Old Testament
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एज्रा 4:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब उस देश के लोग यहूदियों को निराश करने और उन्हें डराकर मन्दिर बनाने में रुकावट डालने लगे।
एज्रा 4:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एज्रा 4:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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एज्रा 3:3 (HINIRV) »
तब उन्होंने वेदी को उसके स्थान पर खड़ा किया क्योंकि उन्हें उस ओर के देशों के लोगों का भय रहा, और वे उस पर यहोवा के लिये होमबलि अर्थात् प्रतिदिन सवेरे और सांझ के होमबलि चढ़ाने लगे।

नहेम्याह 6:9 (HINIRV) »
वे सब लोग यह सोचकर हमें डराना चाहते थे, कि “उनके हाथ ढीले पड़ जाए, और काम बन्द हो जाए।” परन्तु अब हे परमेश्वर तू मुझे हियाव दे।

यिर्मयाह 38:4 (HINIRV) »
इसलिए उन हाकिमों ने राजा से कहा, “उस पुरुष को मरवा डाल, क्योंकि वह जो इस नगर में बचे हुए योद्धाओं और अन्य सब लोगों से ऐसे-ऐसे वचन कहता है जिससे उनके हाथ पाँव ढीले हो जाते हैं। क्योंकि वह पुरुष इस प्रजा के लोगों की भलाई नहीं वरन् बुराई ही चाहता है।”
एजra 4:4 का संदर्भ और इसका अर्थ
यह दृश्य बंधुत्व पूर्वक और राजनीतिक संघर्ष के बीच यहूदियों के पुनर्निर्माण के प्रयास को दर्शाता है। जब निर्वासन के बाद यहूदियों ने मंदिर के निर्माण के काम शुरू किया, तब पड़ोसी क्षेत्रीय निवासियों ने उन्हें डराने-धमकाने और शांति के साथ कार्य न करने के लिए दबाव डाला। इस verse में उनकी निराशा और निर्माणकार्य में रुकावट डालने की कोशिश स्पष्ट होती है।
मुख्य संदेश
तकलीफ के बावजूद ईश्वर के लोग अपने धार्मिक कर्तव्य से पीछे नहीं हटते हैं। यहाँ पर शत्रुओं की धमकियाँ और मनोवैज्ञानिक दबाव मंदिर निर्माण के मार्ग में अवसर बन जाते हैं जिसमें यहूदियों की दृढ़ आस्था और ईश्वर पर निर्भरता उजागर होती है। यह verse वास्तविक संघर्ष को दिखाता है कि कैसे बाहरी दबावों के बीच भी धार्मिक निष्ठा बनी रहती है।
दो मुख्य थीम
संकेत-भूमिका और क्रॉस-रेफरेंस
1) एजे 5:1-2 में पुनर्निर्माण के समय भीड़-धक्का-धपका और प्रतिरोध का वर्णन है; 2) नीतियों और क़ानून के प्रतिरूप के दौरान धार्मिक कर्तव्य के लिए साहस का संदेश स्पष्ट है; 3) नीतिवचन 20:18 की योजनाओं की सलाह—योजनाबद्ध प्रयास सफलता के लिए आवश्यक है, पर साथ ही शत्रु के डर को परास्त करने की आवश्यकता भी दिखती है।
पठन के अन्वेषण (सरल पाठ)
इस आयत से हमें सीख मिलती है कि ईश्वर के लोग कठिन परिस्थितियों में भी अपनी योजना से नहीं हिलते हैं, भले ही बाहरी दबाव बढ़ रहे हों। यहूदी समुदाय मंदिर के निर्माण में निरंतरता बनाए रखते हैं, और यह प्रयास अपने समय के सामाजिक-धार्मिक तनावों के विरुद्ध एक दृढ़ संकेत है।
व्यावहारिक विचार
आज के संदर्भ में यह शिक्षण कहता है: जब हमारे कार्यों में बाधाएँ आएं, तो भय को नहीं, बल्कि उद्देश्य के प्रति ईश्वर की प्रेरणा को प्राथमिकता दें। किसी भी परियोजना के लिए सतत प्रार्थना, स्पष्ट योजना, और समुदाय के समर्थन से बाधाओं को पार करना संभव है।
संक्षिप्त समापन
एजरा 4:4 प्रेरणा देता है कि दुश्मन चाहे कितना भी डराने-धमकाने की कोशिश करें, ईश्वर के कार्य में विश्वास और स्थिरता सबसे बड़ी शक्ति होती है। परस्पर विश्वास और धैर्य के साथ आगे बढ़ना नितांत आवश्यक है।
क्यों यह उद्धरण महत्त्वपूर्ण है
यहूदियों के मंदिर पुनर्निर्माण के समय मिली चुनौती उनके साहस और विश्वास का प्रमाण है। यह धार्मिक-सामाजिक दबाव के बीच भी आध्यात्मिक उद्देश्य की दिशा में स्थिर रहने का पाठ है।
संदर्भ-गूंज (Cross-references): एजे 5:1-2; नीति 20:18; नीतिवचन 21:31
नोट: इस पंक्ति में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से मौलिक उद्धरण होने पर शामिल किया गया है तो वहाँ के स्पष्ट वाक्यों को उद्धृत किया गया है।