना, चाहे परिस्थिति कैसी भी हो; विवेक की आवाज़ को अनदेखा न करना; और प्रभु के चरणों में स्थिर रहना। इस टिप्पणी में उनके विचारों से प्रेरणा लेते हुए एक समेकित विवेक-आधारित दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है।