Old Testament
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एज्रा 1:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और जो कोई किसी स्थान में रह गया हो*, जहाँ वह रहता हो, उस स्थान के मनुष्य चाँदी, सोना, धन और पशु देकर उसकी सहायता करें और इससे अधिक यरूशलेम स्थित परमेश्वर के भवन के लिये अपनी-अपनी इच्छा से भी भेंट चढ़ाएँ।”
एज्रा 1:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
एज्रा 1:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 इतिहास 29:3 (HINIRV) »
फिर मेरा मन अपने परमेश्वर के भवन में लगा है, इस कारण जो कुछ मैंने पवित्र भवन के लिये इकट्ठा किया है, उस सबसे अधिक मैं अपना निज धन भी जो सोना चाँदी के रूप में मेरे पास है, अपने परमेश्वर के भवन के लिये दे देता हूँ*।

1 इतिहास 29:9 (HINIRV) »
तब प्रजा के लोग आनन्दित हुए, क्योंकि हाकिमों ने प्रसन्न होकर खरे मन और अपनी-अपनी इच्छा से यहोवा के लिये भेंट दी थी; और दाऊद राजा बहुत ही आनन्दित हुआ।

1 इतिहास 29:17 (HINIRV) »
और हे मेरे परमेश्वर! मैं जानता हूँ कि तू मन को जाँचता है और सिधाई से प्रसन्न रहता है; मैंने तो यह सब कुछ मन की सिधाई और अपनी इच्छा से दिया है; और अब मैंने आनन्द से देखा है, कि तेरी प्रजा के लोग जो यहाँ उपस्थित हैं, वह अपनी इच्छा से तेरे लिये भेंट देते हैं।
एज्रा 1:4 — immediate setting
युद्ध-विनाश के बाद बाबुल से लौटे चमकते हुए आत्मीय समाज ने यहूदियों के मंदिर के पुनर्निर्माण की योजना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। एज्रा 1:4 में यह दर्शाया गया है कि जो कोई भी समुदाय के भीतर परिवार के सदस्य या पड़ोसियों में से जगह-जगह रहे, वे अपनी संपत्ति से सहारे के साथ आर्थिक योगदान दें ताकि परमेश्वर के भवन की मरम्मत आधिकारिक रूप से चालू हो सके। यह निर्देश यरूशलेम लौटे हुए लोगों के बीच के सामूहिक उद्धार और भक्ति के नए अध्याय की शुरुआत का संकेत देता है।
ईश्वर और आस्था के बारे में पाठ से मिली सीख
यह वाक्य विश्वास के एक ऐसे ताने-बाने को दर्शाता है जहाँ धार्मिक पुनर्निर्माण का उद्देश्य समुदाय-आधारित दान पर निर्भर है। परमेश्वर के घर की मरम्मत के लिए जो भी लगे, वह केवल पूजा नहीं बल्कि एक संगठित सामाजिक दायित्व बन जाती है। यह दिखाता है कि परमेश्वर अपने लोगों की समृद्धि और भलाई के लिए उनके सभी संसाधनों के प्रयोग की इच्छा रखते हैं—ताकि उनके विश्वास-यात्रा में स्थायित्व और सार्वजनिक सम्मान बना रहे।
महत्वपूर्ण शब्द और चित्र
संबद्ध पवित्र ग्रंथों के संकेत
इन पंक्तियों के साथ पढ़ना उपयोगी है: धर्म-निर्माण के दान संबंधी बंधन (उत्पादन-सम्बन्धी उद्देश्यों के लिए), और समाज-सेवा के आयाम बताने वाले अन्य उद्धारक संदर्भ भी राह दिखाते हैं। उदाहरणार्थ, पुराने नियम के मंदिर-निर्माण के लिए दान की उनका उल्लेख मिलते हैं, जो इस पाठ के सामाजिक-आर्थिक आयाम को स्पष्ट करते हैं।
आज के लिए व्यवहारिक अनुप्रयोग
आज के संदर्भ में यह पाठ स्पष्ट करता है कि धार्मिक कार्य एक सामुदायिक प्रयास है। यदि हम किसी स्थानीय चर्च, आश्रम या सेवा-कार्य के लिए एकत्रित होते हैं, तो अपने-अपने संसाधनों को साझा करना एक पवित्र दायित्व है। यह न सिर्फ वित्तीय सहयोग है, बल्कि समय, प्रतिभा और पीछे छूटे हुए अवसरों को साझा करने की भी बात है। साथ ही यह याद दिलाता है कि भक्ति अपने पूर्ण सामुदायिक आकार में प्रकट होनी चाहिए—जहाँ सब मिलकर कल्याण की दिशा में कदम बढ़ाते हैं।
संक्षेपित समेकन
एज्रा 1:4 समुदाय-आधारित दान की महत्ता को स्थापित करता है, ताकि परमेश्वर के भवन का पुनर्निर्माण संभव हो और लोग अपने भाग्य-निर्धारण में भागीदारी अनुभव करें। यह दर्शाता है कि विश्वास वास्तव में एक साझा जीवन-यात्रा है, जिसमें हर एक का योगदान महत्त्वपूर्ण है।
एक नज़दीकीCross-References
1) हबेला 13:16 — दान से परमेश्वर की इच्छा पूरे होते हैं; स्वीकार्य भेंट केवल आर्थिक नहीं, बल्कि हृदय का परिवर्तन भी है। इसका संबंध is पाठ से है कि इच्छा-से भेंट करना एक विश्वास-पूर्ण जीवन का अंग है।
2) मलाकी 3:10 — देव-कार्य के लिए दिल से दान देना, ईश्वर की कृपा के कारण उपस्थित धन-आकर्षण से ऊपर उठता है। यह पाठ से प्रेरित है कि समुदाय के लिए समर्पण एक आस्था-प्रक्रिया है।
3) हग्ग 1:8 — मंदिर-निर्माण के उत्साह को पुनर्जीवित करने के लिए पहिले अपने घरों पर काम छोड़कर पहले परमेश्वर के घर को ऊँचा बनाओ। यह पंक्ति इस अध्याय के उत्साह से संगति बनाए रखती है कि उद्देश्य-निर्माण में प्रेरणा एक साझा आस्था की दिशा है।