Old Testament
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नहेम्याह 6:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
एलूल महीने के पच्चीसवें दिन को अर्थात् बावन दिन के भीतर शहरपनाह बन गई।
नहेम्याह 6:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
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नहेम्याह 6:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
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नहेम्याह 4:1 (HINIRV) »
जब सम्बल्लत ने सुना कि यहूदी लोग शहरपनाह को बना रहे हैं, तब उसने बुरा माना, और बहुत रिसियाकर यहूदियों को उपहास में उड़ाने लगा।

एज्रा 6:15 (HINIRV) »
इस प्रकार वह भवन राजा दारा के राज्य के छठवें वर्ष में अदार महीने के तीसरे दिन को बनकर समाप्त हुआ।

भजन संहिता 1:3 (HINIRV) »
वह उस वृक्ष के समान है, जो बहती पानी की धाराओं के किनारे लगाया गया है* और अपनी ऋतु में फलता है, और जिसके पत्ते कभी मुरझाते नहीं। और जो कुछ वह पुरुष करे वह सफल होता है।
नहेम्याह 6:15 का तात्पर्य और संदर्भ
नहेम्याह के अदालती और सांसारिक चुनौतियों के बीच, यह वचन बताता है कि एलूल महीने के पच्चीसवें दिन बावन दिन के भीतर शहरपनाह का निर्माण पूरा हुआ। यह पाठ पर्व-सीमा पर विजय का प्रतीक है—आखिरकार राज्य-युद्धों और अस्थिरताओं के बावजूद यहूदियों ने ईश्वर की सहायता से एक सुरक्षित और संरक्षित नगर का पुनर्निर्माण पूरा कर लिया।
ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ क्या बताता है
इस घटनाक्रम में ईश्वर की सहायता और प्रकोपों के विरुद्ध समुदाय की एकता स्पष्ट है। कारण चाहे आक्रमणकारी विरोधी हों या आंतरिक शंकाएँ, नहेम्याह ने परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं पर भरोसा बनाए रखा और योजना के अनुसार प्रजा के लिए सुरक्षा-घेरा खड़ा किया। परिणामस्वरूप, परमेश्वर ने काम पूरा कर दिया; यह इशारा करता है कि विश्वास और दृढ़ता से प्रेरित कार्य भगवान के समय में सफल होते हैं।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की व्याख्या
“शहरपनाह बन गई” — एक संरचना पूरी करने की कसौटी को दर्शाती है; यह एक भौतिक निर्माण के साथ-साथ आस्था की भी पुनःस्थापना है। बावन दिन का उल्लेख तत्काल प्रार्थना-आंदोलन और साहस का संकेत देता है कि चुनौतियाँ कितनी भी बड़ी हों, ईश्वर की शक्ति से भाग्य बदला जा सकता है।
संदर्भ-परिचय
यह दृश्य नहेम्याह के नेतृत्त्व में यहूदियों के गिरावट से उभरकर पुनर्निर्माण की कहानी का दर्पण है, जहां विरोधियों के षड्यंत्रों के बावजूद समुदाय ने एकजुट होकर नगरप्रमुख fortification की रक्षा की।
अन्य प्रावर्तक पाठ जो मजबूत संबंध बनाते हैं
पवित्र ग्रंथ से संक्षिप्त क्रॉस-रेफरेंसेज़ और उनका संक्षेप
इन संदर्भों में स्पष्ट है कि परमेश्वर की सहायता से समाज की एकता और अनुशासन के साथ अस्थिर परिस्थितियाँ भी स्थिर हो सकती हैं, यदि लोग उस पर भरोसा करें और उसकी योजना के अनुसार चलें।
आज का अनुप्रयोग
हम भी अपने जीवन के उन “घरों के निर्माण” में ईश्वर की सहायता चाहते हैं—व्यक्तिगत आदर्श, समुदायिक क्षमताओं, और कठिन चुनौतियों के बीच विश्वास बनाए रखना। यहां सिखाता है कि धैर्य, परिश्रम और ईश्वर के समय पर भरोसा हमें हर बाधा पार करने में मदद करता है। यदि हम छोटे-छोटे कदमों में भी सत्यनिष्ठ रहते हैं, तो बड़े लक्ष्य सक्षम बनते हैं.
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