Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
दानिय्येल 1:1 दानिय्येल 1:2 दानिय्येल 1:3 दानिय्येल 1:4 दानिय्येल 1:5 दानिय्येल 1:6 दानिय्येल 1:7 दानिय्येल 1:8 दानिय्येल 1:9 दानिय्येल 1:10 दानिय्येल 1:11 दानिय्येल 1:12 दानिय्येल 1:13 दानिय्येल 1:14 दानिय्येल 1:15 दानिय्येल 1:16 दानिय्येल 1:17 दानिय्येल 1:18 दानिय्येल 1:19 दानिय्येल 1:20 दानिय्येल 1:21



immediate setting: दानिय्येल 1:19
यह पद दानिय्येल और उसके तीन साथियों—हानन्याह, मीशाये il, और अजर्याह—की परीक्षा के समय का दृश्य बताता है। राजा बेएलशस्सर (नए नाम में हर जगह) उनके समक्ष तीनों युवकों की बुद्धिमत्ता और ज्ञान की परीक्षा कर रहा था ताकि वे आगे की योजनाओं में भाग लें। राजा उनसे बातचीत करने लगा, और उन चारों में से दानिय्येल, हनन्याह, मीशाये lal, और अजर्याह के तुल्य कोई न ठहरा; इसलिए वे राजा के सम्मुख हाज़िर रहने लगे। यह दर्शाता है कि दानिय्येल और उसके मित्रों ने बुद्धि, चरित्र और परमेश्वर की उपस्थितिकरण के कारण राजकीय बुलाहटों में भी प्रामाणिक स्थान पाया।
इस पाठ से ईश्वर और विश्वास के बारे में स्पष्टियां
1) परमेश्वर की सवेग-निष्ठा: पात्रों के साथ राजआधिकारिक संवाद में भी ईश्वर उनकी कर्तव्यनिष्ठा और खरे विश्वास के कारण उन्हें शक्तिशाली मानता है। यह दिखाता है कि इच्छा-पूर्वक उसकी आज्ञाओं को मानना, बाहरी दबाव के बावजूद, आंतरिक विश्वास की पुष्टि करता है।
2) नैतिक साहस और निष्ठा: यह पाठ युवाओं की निश्चलता, नीति-तर्क, और आत्म-विश्वास को प्रकाश में लाता है; राजा के सम्मुख उपस्थित रहना उन्हें एक बहुमूल्य दायित्व बनाता है—परमेश्वर की व्यवस्था के अनुसार चलना, भले ही परिणाम कुछ भी हों।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की व्याख्या
- तुल्य: यहाँ इसका अर्थ है वे लोग जो रचना के समय राजा के समकक्ष, विद्वान और विश्वसनीय थे। दानिय्येल और उसके साथियों के बारे में कहा गया है कि वे राजा के सम्मुख हाज़िर रहने लगे, अर्थात् वे उनके कानूनों और समझ से ऊपर नहीं उठे, बल्कि ईश्वर की पवित्रता के अनुरूप अपने स्थान पर स्थिर रहे।
- राजा के सम्मुख हाज़िर रहने लगे: इसका आशय यह है कि वे दीन-चाल, विनम्रता, और निष्ठा के साथ अपने रोल निभाने को तैयार थे; वे प्रमाणित रूप से अपने उच्च-स्तरीय उद्देश्य के लिए तैयार थे, भले ही प्रतिफल कौनसा हो।
संबंधित पद और उनके संकेत
1) दानिय्येल 1:17-18: परमेश्वर उनके ज्ञान और विचारों में प्रकाश डालता है, और सूचना मिलने पर राजा उन्हें और उनके साथियों को समझ-समझाकर बुलाता है। यह दिखाता है कि परमेश्वर उनकी बुद्धिमत्ता को बढ़ाता है ताकि वे राष्ट्र के लिए मार्गदर्शक बनें।
2) दानिय्येल 1:20: राजा के सम्मुख उनकी समझ और ज्ञान का मान बढ़ता है; यह दिखाता है कि परमेश्वर की कृपा से वे विश्वसनीय सलाहकार बनते हैं।
3) स्तोत्र 16:8: प्रभु के सामने स्थिर रहने की प्रेरणा, जो समय-परिवर्तन के बावजूद विश्वास को मजबूत बनाती है।
आज के समय में प्रासंगिक अनुप्रयोग
क्रॉस-रेफरेंस के साथ संक्षिप्त संयोग
- इब्रनियों 13:6 में प्रेरणा मिलती है कि हमें साहस के साथ कहा जा सकता है: "भगवान हमारा सहायक है; हम न डरेँ"—यह दानिय्येल के मित्रों के साहस को प्रेरित करता है।
- दानिय्येल 6:10: दानिय्येल के समान, विश्वासियों के लिए प्रतिकूल परिस्थितियों में भी परमेश्वर के घर में नियमों के अनुसार अभ्यास बनाए रखना अच्छा उदाहरण है।
- अय्यूब 2:9-10: कठिन समय में भी विश्वास को न छोड़ना और परमेश्वर की योजना पर निर्भर रहना सीखना चाहिए।
संक्षिप्त सार
इस verse में स्पष्ट है कि परमेश्वर ही हमारे विवेक, बुद्धिमत्ता और कदम-कदम पर देखी जाने वाली दृढ़ता को सुरक्षित रखता है। राजा के सामने प्रस्तुत होना वे चारों युवाओं की निष्ठा और ईश्वर-भक्ति का प्रमाण है, जो आज भी विश्वासियों को जीवन के हर क्षेत्र में प्रेरित करता है।
सूत्र-उद्धरण उपलब्ध उद्धरण: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणी-टेक्स्ट से यदि उद्धरण मिलते हैं, तो वे नीचे छोटे उद्धरण के रूप में लिखे हैं:
- "और राजा उनसे बातचीत करने लगा..." — Matthew Henry के स्वर के समान, यह भाग ईश्वर की प्रबल सहायता के साथ मानवीय सम्मान की पुष्टि दर्शाता है।
- "युवा पुरुषों की निष्ठा" — Albert Barnes के अवलोकन के अनुरूप, यह बताता है कि विश्वास में स्थिर रहना सामाजिक प्रतिष्ठा से ऊँचा है।