Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीमत्ती 1:5 बाइबल पद की व्याख्या
मत्ती 1:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
सलमोन और राहाब से बोआज उत्पन्न हुआ, और बोआज और रूत से ओबेद उत्पन्न हुआ, और ओबेद से यिशै उत्पन्न हुआ।
मत्ती 1:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
मत्ती 1:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

इब्रानियों 11:31 (HINIRV) »
विश्वास ही से राहाब वेश्या आज्ञा न माननेवालों के साथ नाश नहीं हुई; इसलिए कि उसने भेदियों को कुशल से रखा था। (याकू. 2:25, यहो. 2:11-12, यहो. 6:21-25)

रूत 1:16 (HINIRV) »
रूत बोली, “तू मुझसे यह विनती न कर, कि मुझे त्याग या छोड़कर लौट जा; क्योंकि जिधर तू जाएगी उधर मैं भी जाऊँगी; जहाँ तू टिके वहाँ मैं भी टिकूँगी; तेरे लोग मेरे लोग होंगे, और तेरा परमेश्वर मेरा परमेश्वर होगा;

याकूब 2:25 (HINIRV) »
वैसे ही राहाब वेश्या भी जब उसने दूतों को अपने घर में उतारा, और दूसरे मार्ग से विदा किया, तो क्या कर्मों से धार्मिक न ठहरी*? (इब्रा. 11:31)
मत्ती 1:5 पर टिप्पणी—क्यों यह verse महत्त्वपूर्ण है
यह पाठ हमें यीशु के वंशावली की गहराई और परमप्रधान योजना की झलक देता है। मत्ती के अनुसार मसीह का जन्म एक विस्तृत परिवार की कथा है, जिसमें समाज के बहिष्कृत लोग भी कलह-कलह से उभरकर ईश्वर के उद्देश्य में स्थान पाते हैं। यह बताता है कि परमेश्वर अपने पोषण और चयनों में किस प्रकार पवित्र इतिहास बनाते हैं: सलमोन से बोआज, बोआज से रूत, और रूत से ओबेद, फिर आखिर में यिशै। इस सूची से हमें दया, विश्वास-पूर्णता, और पुरुष-परिवारों की पवित्रता के संकेत मिलते हैं।
पार्श्व-प्रश्न: मूल संदर्भ क्या है?
यह वंशावली राजा दाऊद से आगे बढ़ते हुए यीशु मसीह तक जाती है। बोआज और रूत का उल्लेख यह दर्शाता है कि गर्वित राष्ट्र के भीतर भी जातीय सीमाओं के परे कृपा चमत्कार कर सकती है। बोआज का संबंध रूत से है; रूत मोab राष्ट्र से आई महिला थी, जिसने निश्चयपूर्वक इस्राएली परमेश्वर को अपनाया। सलमोन के पिता के रूप में दाऊद का नाम यहाँ महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि दाऊद मसीही मसीह का शास्त्री-वंश है।
मुख्य संदेश
अनुयायोग्य विषय और पवित्र धारा
यहाँ तीन प्रमुख धारणाएँ मिलती हैं:
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में)
यही विषय अन्य शास्त्रों में भी दर्सित होते हैं:
इन संदर्भों से यह साफ होता है कि मसीह का आना एक वैश्विक उद्धार-योजना का हिस्सा है, जिसमें हर एक व्यक्ति की भूमिका हो सकती है—चाहे उसका सामाजिक दर्जा या जाति कुछ भी हो।
संक्षिप्त देवotional विचार
जब परमेश्वर हमें अपनी योजनाओं में शामिल करता है, तब वह हमें हमारे अक्षमाओं के बावजूद भी मान देता है। बोआज और रूत की गाथा提醒 देती है कि ईश्वर की करुणा पिछड़े लोगों के लिए भी खुली है। इस वंशावली के साथ हम यह सीखते हैं कि विश्वास, निष्ठा, और परिश्रम से परमेश्वर अपनी महिमा बढ़ाते हैं—यही प्रेरणा हमारे दैनिक जीवन में भी होनी चाहिए।
कथन-उद्धरण (इतिहासिक टिप्पणीकारों से)
हिंदी पाठ के लिए संकलित टिप्पणी में पहले के प्रसिद्ध विचारों के प्रति सम्मान के साथ संदर्भित अभिधारित विचार दिए जाते हैं, हालांकि सीधे पाठों के उद्धरण सार्वजनिक-डोमेन से लिए जाते हैं। नीचे उपलब्ध संक्षेप-उद्धरण से दो प्रमुख विचार स्पष्ट हैं:
यहां Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के विशिष्ट वाक्यों का संक्षिप्त उल्लेख किया गया है, अगर उपयुक्त पाया गया हो:
Matthew Henry: "The genealogies were kept up to teach us patience, and to shew how God overrules all generations for the coming of his Son." (संक्षिप्त सार)
Albert Barnes: "The lineage is not given for curiosity, but to show the truth of the Messiah's descent and the inclusion of Gentiles." (संक्षिप्त सार)
Adam Clarke: "God's providence guides the least likely means and persons to accomplish his purpose." (संक्षिप्त सार)