Old Testament
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एज्रा 1:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब यहूदा और बिन्यामीन के जितने पितरों के घरानों के मुख्य पुरुषों और याजकों और लेवियों का मन परमेश्वर ने उभारा* था कि जाकर यरूशलेम में यहोवा के भवन को बनाएँ, वे सब उठ खड़े हुए;
एज्रा 1:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एज्रा 1:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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एज्रा 1:1 (HINIRV) »
फारस के राजा कुस्रू के राज्य के पहले वर्ष में यहोवा ने फारस के राजा कुस्रू का मन उभारा कि यहोवा का जो वचन यिर्मयाह के मुँह से निकला था वह पूरा हो जाए, इसलिए उसने अपने समस्त राज्य में यह प्रचार करवाया और लिखवा भी दिया:

फिलिप्पियों 2:13 (HINIRV) »
क्योंकि परमेश्वर ही है, जिसने अपनी सुइच्छा निमित्त तुम्हारे मन में इच्छा और काम, दोनों बातों के करने का प्रभाव डाला है।

2 कुरिन्थियों 8:16 (HINIRV) »
परमेश्वर का धन्यवाद हो, जिसने तुम्हारे लिये वही उत्साह तीतुस के हृदय में डाल दिया है।
एज्रा 1:5 का संकल्पना-परिप्रेक्ष्य और मुख्य अर्थ
पश्चिम-राज्य-वापसी के क्रम में यह पंक्ति यह संकेत करती है कि यहूदा और बिन्यामीन के पुरखाओं के घरानों के मुख्य पुरुषों, साथ ही याजकों और लेवियों की एक विशिष्ट संस्थित पहल उठी है। परमेश्वर ने उन्हें प्रेरणा दी कि वे यरूशलेम में मंदिर के निर्माण के कार्य के लिए उठ खड़े हों। यह संदर्भ शुरूआती समिति की बैठक नहीं, बल्कि पूजा-कार्य और मंदिर-निर्माण के लिए एक प्रवृत्ति की उद्घोषणा है, जिसे समाज के धार्मिक नेतृत्व ने साझा किया।
मुख्य अर्थ
यह Verse यह स्पष्ट कर देता है कि परमेश्वर की योजना के अनुरूप समुदाय का नेतृत्व और संकल्प एक संगठित और समन्वित कदम से आता है। मुख्य पुरुषों, याजकों और लेवियों के “मन” का उभारना दर्शाता है कि पूराने दिनों के धार्मिक-कर्यों को पुनर्स्थापित करने के लिए एक एकजुट, दृढ़ और संवेदनशील नेतृत्व तात्कालिक था। यह संकल्प मंदिर-निर्माण के लिए सामाजिक व आध्यात्मिक सहयोग की शुरुआत है; एक संकेत कि परमेश्वर अपनी संघ-स्थापना को मान्यता देते हैं और उनके विश्वासी सन्तान अपने स्थान पर खड़े होने को तैयार रहते हैं।
तीन प्रमुख विषय
सम्बन्धित पवित्र सूक्तियाँ
- पुराने निर्माण से प्रेरणा: प्रतिवेदन में मंदिर-निर्माण की तैयारियाँ और सामर्थ्य का एकीकरण, जिसे आगे के अध्यायों में कार्य-योजना के रूप में स्पष्ट किया जाता है।
- नेतृत्व के उदाहरण: यह्रूशालेम के पुनर्निर्माण के समय के नेताओं के कथनों से जुड़ी प्रेरणा मिलती है कि एकजुटता और समर्पण से बड़ा कार्य संभव होता है।
- आराधना-पुनर्स्थापना: गृहस्थ-योजना के साथ आराधनात्मक जीवन का पुनःस्थापन, ताकि परमेश्वर की आशीषों के बीच समुदाय को स्थिरता मिले।
व्यावहारिक विचार
अपने समय की तरह आज भी नेतृत्व, समुदाय-निर्माण और आराधना के बीच संतुलन आवश्यक है। यदि आप संस्था-कार्य में हों, तो न कोई छोटा समूह, न कोई बड़ा समूह—सब मिलकर लक्ष्य के प्रति अपनी-अपनी भूमिका निभाएं। परमेश्वर की प्रेरणा मिलते ही मन, योजना और क्रिया एक साथ चलती हैं।
छोटा cross-reference संकलन
ये संदर्भ सूचित करते हैं कि विश्वास के कार्यों में स्पष्ट योजना, एकता और सामाजिक-धार्मिक नेतृत्व की भूमिका बराबर होती है।
संक्षिप्त अंत-नोट
एज्रा 1:5 का क्षण यह दिखाता है कि परमेश्वर अपने लोगों की प्रेरणा से संसद-स्तर पर भी क्रिया-योजना बनवाते हैं। सार्वजनिक नेतृत्व के उभार और पूजा-कार्य की पुनर्स्थापना एक साथ चलती है, ताकि समाज धर्म-आस्था और ऐतिहासिक विरासत के साथ आगे बढ़ सके।
कड़ी-परिचय के लिए प्रमुख पाठक इस verse में देखेंगे कि कैसे समाज के वरिष्ठ और धार्मिक-नेतृत्व मिलकर भविष्य की दिशा तय करते हैं; यह प्रेरणा हमें भी अपने समुदाय-कार्य में एकजुटता और उद्देश्य की याद दिलाती है।
नोट: नीचे उद्धृत अंश Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के डी-क्रेस्ट टिप्पणी-रेफरेंसेस से मिलती-जुलती धरोहर के अनुसार समाहित हैं—परंतु पूर्ण पाठ नहीं दिये गए हैं।