Old Testament
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मत्ती 1:19 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
अतः उसके पति यूसुफ ने जो धर्मी था और उसे बदनाम करना नहीं चाहता था, उसे चुपके से त्याग देने की मनसा की।
मत्ती 1:19 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मत्ती 1:19 समानांतर पद और संबंधित वचन
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व्यवस्थाविवरण 22:21 (HINIRV) »
तो वे उस कन्या को उसके पिता के घर के द्वार पर ले जाएँ, और उस नगर के पुरुष उसको पथराव करके मार डालें; उसने तो अपने पिता के घर में वेश्या का काम करके बुराई की है; इस प्रकार तू अपने मध्य में से ऐसी बुराई को दूर करना। (1 कुरि. 5:13)

व्यवस्थाविवरण 24:1 (HINIRV) »
“यदि कोई पुरुष किसी स्त्री को ब्याह ले, और उसके बाद उसमें लज्जा की बात पाकर उससे अप्रसन्न हो, तो वह उसके लिये त्यागपत्र लिखकर और उसके हाथ में देकर उसको अपने घर से निकाल दे। (मत्ती 5:31)

अर्थ का प्रत्यक्ष वक्तव्य
ऊनती तरह मत्ती 1:19 में लिखा गया है कि प्रेरित यूसुफ, जो धर्मी था और जो मर्यादा न गंवाने की इच्छा रखता था, उसे बदनाम कर देने की स्थिति से बचने के लिए चुपके से तोड़ लेने की योजना बनाता है। यह पंक्ति स्पष्ट करती है कि यूसुफ ने पवित्र वचन के अनुसार कदम उठाने का विचार किया, पर फिर दयालुता और सत्यनिष्ठा के कारण उसने परमेश्वर की योजना के अनुरूप निर्णय लिया।
प्रसंगिक पृष्ठभूमि
इस प्रसंग में यीशु के जन्म के अवसर पर मैट्थ्यू यह दर्शाते हैं कि यूसुफ दुष्कर परिस्थिति में भी धर्मी बना रहा। मरे हुए समाज की नजर में यह असामान्य और कलंकित घटना हो सकती थी, क्योंकि गर्भपूर्ववर्ती स्थिति स्पष्ट नहीं थी। परन्तु यूसुफ ने शारीरिक त्याग नहीं किया; वह चुपचाप उसे छोड़ने की योजना बनाकर ईश्वर की योजना के अनुसार चलना चाहता था।
व्याख्यात्मक बिंदु
संकेतित उद्धरण पुल
यह अनुभाग पवित्र शास्त्र की स्मृति को ध्यान में रखते हुए है: मैथ्यू 1:19 में यूसुफ की धारणा—धर्मीता और चुपके प्रेम की मिसाल—को स्पष्ट करता है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में और स्पष्ट विचार)
1) लूका 1–2 की शूरूआती घटनाओं में ईश्वर की योजना और पवित्र जन्म का मिशन; यह दिखाता है कि मानव विचार से बाहर जाकर भी परमेश्वर कैसे चलता है।
2) इब्रानी 11 में विश्वास के कर्मों का महत्व: यूसुफ के निर्णय से यह संकेत मिलता है कि विश्वास कैसे व्यवहार में प्रकट होता है।
3) योना 1–2 की नैतिक जटिलताओं के बावजूद परमेश्वर की उद्धारकारी योजना का प्रकट होना: दुखद परिस्थितियाँ भी उद्धार हेतु मार्ग बन सकती हैं।
थीमैटिक निष्कर्ष
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
कठिन परिस्थितियों में भी कृपापूर्ण निर्णय लें। अगर आप भयग्रस्त हों, तो प्रभु के मार्गदर्शन की प्रतीक्षा करें और अपने कदम को प्रेम और सत्य के साथ संभालें, क्योंकि ईश्वर की योजना हमें एक सुरक्षित और उद्धारपूर्ण मार्ग पर ले जाती है।
उद्धरण-ध्वनि संकेत
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के स्पष्ट शब्दों के छोटे उद्धरण ढूंढ़ते हैं, तो नीचे उनके उपलब्ध विचार सहानुभूतिपूर्वक देखने योग्य हैं; परन्तु यह भाग केवल संदर्भ के रूप में है और मुख्य विवेचना में संक्षेप में समाहित किया गया है।