1 शमूएल 15:25 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परन्तु अब मेरे पाप को क्षमा कर, और मेरे साथ लौट आ, कि मैं यहोवा को दण्डवत् करूँ।”

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1 शमूएल 15:25 पद-दर-पद बाइबल टीका

सीधे अर्थ का सार

1 शमूएल 15:25 में यहोदावन राजा सोम के पाप के संदर्भ में कहा गया भाव यह है: फिर मैं अपना पाप स्वीकार कर रहा हूँ और परमप्रभु Yahweh के पास वापस लौटकर उसकी सेवा में अपना विश्वास पुनः स्थापित करूँगा। यहाँ दंड से पहले पाप-स्वीकारोक्ति और पुनः समर्पण का निर्णय है जिससे दमन पर विजय मिलती है।

पृष्ठभूमि की झलक

यह संदर्भ सैम के साथ शेम और इज़्राइल के राजा शव के बीच की विनय-स्वरूप संवाद का हिस्सा है। शेम ने विनम्रता से स्वीकार किया कि उसने अवहेलना और पश्चाताप के बिना परमेश्वर के निर्देशों को नहीं माना, और अब वह अपने पाप के लिए क्षमा चाहता है तथा Yahweh की सेवा में वापसी करना चाहता है। यह दिखाता है कि पश्चाताप और पुनः समर्पण, परमेश्वर के साथ फिर जुड़ने का मार्ग है, भले ही पहले के निर्णय कितने भी गलत क्यों न हों।

व्याख्यात्मक विचार

  • परमेश्वर के सामने विनीत मन: शास्त्र-सिद्धांत के अनुरूप है; यदि पाप स्वीकार कर लिया जाए और पुनः समर्पण किया जाए, तो भक्ति का द्वार खुलता है।
  • स्वीकारोक्ति केवल शब्द नहीं, भावपूर्ण परिवर्तन का संकेत है—यही वह क्षमा-प्राप्ति का मार्ग है जो परमेश्वर के साथ फिर से संबंध स्थापित करता है।
  • नियत और कर्तव्य की पुनर्स्थापना में राजा का यह इरादा Yahweh की आज्ञाओं की महत्ता को फिर से मान्यता देता है, भले ही गलती कितनी भी क्यों न हो।

कथनात्मक बिंदु (Theme in brief)

  1. पाप स्वीकारना और क्षमा के लिए पुकारना
  2. परमेश्वर के सामने लौटना और उसकी सेवा में समर्पण
  3. भरोसे पर आधारित पुनःस्थापना और धार्मिक निष्ठा का पुनर्निर्माण

संबद्ध पद आपसी संदर्भ (Cross-references)

• अन्य जगह जहाँ लोग दोष स्वीकार कर फिर से Yahweh की सेवा में लौटते हैं, वहाँ विनम्र पश्चाताप और पुनः समर्पण को महत्व दिया गया है। यह सिद्धांत 2 इतिहास 7:14 जैसे संदर्भों में भी परिलक्षित होता है, जहाँ सचेत किताबी विश्वास और पश्चाताप से मुक्ती का मार्ग दिखता है।

• पुराने नियम के समय की आस्थागत पुनर्स्थापना के लिए मलहम-सा मार्ग, यहीं दृढ़ता से दिखता है कि परमेश्वर के साथ संबंधधारणा में परिवर्तन संभव है।

• उल्लेखित उद्धार-मार्ग में आस्था और कर्म का संयोजन प्रमुख है; यानी केवल मन से कहना नहीं, बल्कि व्यवहार में परिवर्तन भी आवश्यक है।

प्रक्टिकल takeaway

यदि आप भी किसी गलत द्वार पर चले हों, तो विनम्रतापूर्वक पाप को स्वीकार करें, क्षमा के लिए Yahweh से पुकारें, और उसी निष्ठा के साथ वापस उसके मार्ग पर चलें। परमेश्वर के साथ संबंध फिर से मजबूत होगा जब हमारी आवाज़ और हमारे कर्म एक ही दिशा में हों।

सूक्ष्म उद्धरण (केवल यदि उपलब्ध हो)

Matt. Henry, Barnes, Clarke में से अगर किसी के सीधे शब्द उद्धरण उपलब्ध हों तो उन्हें संरक्षित रखा जा सकता है। इस लेख में संक्षेप में उनका विचार यह है कि पछतावा सत्य-परिवर्तन की दिशा है, और परमेश्वर की कृपा से ही पुनःस्थापना संभव है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 शमूएल 15:25 समानांतर पद और संबंधित वचन

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इसलिए अब की बार मेरा अपराध क्षमा करो, और अपने परमेश्‍वर यहोवा से विनती करो कि वह केवल मेरे ऊपर से इस मृत्यु को दूर करे।”

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