Old Testament
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2 कुरिन्थियों 1:1 2 कुरिन्थियों 1:2 2 कुरिन्थियों 1:3 2 कुरिन्थियों 1:4 2 कुरिन्थियों 1:5 2 कुरिन्थियों 1:6 2 कुरिन्थियों 1:7 2 कुरिन्थियों 1:8 2 कुरिन्थियों 1:9 2 कुरिन्थियों 1:10 2 कुरिन्थियों 1:11 2 कुरिन्थियों 1:12 2 कुरिन्थियों 1:13 2 कुरिन्थियों 1:14 2 कुरिन्थियों 1:15 2 कुरिन्थियों 1:16 2 कुरिन्थियों 1:17 2 कुरिन्थियों 1:18 2 कुरिन्थियों 1:19 2 कुरिन्थियों 1:20 2 कुरिन्थियों 1:21 2 कुरिन्थियों 1:22 2 कुरिन्थियों 1:23 2 कुरिन्थियों 1:24



2 कुरिन्थियों 1:14 का संदर्भ और व्याख्या
पद में पौलुस स्पष्ट करते हैं कि उनके भावी प्रभाव का उद्देश्य केवल प्रभु यीशु के दिन की तैयारी है, न कि घमण्ड। पवित्र आत्मा के प्रेरित लेखन के अनुसार, वे नहीं चाहते कि क्रिश्चियन समुदाय में उनके बारे में गलत अनुमान बनें; बल्कि वे चाहते हैं कि जब यीशु के दिन आ जाएं, तो प्रत्येक विश्वासी की दृष्टि प्रभु पर स्थिर और विनम्र रहे। यह शुद्धता और सामंजस्य का संदेश है कि ईश्वर के काम का केन्द्र यीशु है, न मानव व्यक्तित्व।
मुख्य अर्थ
पौलुस कह रहे हैं कि जैसा कुछ מקור से उनके बारे में घमण्ड की आशंका है, वैसा ही परिणाम होगा कि उनके साथियों के मन में भी प्रभु यीशु के दिन के लिए घमण्ड उत्पन्न हो। इससे बचने के लिए आवश्यक है कि हमारी दृष्टि यीशु के उद्धारक क्रिया और परमेश्वर के काम पर रहे, न कि हमारे अपने प्रभाव या सफलता पर।
दो–तीन प्रमुख विषय
संबद्ध פסक-प्रकाश
यथा कुछ अन्य उद्धरणों से मिलने वाले विचार: 2 कुरिन्थियों 3:4–6 में स्पष्ट है कि हमारा योग और सुरक्षा ईश्वर की कृपा से है, जो हमारी सेवकाई को सक्षम बनाती है; फिलिप्पियों 2:3–4 में विनम्रता और एक दूसरे के लिए सम्मान रखने की शिक्षा दी है; रोमियों 12:3 में স্ব-आकलन और ईमानदारी की प्रेरणा मिलती है।
इन संदर्भों से समेकित सीख: ईश्वर के काम में आत्म-प्रशंसा न्यूनतम होनी चाहिए और समुदाय के बीच प्रेम, एकता, और निष्ठा को बढ़ावा देना चाहिए।
व्यावहारिक अनुभव
विश्वासियों के लिए यह एक सरल, पर गहन चेकलिस्ट है: क्या हम प्रभु के दिन की तैयारी में हैं या अपने प्रभाव और मान-सम्मान को बढ़ाने में लगाए रहते हैं? अगर उत्तर गलत दिशा में है, तो विनम्रता से सुधार करें; आशा है कि हर कार्य में ईश्वर को महिमा मिले, न कि मानव सम्मान को।
संक्षिप्त निष्कर्ष
2 कुरिन्थियों 1:14 में पौलुस क्रिस्टम और विश्वासियों के बीच संतुलन बनाते हैं—हम प्रभु यीशु के दिन की महिमा से प्रेरित हों, न कि अपने घमण्ड से। यह संदेश समुदाय की एकता और विनम्रता को बुलाता है, ताकि परमेश्वर की योजना स्पष्ट रूप से प्रकट हो।
cross-references (संक्षिप्त स्पर्श)
1) फिलिप्पियों 2:3–4 — बनें एक दूसरे के लिए विनयपूर्ण; स्वयं को न बढ़ाएं, पर एक दूसरे को ऊँचा समझें।
2) रोमियों 12:3 — अपनी मर्यादा समझें, जो भी गुण हैं वे कृपा से मिलते हैं; आत्म-नियंत्रण बनाए रखें।
3) 2 कुरिन्थियों 3:4–6 — परमेश्वर की कृपा से ही हमारी सेवकाई सक्षम है—हमें आत्म-विश्वास नहीं, ईश्वर-विश्वास चाहिए।
उद्धार और साक्ष्य के इस मार्ग में, हमारा लक्ष्य है: यीशु के दिन के लिए पवित्र, एकता-भरा और विनम्र जीवन।