Old Testament
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नहेम्याह 6:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वे सब लोग यह सोचकर हमें डराना चाहते थे, कि “उनके हाथ ढीले पड़ जाए, और काम बन्द हो जाए।” परन्तु अब हे परमेश्वर तू मुझे हियाव दे।
नहेम्याह 6:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
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नहेम्याह 6:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
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भजन संहिता 138:3 (HINIRV) »
जिस दिन मैंने पुकारा, उसी दिन तूने मेरी सुन ली, और मुझ में बल देकर हियाव बन्धाया।

1 शमूएल 30:6 (HINIRV) »
और दाऊद बड़े संकट में पड़ा; क्योंकि लोग अपने बेटे-बेटियों के कारण बहुत शोकित होकर उस पर पथरवाह करने की चर्चा कर रहे थे। परन्तु दाऊद ने अपने परमेश्वर यहोवा को स्मरण करके हियाव बाँधा।

1 पतरस 5:10 (HINIRV) »
अब परमेश्वर जो सारे अनुग्रह का दाता है, जिसने तुम्हें मसीह में अपनी अनन्त महिमा के लिये बुलाया, तुम्हारे थोड़ी देर तक दुःख उठाने के बाद आप ही तुम्हें सिद्ध और स्थिर और बलवन्त करेगा*।
नहेम्याह 6:9 पर टिप्पणी
पर्वाहीन प्रचार-कार्य के दौरान नेहेम्याह नेत्र नाक-फर्श पर नहीं, बल्कि परमेश्वर की सहायता पर टिका कर उन्होंने विरोध के सामने साहस बनाए रखा। इस verse में विरोधी ताकतें यह सोच कर डराने की कोशिश कर रहे हैं कि उनके हाथ ढीले पड़ जाएँ और काम रुक जाए। पर नेहेम्याह ने कहा, “परन्तु अब हे परमेश्वर तू मुझे हियाव दे।” यह कर्म-विश्वास का समरूप वाक्य है—परमेश्वर का साहस आ जाने पर मनुष्य भय से ऊपर उठकर कार्य समाप्ति तक निरन्तर बना रहता है।
केंद्रीय अर्थ
यह पद दर्शाता है कि दुर्बलता और विरोध के बीच भी भक्ति और प्रार्थना का स्रोत परमेश्वर की सहायता है। नेहेम्याह ने परिस्थितियों को देखकर नहीं, बल्कि परमेश्वर के आशीर्वाद और हियाव से निर्णय लिया। उसका उद्देश्य स्पष्ट था: काम जारी रखना, प्रतिरोधों के बावजूद भी ईश्वर के दिए गए कार्य को पूरा करना।
दो-तीन प्रमुख विषय
संबंधी पाठ (cross-references) और उनका संक्षिप्त स्पष्टीकरण
व्यावहारिकreflection
आज के शिक्षार्थी भी कठिन समय में इसी तरह के निर्णय कर सकते हैं—अपनी योजनाओं को नहीं छोड़ना, बल्कि परमेश्वर से हियाव मांगना। चाहे बाधाओं की मात्रा कितनी भी हो, कर्म-कार्य को जारी रखने की भक्ति और प्रार्थना शक्ति से ही सफलता मिलती है। छोटी-मोटी असफलताओं पर मत घबराइए; परमेश्वर से सहायता मांगिए और विश्वास बनाए रखिए कि वह आपके काम को संपूर्ण करेगा।
संक्षिप्त समापन
नहेम्याह 6:9 हमें यह सिखाता है कि भय जब तक प्रभु की प्रेरणा से दूर न हो, तब तक प्रभावशाली नहीं होता। परमेश्वर की हियाव से ही कठोर परिस्थिति में भी कार्य आगे बढ़ते हैं। उसका आशीर्वाद और मार्गदर्शन हमारे साहस की कुंजी हैं।
संदर्भ दृष्य: - नेहेम्याह की निर्भय प्रार्थना की प्रवृत्ति और प्रतिरोधों के सामने दृढ़ता।
टिप्पणी स्रोतों के संकेत (उद्धरण क्रेडिट): यदि उपलब्ध हों, तो Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के छोटे-छोटे उद्धरण दिखाए जा सकते हैं, पर यहाँ विशिष्ट पाठ से सीधे वाक्यों को उद्धृत नहीं किया गया है।