यिर्मयाह 27:19 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्योंकि सेनाओं का यहोवा यह कहता है कि जो खम्भे और पीतल की नांद, गंगाल और कुर्सियाँ और अन्य पात्र इस नगर में रह गए हैं,

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यिर्मयाह 27:19 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 27:19 का संधारना और संदर्भ

यिर्मयाह की यह पंक्ति बाबत है कि ईश्वर अपने चयनित दास भविष्यवक्ताओं के माध्यम से बैसिलोनिया के साम्राज्य का राजनैतिक-दार्शनिक आदेश उठाने का संदेश देते हैं। नगर के भीतर जरूरी पदार्थों, खम्बों, नांद, गंगाल आदि पात्रों के बारे में कहा गया है कि वे सेना के विरुद्ध या नगर से बाहर भेजे जाने के लिए नहीं हटेंगे—यानी वे धार्मिक-औपचारिक वस्तुएं भी उस समय के नियमों के अनुसार सुरक्षित रहीं। इस संदर्भ में यह स्पष्ट है कि परमेश्वर का उद्देश्य किसी एक विशेष शहर के भाग्य से सीधे-सीधे नहीं जुड़ा, बल्कि वह लोगों के षड्यंत्रों पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि यह उसकी योजना और आदेश का भाग है।

मुख्य भावार्थ

इस पद का केंद्रीय विचार है: परमेश्वर अपने चयन के माध्यम से राष्ट्र-राज्य के नियंत्रण को निर्धारित करते हैं, और वे जो भी वस्तुएँ नगर में बनी रही हैं, वे सार्वजनिक रूप से सुरक्षित रहेंगी ताकि भविष्य में परमधर्म की प्रक्रिया चलती रहे; यह संकेत देता है कि परमेश्वर इतिहास को नियंत्रण में रखते हैं, भले ही वह अस्थायी रूप से प्रतीत हो कि परिस्थितियाँ विपरीत हैं।

दो–तीन प्रमुख विषय

  • सर्वोच्च प्रभुत्व: परमेश्वर के आदेश से ही इतिहास आगे बढ़ता है, मानव विरोध-स्वभाव के बावजूद वह व्यवस्था बनाते हैं।
  • केंद्रित आश्वासन: नगर में रहने वाले पात्र और सामग्री उस समय तक सुरक्षित रहेंगी जब तक परमेश्वर की योजना पूरी नहीं होती।
  • यात्रा बनाम स्थिरता: परमेश्वर संकटों के बीच ऐसी स्थिरता दिखाते हैं जो आगे के उद्धार और विधान की ओर इशारा करती है।

cross-references (संकेतित संबंध पाठ)

- आदि में भविष्यवक्ता के आदेशों और प्रभुत्व के बारे में कुरआन के समान विचार मिलते हैं; यह संदर्भ दिखाते हैं कि परमेश्वर की योजना मानव प्रयासों से ऊपर है।

• दूसरी जगह पर यिर्मयाह की प्रकृति और परमेश्वर की योजना की दृढ़ता पर जोर है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी ईश्वर के संरक्षण को दर्शाती है।

• एक अन्य संदर्भ में ऐतिहासिक-भाव से यह समझाया गया है कि ईश्वर उनकी योजनाओं के अनुसार ही वस्तुएँ बनाते हैं, न कि हमारी समझ के अनुसार।

व्यावहारिक विचार

इस पंक्ति से सीख मिलती है कि हमें अस्थायी असंतोष या असफलताओं से निराश नहीं होना चाहिए; परमेश्वर की योजना में समय-समय पर आवश्यकता के अनुसार सुरक्षा और दिशा मिलती है। चयनित कार्यों और वि‍श्वास के क्षेत्र में विश्वास बनाए रखें, भले ही स्थिति विपरीत क्यों न हो जाए।

समापन सार

यिर्मयाह 27:19 यह स्मरण कराता है कि परमेश्वर इतिहास के नियंत्रण में हैं और वे उन वस्तुओं के बारे में भी विचार रखते हैं जो नगर में हैं—यह संकेत देता है कि उनका उद्देश्य भविष्य के कार्यों को आगे बढ़ाना है। हालांकि यह भाग एक पुराने संदर्भ का है, परन्तु आज भी हमें भरोसा देता है कि हमारी सुरक्षा और निर्देशन परमेश्वर के सिद्ध चरणों में स्थित है।

पूर्ववर्ती विचारों के उद्धरण (संक्षेप)

यदि आवश्यक हो, तो इस पंक्ति के मानक टिप्पणीकर्ता Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke की प्रमुख प्रतिभूतियों के छोटे उद्धरण नीचे प्रयुक्त हो सकते हैं। इन उद्धरणों के ठीक वाक्यों की संक्षिप्त पहचान के रूप में: Henry के विचार “...”— Barnes के विचार “...”— Clarke के विचार “...”—

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 27:19 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यहोवा के भवन में जो पीतल के खम्भे थे और कुर्सियाँ और पीतल का हौद जो यहोवा के भवन में था, इनको कसदी तोड़कर उनका पीतल बाबेल को ले गए।

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यहोवा के भवन में जो पीतल के खम्भे थे, और कुर्सियों और पीतल के हौज जो यहोवा के भवन में थे, उन सभी को कसदी लोग तोड़कर उनका पीतल बाबेल को ले गए।

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एक-एक खम्भे की ऊँचाई अठारह-अठारह हाथ की थी और एक-एक खम्भे के ऊपर तीन-तीन हाथ ऊँची पीतल की एक-एक कँगनी थी, और एक-एक कँगनी पर चारों ओर जो जाली और अनार बने थे, वे सब पीतल के थे।

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