Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीएज्रा 1:8 बाइबल पद की व्याख्या
एज्रा 1:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उनको कुस्रू राजा ने, मिथ्रदात खजांची से निकलवाकर, यहूदियों के शेशबस्सर नामक प्रधान को गिनकर सौंप दिया।
एज्रा 1:8 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एज्रा 1:8 समानांतर पद और संबंधित वचन
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एज्रा 5:14 (HINIRV) »
परमेश्वर के भवन के जो सोने और चाँदी के पात्र नबूकदनेस्सर यरूशलेम के मन्दिर में से निकलवाकर बाबेल के मन्दिर में ले गया था, उनको राजा कुस्रू ने बाबेल के मन्दिर में से निकलवाकर शेशबस्सर नामक एक पुरुष को जिसे उसने अधिपति ठहरा दिया था, सौंप दिया।

एज्रा 1:11 (HINIRV) »
सोने चाँदी के पात्र सब मिलाकर पाँच हजार चार सौ थे। इन सभी को शेशबस्सर उस समय ले आया जब बन्धुए बाबेल से यरूशलेम को आए।

एज्रा 5:16 (HINIRV) »
तब उसी शेशबस्सर ने आकर परमेश्वर के भवन की जो यरूशलेम में है नींव डाली; और तब से अब तक यह बन रहा है, परन्तु अब तक नहीं बन पाया।'
एज्रा 1:8 पर टिप्पणी: क्यों यह वचन मायने रखता है
यह वचन पुरानी नीति के पुनःस्थापना काल में एक व्यवस्थित क्रम की ओर इशारा करता है। जब चंद्रिका-निर्भर देश वापसी की तैयारी कर रहे थे, तो राजा का आदेश और निधि-प्राप्तियों की सूची एक व्यवस्थित सत्ता-व्यवस्था की स्थापना दिखाती है। यह वचन बताता है कि परमेश्वर की योजना में ऋण, संसाधन और नेतृत्व कैसे मिलकर यहूदियों को उनके मंदिर-निष्ठ जीवन की ओर बहाते हैं। “गिनकर सौंप दिया जाना” का अर्थ है प्रेरित, विवेकपूर्ण और ठोस व्यवस्थित प्रबंध, जिससे संदर्भगत उद्देश्य—यात्री-यात्रा, पुनर्निर्माण और विधि-निष्ठता—सुझाए जाते हैं।
पार्श्व संदर्भ और मूल संदर्भ
आदि से अंत तक, एज्रा के क्रम में लौटने वाले लोग अधर्म-न भी, परन्तु दयालु योजना के अंतर्गत टिके रहते हैं। इस अध्याय में—धन, सामग्री और प्रशासन का वितरण—मसीह-पूर्व परिप्रेक्ष्य में भी एक सिद्धान्त रहता है: परमेश्वर के लोग जब एकजुट होकर उसकी योजना के अनुसार चलते हैं, तब वे सामाजिक और धार्मिक ढांचे को पुनर्स्थापित कर सकते हैं। इस verse में शेष गिनतियों का प्रयोग यह संकेत देता है कि God-appointed leadership और सम्मिलित योगदान से संरचना मजबूत बनती है।
मुख्य संदेश
धर्मशास्त्रीय थीम्स
उद्धार-यात्रा, परमेश्वर की प्रभु-योजना में मानवीय भागीदारी, और सार्वजनिक प्रशासन के एकीकृत रूप कथा के भीतर उभरते हैं। इस संदर्भ में यह भी स्पष्ट है कि प्रवासी नहीं, बल्कि स्वदेश लौटने वाले समुदाय—जो मंदिर-निर्माण और नागरिक व्यवस्था के लिए अपना योगदान देते हैं—ईश्वर के निर्देशों के अनुसार चलते हैं।
क्रॉस-रेफरेंस और उनके सार्थक कनेक्शन्स
- एज्रा 1:6: लौटने वालों पर बारम्बार आशीष और सहयोग मिलता है; यह बताता है कि वे किस प्रकार से सामूहिक प्रयासों से मंदिर-मार्ग पर लौटते हैं।
- नहेमीयाह 7:73-8:1: समुदाय एकजुट हो कर पवित्र धार्मिक-उत्सव और ताजगी-पूर्ण विन्यास की ओर बढ़ता है; यह क्रॉस-रेफरेंस यह दर्शाता है कि प्रशासनिक व्यवस्था और धर्म-उत्साह किस तरह एक साथ चलते हैं।
- दानियाल 6:3-4: विपरीत परिस्थितियों में भी सत्ता के भीतर नैतिकता और समर्पण के साथ काम करने की सीख मिलती है; यह इंगित करता है कि राज्य-आदेश और धार्मिक-नियम एक साथ कैसे चलते हैं।
संक्षिप्त टिप्पणी (उद्धरण संदर्भ सहित)
Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणी-रेफरेंसेस के साथ एक संयोजन रूप में यह पंक्ति स्पष्ट करती है कि सत्ता-व्यवस्था के साथ परमेश्वर की योजना कैसे संचालित होती है। इन टिप्पणीकारों के कोण से नीचे के बिंदु उभरते हैं: - Henry बताते हैं कि इशारा यह है कि राजा-प्रशासन और मंदिर-सेवा दोनों एक-ही उद्देश्य की ओर उन्मुख होते हैं—ताकि प्रजा सुरक्षित, संगठित और भाद्रपद शुरू करे।
उद्धरण (संक्षेप): “प्रजा की सुरक्षा और नीति की स्थिरता परमेश्वर के कार्यों के क्रम में है।”
- Barnes इसे शासन और संपत्ति के न्यायपूर्ण वितरण के रूप में देखते हैं, ताकि सभी समुदाय एक समान अवसर और नियंत्रण प्राप्त करें।
- Clarke जोर देते हैं कि हर इकाई की गिनती से यह दर्शाता है कि भगवान की ओर से आने वाली व्यवस्था स्पष्ट, कार्यालय-संरचित और लेखी है—जो सबके लिए जवाबदेही बनाती है।
देवotional विचार
जब हम समाज-संरचना में भागीदारी करते हैं, तो यह दोनों तरफ से एक संकेत है: प्रभु के निर्देशों के अनुसार आगे बढ़ना और अपनी भूमिका को ईमानदारी से निभाना। चाहे आप नेतृत्व-स्थिति हों या सामान्य सदस्य, याद रखें कि आपकी भागीदारी ईश्वर के उद्देश्य को दृढ़ करने में सहायक है। इस verse के माध्यम से कल्पना करें कि आप अपनी वित्तीय या सेवामूलक क्षमता से किस तरह समुदाय को समर्थ बनाते हैं—ताकि परमेश्वर के घर का उद्देश्य तेजी से पूरा हो।
नैतिक-कार्य: अपने पारिवारिक, धार्मिक, आर्थिक योगदान को याद रखें कि यह सब मिलकर एक मजबूत, धर्मनिष्ठ और उत्तरदायी समाज बनाते हैं।