Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 कुरिन्थियों 12:1 2 कुरिन्थियों 12:2 2 कुरिन्थियों 12:3 2 कुरिन्थियों 12:4 2 कुरिन्थियों 12:5 2 कुरिन्थियों 12:6 2 कुरिन्थियों 12:7 2 कुरिन्थियों 12:8 2 कुरिन्थियों 12:9 2 कुरिन्थियों 12:10 2 कुरिन्थियों 12:11 2 कुरिन्थियों 12:12 2 कुरिन्थियों 12:13 2 कुरिन्थियों 12:14 2 कुरिन्थियों 12:15 2 कुरिन्थियों 12:16 2 कुरिन्थियों 12:17 2 कुरिन्थियों 12:18 2 कुरिन्थियों 12:19 2 कुरिन्थियों 12:20 2 कुरिन्थियों 12:21



सीधे अर्थ की स्पष्ट बात
2 कुरिन्थियों 12:8 में पौलुस कहता है कि उसने प्रभु से तीन बार विनती की ताकि यह दुर्बलता या कष्ट उसकी ऊपर से दूर हो जाए। इसका मतलब है कि परमेश्वर के सामने वह अपनी कमजोरी या परीक्षण की स्थिति को हटाने के लिए लगातार प्रार्थना कर रहा था, परन्तु प्रभु का उत्तर अलग रहा: “मेरी कृपा तुम्हारे साथ है।”
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पाठ 2 कुरिन्थियों के एपोस्तल के अपने अनुभवों का भाग है। कुरिन्थ के चर्च में विविध समस्याएं और आत्म-उत्कंठित प्रचारक-प्रतिद्वंद्विता थीं। पौलुस ने अपने अनुभव से दिखाया कि कभी-कभी प्रभु की साध नहीं बदली जाती, परन्तु उसकी शक्ति दुःख के बीच भी समर्थ बनी रहती है। इस अनुभाग में वह अपने “तीन बार” दया स्थापित करने वाले विनती के बजाय, विनती को कहानी का केंद्र बनाते हुए परमेश्वर की चिरस्थायी कृपा पर जोर देता है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
संकेतित थीम्स (कहने योग्य बिंदु)
अन्य उपदेश-योग्य पद
यद्यपि सटीक पाठ नहीं है, समान संदेश में निम्न बाइबल संदर्भ सहायक हो सकते हैं:
विचार-योग्य क्रॉस-रेफरेंस और छोटा स्पष्टीकरण
- क्रॉस-रेफरेंस: (फिलिप्पियों 4:13) यह दर्शाता है कि परमेश्वर की कृपा से समर्थ होना संभव है, भले ही परिस्थिति कितनी भी कठोर क्यों न हो।
- क्रॉस-रेफरेंस: (यशायाह 40:31) प्रतीक्षा करते-करते परमेश्वर की नई ऊर्जा मिलना—उच्च उड़ान की क्षमता।
- क्रॉस-रेफरेंस: (2 कॉरीं 12:9) यह पाठ सीधे जोड़ता है कि परमेश्वर की कृपा और शक्ति कमजोरी के बीच काम करती है, ताकि ईश्वर के प्रचार का सत्य प्रकट हो।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
कष्ट के समय भी परमेश्वर के साथ स्थिर विश्वास बनाए रखें। यदि मंज़ूर न हो तो भी परमेश्वर की कृपा पर्याप्त है, और उसकी शक्ति आपकी कमजोरी पर प्रकट होती है। नयी ताकत और धैर्य के लिए उसकी कृपा पर निर्भर रहना सीखें।