Old Testament
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2 कुरिन्थियों 11:1 2 कुरिन्थियों 11:2 2 कुरिन्थियों 11:3 2 कुरिन्थियों 11:4 2 कुरिन्थियों 11:5 2 कुरिन्थियों 11:6 2 कुरिन्थियों 11:7 2 कुरिन्थियों 11:8 2 कुरिन्थियों 11:9 2 कुरिन्थियों 11:10 2 कुरिन्थियों 11:11 2 कुरिन्थियों 11:12 2 कुरिन्थियों 11:13 2 कुरिन्थियों 11:14 2 कुरिन्थियों 11:15 2 कुरिन्थियों 11:16 2 कुरिन्थियों 11:17 2 कुरिन्थियों 11:18 2 कुरिन्थियों 11:19 2 कुरिन्थियों 11:20 2 कुरिन्थियों 11:21 2 कुरिन्थियों 11:22 2 कुरिन्थियों 11:23 2 कुरिन्थियों 11:24 2 कुरिन्थियों 11:25 2 कुरिन्थियों 11:26 2 कुरिन्थियों 11:27 2 कुरिन्थियों 11:28 2 कुरिन्थियों 11:29 2 कुरिन्थियों 11:30 2 कुरिन्थियों 11:31 2 कुरिन्थियों 11:32 2 कुरिन्थियों 11:33



2 कुरिन्थियों 11:31 का आशय और संदर्भ
पद संहिता: प्रभु यीशु का परमेश्वर और पिता जो सदा धन्य है, जानता है, कि मैं झूठ नहीं बोलता।
Immediate setting
यह उद्धरण पौलुस की उन बातों के बीच आता है जहाँ वे अपनी आत्म-प्रतिष्ठा और उनकी प्रेरिताई के अधिकार के बारे में स्पष्ट करते हैं कि वे शुद्धचित्त रहने का प्रमाण देते हैं। वे यह तर्क देते हैं कि उनके उद्धार का कारण परमेश्वर के साथ उनके संबंध के प्रमाण से परखा जा सकता है, न कि बाहरी दिखावे से। यहाँ वे "परमेश्वर और पिता" की आधिकारिक प्रतिष्ठा को उद्धृत करके कहते हैं कि परमेश्वर स्वयं गवाही देगा कि वे झूठ नहीं बोलते।
मुख्य पाठ से क्या सीखें
यह वाक्य परमेश्वर के सत्य तथा किसी मानव से उसकी परीक्षा में मिलती ईमानदारी की प्रतिज्ञा को उजागर करता है। पति-पत्नी की तरह नहीं, बल्कि ईश्वर के सामने पूरी इमानदारी की मांग करता है कि विश्वासयोग्यता और सत्यता ही उनकी सेवा का नैतिक आधार है।
पद शब्दों की व्याख्या
अन्य बाइबल संदर्भ
- भजन 51:6 जैसे पाठ सत्य के जन्मदाता परमेश्वर की नज़र में मन की सच्चाई को महत्व देते हैं।
- इब्रानी 6:18; 10:23—जो हमें दृढ़ता से विश्वास और सत्य में स्थिर रहने को कहता है।
इन्हीं विचारों के साथ, Paul को सत्य पर बनी अपनी प्रेरिताई की पुष्टि मिलती है कि उनका संदेश परमेश्वर के सत्य पर आधारित है, न कि उनके व्यक्तिगत दिखावे पर।
पूरक Cross-References और छोटा संकेत
आज का अनुप्रयोग
हमारे जीवन में सत्य और ईमानदारी का पहला मानदंड परमेश्वर के साथ हमारा रिश्ता है। चाहे आलोचना कितनी भी आए, हमारा उद्देश्य होना चाहिए—कभी भी अपने स्वाभिमान के लिए सत्य से समझौता न करें; क्योंकि परमेश्वर स्वयं सत्य का साक्ष्य है और वह हमारे भीतर सच बोलने की क्षमता डालता है। यदि हम अपने कामों-करतुओं में सत्य को बनाये रखें, तो लोग भी ईश्वर की महिमा को पहचानेंगे और हमारा जीवन दूसरों के लिए प्रेरणा बनेगा।
संक्षेप सार
2 कुरिन्थियों 11:31 हमें सिखाता है कि परमेश्वर और पिता की गवाही पर ही हमारा सत्यापन होता है। जो कुछ भी किया जाए, वह परमेश्वर के सामने सच्चाई के साथ किया जाना चाहिए; क्योंकि वह ही सदा धन्य है और वही हमारे जीवन की अंतिम माप है।