यिर्मयाह 27:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

इसलिए तुम लोग अपने भविष्यद्वक्ताओं और भावी कहनेवालों और टोनहों और तांत्रिकों की ओर चित्त मत लगाओ जो तुम से कहते हैं कि तुमको बाबेल के राजा के अधीन नहीं होना पड़ेगा।

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यिर्मयाह 27:9 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 27:9 का निष्कर्षण बोध

मुख्य interpretive point: परमेश्वर के दायरे को छोड़कर भविष्यद्वक्ताओं, भावी कहनेवालों, टोनहों और तांत्रिकों की गहरी प्रेरणा से चित्त हटाने पर निश्चय ही तबाही और भ्रम का खतरा रहता है; ईश्वर के उद्देश्य के अनुसार परमादेश के विरुद्ध चलना असफलता है। यिर्मयाह इस संदर्भ में स्पष्ट करते हैं कि बाबेल की सत्ता और परमेश्वर की योजनाओं के बीच संतुलन कैसे समझना है, ताकि भगवान के वादा-विनियमन के अनुरूप आचरण किया जा सके।

लगभग साहित्यिक संदर्भ (literary context)

यिर्मयाह अपने समय की राजनीतिक चुनौती के amid लिखते हैं: यहूदा पर बाबेल की सत्ता स्थापित हो रही थी, और लोग तात्कालिक बजहों के कारण लोगों के दावों से सुख-स्वप्न देखने लगे। यहां कुछ प्रमुख बिंब दर्शक-जानकारी के माध्यम से समझना है: (1) भविष्यवक्ता और भावी कहनेवाले उन स्रोतों के प्रतिनिधि हैं जो वर्तमान परिस्थिति के बाहर से समाधान दिखाते हैं; (2) टोनहों और तांत्रिकों का संकेत आत्मविश्वास और अंधविश्वास के मिलन से जड़ है; (3) परमेश्वर की योजना में समय-सीमा और सिद्धांत हैं जो मनुष्य के तात्कालिक लाभ से ऊँचे हैं। इसलिए, वास्तविक सुरक्षा ईश्वर की इच्छा के अनुसार विश्वसनीय विश्वास-आचरण में है, ना कि तत्कालोन्मुख चमत्कारिक वादों में।

धार्मिक महत्व (theological significance)

इस आयत का संदेश आज भी स्पष्ट है: संकट के समय में भी परमेश्वर के निर्देशों को छोड़कर worldly योजनाओं पर भरोसा करना खतरे की बात है। यहूदियों के लिए बाबेल के अधीनता को स्वीकार कर लक्ष्य-परिवर्तन के संकेत के रूप में आया था, परन्तु परमेश्वर ने अपने लिए निष्कर्षित मार्ग बनाये। वास्तविक आशीष तब मिलती है जब मनुष्य परमेश्वर के काम में भरोसा रखे, भले ही मार्ग कठिन और प्रतीक्षा लंबी लगे।

क्रॉस-रेफरेंसेस (cross-references) और उनके सार्थक कनेक्शन

  • यीशया 30:1-2 – "वह चतुराई से चलकर अपने विचारों को प्रकट न करें" के साथ यह तर्क कि मनुष्य के अपने योजनाओं पर भरोसा भ्रमित कर सकता है; परमेश्वर के मार्ग में विश्वास बनाए रखें।
  • यहोशू 9:14 – यहूदियों ने नीतियों के प्रभाव में पड़कर सत्य से भ्रमित होने की कथा बताती है; बाहर के साक्ष्यों पर भरोसा करने से पहले परमेश्वर की पुष्टि जरूरी है।
  • Psalm 118:8-9 – मनुष्य की सुरक्षा किसी मनुष्य की बातों में नहीं है; हम केवल प्रभु की कृपा पर टिके रहें।

ये संदर्भ दिखाते हैं कि विरोधी-युग में भी परमेश्वर की आज्ञा पर टिके रहने का महत्त्व बना रहता है और मानवीय सलाह-आश्वासन के बजाय परमेश्वर के सत्य पर निर्भरता आवश्यक है।

reflection questions

  1. क्या मैं हाल की परिस्थितियों में भी परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं को याद रखने और उनके अनुसार चलने के लिए तैयार हूँ?
  2. क्या मेरी सहायता के लिए जो लोग तात्कालिक समाधान promise करते हैं, वे वास्तविक विश्वसनीयता और परमेश्वर की योजना से मेल खाते हैं?
  3. मैं किस प्रकार से ना-समझ से बचकर ईश्वर की योजना पर भरोसा रखने का अभ्यास कर सकता/ सकती हूँ?

संक्षिप्त निष्कर्ष

यिर्मयाह 27:9 हमें प्रेरित करता है कि भविष्यवक्ताओं और तांत्रिकों की छलनी-भरी सलाह से सावधान रहें; वास्तविक सुरक्षा परमेश्वर की योजना के अनुरूप आज्ञाओं में है। अपनी दृष्टि को तत्काल स्वप्नों के बजाय ईश्वर के सत्यान्वित मार्ग पर केंद्रित रखें।

महत्वपूर्ण उद्धरणधारणा — नीचे विवरणित शब्द Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के(public-domain) स्रोतों से भीतर समाहित हैं; यदि उद्धरण आया हो तो वे पूरी सामग्री के भीतर लक्षित रूप में दर्ज हैं:

याद रखने योग्य संकेत: Henry, Barnes और Clarke के कुछ वाक्यांशों के छोटे उद्धरण इस विषय के लिए उपलब्ध हैं, परन्तु पूर्ण पाठ नहीं।

कार्यसूची: इस परिप्रेक्ष्य में आप अपने जीवन-यात्रा के लिए किस प्रकार ईश्वर की योजनाओं पर टिके रहते हैं, यह सोचिए—और तत्काल प्रभाव के बजाय दीर्घकालिक विश्वास की दिशा में कदम बढ़ाइए।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 27:9 समानांतर पद और संबंधित वचन

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तब यहोवा ने मुझसे कहा, “ये भविष्यद्वक्ता मेरा नाम लेकर झूठी भविष्यद्वाणी करते हैं, मैंने उनको न तो भेजा और न कुछ आज्ञा दी और न उनसे कोई भी बात कही। वे तुम लोगों से दर्शन का झूठा दावा करके अपने ही मन से व्यर्थ और धोखे की भविष्यद्वाणी करते हैं। (यहे. 13:6)

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क्योंकि इस्राएल का परमेश्‍वर, सेनाओं का यहोवा तुम से यह कहता है कि तुम्हारे जो भविष्यद्वक्ता और भावी कहनेवाले* तुम्हारे बीच में हैं, वे तुमको बहकाने न पाएँ, और जो स्वप्न वे तुम्हारे निमित्त देखते हैं उनकी ओर कान मत लगाओ,

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जब लोग तुम से कहें, “ओझाओं और टोन्हों के पास जाकर पूछो जो गुनगुनाते और फुसफुसाते हैं,” तब तुम यह कहना, “क्या प्रजा को अपने परमेश्‍वर ही के पास जाकर न पूछना चाहिये? क्या जीवितों के लिये मुर्दों से पूछना चाहिये?” (लैव्य. 20:6, 19:31)

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