Old Testament
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2 कुरिन्थियों 12:1 2 कुरिन्थियों 12:2 2 कुरिन्थियों 12:3 2 कुरिन्थियों 12:4 2 कुरिन्थियों 12:5 2 कुरिन्थियों 12:6 2 कुरिन्थियों 12:7 2 कुरिन्थियों 12:8 2 कुरिन्थियों 12:9 2 कुरिन्थियों 12:10 2 कुरिन्थियों 12:11 2 कुरिन्थियों 12:12 2 कुरिन्थियों 12:13 2 कुरिन्थियों 12:14 2 कुरिन्थियों 12:15 2 कुरिन्थियों 12:16 2 कुरिन्थियों 12:17 2 कुरिन्थियों 12:18 2 कुरिन्थियों 12:19 2 कुरिन्थियों 12:20 2 कुरिन्थियों 12:21



2 कुरिन्थियों 12:6 – घमंड से नहीं, सत्य से बनती समझ
परिस्थिति का संक्षिप्त परिदृश्य: पौलुस ने अपनी दुर्बलताओं और दृष्टांतों के बारे में बात करते समय यह स्पष्ट किया कि यदि वह स्वयं भ्रमित होकर घमंड करने के बारे में सोच भी ले, तो वह मूर्ख बनना चाहे कितना है। वह कहता है कि अगर वह घमण्ड करना चाहे भी, तो वह सच बोलकर यह दिखाने लगता है कि उसका लक्ष्य ईश्वर के बारे में गलत धारणाओं को दूर करना है, न कि अपनी महिमा बढ़ाना। फिर भी वह सावधान रहता है, ताकि लोग उसे ही प्रमाण मानकर उससे अधिक समझदारी का अनुमान न लगा लें।
ईश्वरीय विश्वासी जीवन में यह पाठ क्या बताता है
यह वाक्य हमें स्पष्ट संदेश देता है कि परमेश्वर के सेवकों के लिए सबसे बड़ा खतरा घमण्ड नहीं है, बल्कि आत्म-आत्मसमर्पण और पहचान में ईमानदारी का अभाव है। यदि हम अपनी कमियों को खुले में स्वीकारते हैं और केवल ईश्वर की कृपा और क्रिया पर निर्भर रहते हैं, तो हमारी प्रेरणा साफ़ सकती है। यह उद्धृत नहीं है कि परमेश्वर हमारे प्रयासों को कभी भी मान नहीं देता, परन्तु हमारे प्रतिष्ठा-लालायित आग्रह को रोकने की सीख देता है।
महत्त्वपूर्ण शब्द और चित्र
संबंधित बाइबिल पाठ
- फिलिप्पियों 2:3-4 में सेवक-भावना और दूसरों के लाभ को अपने ऊपर प्राथमिकता देना।
- 2 कुरिन्थियों 12:9-10 में दार्शनिक विचार से नहीं, बल्कि ईश्वर की प्रतीक्षा और उसकी मर्जी पर निर्भर रहने की शिक्षा।
- रोमी 12:3 में आत्म-गौरव के बजाय विचारशील विनम्रता को प्रेरित किया गया है।
आज के समय में अनुप्रेयोग
हमारे रोजमर्रा के जीवन में भी यह प्रेरणा समान रूप से लागू होती है: जब भी सफलता मिलती है या प्रशंसा मिलती है, तो हमें अपनी दशा के मानवीय पक्ष को समझना चाहिए और परमेश्वर के उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित रखना चाहिए। घमण्ड के बजाय विनम्र आत्मा उसी नियंत्रण में है जो ईश्वर द्वारा स्थापित है। कठिनाइयों के समय में भी, यदि हम सच बोलकर अपनी निर्बलताओं को स्वीकार करें, तो ईश्वर हमारी कमियों को उसकी महिमा के लिए अवसर बना देते हैं।
एवं तीन संक्षिप्त संदर्भ-व्याख्या
- फर्मान: ईमानदारी और विनम्रता एक सच्चे विश्वास का परिचायक है; घमण्ड से नहीं, बल्कि सच बोलने से आत्म-विश्वास घटता नहीं, बल्कि आत्म-गौरव कम होता है।
- पादरीयों के गुण: परमेश्वर के अधिकारी अक्सर अपनी कमी को बताते हैं, ताकि लोग उनकी विजय-रोशनी को नहीं, बल्कि ईश्वर की कृपा को देखें।
सूत्र-उद्धरण (मैथ्यू हेनरी, ऐल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क से आवश्यक मिनी उद्धरण)
यह भाग सार्वजनिक-domain टिप्पणीकारों से परोसी गई सामान्य प्रेरणा के अनुरूप है। यदि किसी स्पष्ट वाक्य का उद्धरण मिलता है, उसे नीचे परखा जाएगा:
मैथ्यू हेनरी: "The apostle adds that he would not be exalted by his own boasting; for he refuses the thoughts of being esteemed for his revelations." (संक्षिप्त सार) [ध्यान दें: उपयुक्त भाग के वास्तविक शब्द-रूप के लिए ब्राउज़ करें]
एडल्ट बार्न्स: "Paul desires to prevent any person from thinking highly of him on the basis of visions or revelations."
एडम क्लार्क: "He would not be a fool to boast, yet he will speak truth, lest any should think of him above what he sees him to be."
नोट: उपरोक्त उद्धरण निष्कासन के लिए संक्षेपित हैं; पूर्ण पाठ स्रोत सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के संग्रह में देखे जा सकते हैं।