1 शमूएल 15:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

“मैं शाऊल को राजा बना के पछताता हूँ*; क्योंकि उसने मेरे पीछे चलना छोड़ दिया, और मेरी आज्ञाओं का पालन नहीं किया।” तब शमूएल का क्रोध भड़का; और वह रात भर यहोवा की दुहाई देता रहा।

पिछला पद
« 1 शमूएल 15:10
अगला पद
1 शमूएल 15:12 »

1 शमूएल 15:11 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 शमूएल 15:11 का अभिधान और संदर्भ

यह पद शाऊल से परमेश्वर की हुक्म-पालन के बारे में है, जहां परमेश्वर ने एक दुष्ट-जातिव के साथ लगभग एक निर्धारित सैन्य अभियान के निर्देश दिए और शाऊल ने स्वतःस्फूर्त निर्णय लेकर उन्हें टाल दिया। शमूएल के द्वारा यह कहा गया कि परमेश्वर ने उसे राजा के पद पर स्थापित किया था, किन्तु शाऊल ने यह मान लिया कि कुछ तरजीहें या परिस्थितियाँ अधिक महत्त्वपूर्ण हैं, और इसलिए उसने आज्ञा के अनुसरण में ढील बरती। इस संदर्भ में भगवान का क्रोध और शमूएल की प्रार्थना-भरी रात उभरती है, जो धार्मिक नेतृत्व के नंगे सच को दर्शाती है: परमेश्वर के आदेश सर्वोपरि होते हैं, शासक की बुद्धि सीमा-सीमा तक सीमित रहती है।

मुख्य अर्थ

पद तीन स्तरों पर बोलता है: (1) परमेश्वर का निर्णय और शाऊल की अस्वीकृति; (2) शमूएल का क्रोध और प्रार्थना; (3) प्रभु के नामित राजा के रूप में दायित्व की गहराई। शमूएल की प्रतिक्रिया बताती है कि नीतिगत नियमों के उल्लंघन पर परमेश्वर कितना संवेदनशील होते हैं, और एक भी अक्षम पालन पूरे दिव्यता-आधारित योजना को प्रभावित कर सकता है।

दो-तीन केंद्रीय विषय

  • आज्ञापालन बनाम बहाना: परमेश्वर के निर्देशों के सख्त पालन की आवश्यकता बनाम राजा की व्यावहारिक चयन-उन्मुखता।
  • आस्था और दायित्व: शमूएल की आस्था यह दिखाती है कि धार्मिक नेता कैसे परमेश्वर की ओर से काम करते हैं, और उनकी प्रार्थना कैसे आध्यात्मिक संघर्ष का भाग बनती है।
  • निशान और परिणाम: एक असफल क्रम से उत्तरदायित्व उत्पन्न होते हैं; राजा की हार परमेश्वर के न्याय को दर्शाती है, न कि मनुष्य की शक्ति को।

अन्य प्रासंगिक संदर्भ

1 समूएल 13–14 में Saul के युद्ध-निर्देशों और उसकी निर्णय-प्रणालियों में पहले से दिखता है कि परमेश्वर की धारणा कितनी निर्णायक है। यशायाह 1:19–20 जैसे दृश्यों में भी श्रद्धा और obedience की महत्ता स्पष्ट होती है। यह उद्धृत नहीं किया गया है, पर इन उपदेशिक प्रवचनों में सम्मानित है कि परमेश्वर के आदेश के बिना आस्थागत परिणाम नहीं मिलते।

व्यावहारिक विचार

हम हर दिन के निर्णयों में यह देखते हैं कि क्या हम परमेश्वर की आज्ञाओं को सर्वोपरि मान रहे हैं या परिस्थितियाँ हमें विचलित करती हैं। ईमानदार प्रार्थना और धार्मिक नेतृत्व का विनम्र पालन ही सही रास्ते को सुरक्षित रखता है। अत्यधिक आत्म-निर्भरता से बचें; परमेश्वर के मार्ग में धैर्य और विश्वास आवश्यक हैं।

संक्षिप्त समापन

यह वाक्यधार एक चेतावनी है: परमेश्वर का चयन और आज्ञा हमारे सामने सर्वोपरि है; यदि हम उसके निर्देशों से भटकते हैं, तो परिणाम मानसिक और आध्यात्मिक रूप से हार के समान होते हैं। शमूएल की रात-भर प्रार्थना इस तथ्य को उजागर करती है कि परमेश्वर के नजदीकी होने पर भी सत्य का पालन कठिन होता है, पर वही आस्था की परीक्षा है।

Cross-references (संक्षिप्त समझ)

- 1 समूएल 13:13-14: राजा की अधर्मीता का परिणाम और परमेश्वर के चयन का महत्व।

- हमेशां की आस्था के लिए प्रेरणा: रोम 12:2 के अदल-बदल प्रेम-जीवन, और याकूब 1:22-25 जैसे उपदेश भी आज्ञामय जीवन के लिए मार्गदर्शक हैं।

नोट: उपर्युक्त संदर्भ पूर्ण कवरेज देते हैं; कृपया पाठ के साथ पढ़ते समय वास्तविक पदों के शब्दों को पूरा देखना न भूलें।

कथन-उद्धरण (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke): यदि उपलब्ध हों, तो नीचे उद्धरण चिन्हों के साथ संक्षेप में दिए गए हैं। इस पाठ के लिए उपलब्ध सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणीकारों के संकलन से यह एकीकृत विश्लेषण बनता है।

उद्धरण संकेत: “यहाँ के शब्दों में परमेश्वर के आदेश की महत्ता स्पष्ट है; रानी-निष्ठ राजा के रूप में शाऊल की असफलता ने परमेश्वर के चयन की सत्यता को उजागर किया।”

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 शमूएल 15:11 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

1 शमूएल 13:13 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 शमूएल 13:13 (HINIRV) »
शमूएल ने शाऊल से कहा, “तूने मूर्खता का काम किया है*; तूने अपने परमेश्‍वर यहोवा की आज्ञा को नहीं माना; नहीं तो यहोवा तेरा राज्य इस्राएलियों के ऊपर सदा स्थिर रखता।

उत्पत्ति 6:6 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
उत्पत्ति 6:6 (HINIRV) »
और यहोवा पृथ्वी पर मनुष्य को बनाने से पछताया, और वह मन में अति खेदित हुआ।

यहोशू 22:16 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यहोशू 22:16 (HINIRV) »
“यहोवा की सारी मण्डली यह कहती है, कि 'तुम ने इस्राएल के परमेश्‍वर यहोवा का यह कैसा विश्वासघात किया; आज जो तुम ने एक वेदी बना ली है, इसमें तुम ने उसके पीछे चलना छोड़कर उसके विरुद्ध आज बलवा किया है?

HINIRV बाइबल की पुस्तक चुनें