Old Testament
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मत्ती 1:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उज्जियाह से योताम उत्पन्न हुआ, योताम से आहाज उत्पन्न हुआ, और आहाज से हिजकिय्याह उत्पन्न हुआ।
मत्ती 1:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मत्ती 1:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 राजाओं 15:7 (HINIRV) »
अन्त में अजर्याह मर कर अपने पुरखाओं के संग जा मिला और उसको दाऊदपुर में उसके पुरखाओं के बीच मिट्टी दी गई, और उसका पुत्र योताम उसके स्थान पर राज्य करने लगा।

2 राजाओं 18:1 (HINIRV) »
एला के पुत्र इस्राएल के राजा होशे के राज्य के तीसरे वर्ष में यहूदा के राजा आहाज का पुत्र हिजकिय्याह राजा हुआ।

2 राजाओं 15:32 (HINIRV) »
रमल्याह के पुत्र इस्राएल के राजा पेकह के राज्य के दूसरे वर्ष में यहूदा के राजा उज्जियाह का पुत्र योताम राजा हुआ।
मत्ती 1:9 का तात्पर्य (HINIRV)
यह पंक्ति दफ़्तर-जातीय पंक्ति के माध्यम से यीशु के मानव-वंश का क्रम दिखाती है: उज्जियाह से योताम, योताम से आहाज, और आहाज से हिजकिय्याह। सरल शब्दों में कहा जाए तो यीशु के पूर्वजों की एक श्रृंखला स्थापित है ताकि यह स्पष्ट हो कि ईश्वर की योजना इतिहास के ठोस सत्य के साथ जुड़ी है।
प्रसंगगत पृष्ठभूमि
यह फुटनोट मत्ती के गुरुत्वपूर्ण वर्ग में आती है जो मरियम के पुत्र यीशु के वंशावली को क्रमबद्ध करती है। यह भाग यह दर्शाने के लिए है कि यीशु पौराणिक अवतार नहीं, बल्कि यहूदी धरोहर से जुड़ा हुआ वास्तविक व्यक्ति है। उल्लेखित राजा-वंश 20 पीढ़ियों के भीतर है और इन नामों के पीछे समय के कर्म और परमेश्वर की वाचा का इतिहास जुड़ा है।
व्याख्यात्मक विचार
संक्षिप्त थीमेटिक बिंदु
अनुष्ठानिक cross-references (संदर्भ) और उनके संकेत
1) रोमियों 15:12: ऐतिहासिक-आध्यात्मिक प्रेरणा कि राष्ट्रों के बीच मसीह के आगमन की आशाएं कैसे एक हैं।
2) आगे के गतिशीलता से यह स्पष्ट होता है कि दाऊद-वंश के पार्ट में नाम आने से यीशु की पुत्रता-प्रमाणक भूमिका पुष्ट होती है (2 सम Servants)।
3) इब्रानियों 2:9-11: यीशु संसार के लिए मानव जाति में प्रवेश और शुद्धता की भूमिका का संकेत देता है।
पवित्र पाठ से संक्षिप्त निष्कर्ष
यह वंशावली हमें बताती है कि यीशु का जन्म एक ऐतिहासिक वास्तविकता है, न कि एक मिथक। ईश्वर ने पुराने थामे हुए दायित्वों को निभाते हुए अपने उद्धार के योजनाबद्ध कदम उठाए। इससे हमारा विश्वास दृढ़ होता है कि मसीह की भूमिका पुरानी वाचा के अनुरूप और नए वचनों के साथ संगत है।
एतिहासिक टिप्पणी से प्रेरित व्यवहारिक सुझाव
क्यों यह हमारे लिए महत्वपूर्ण है
वंशावली की पकड़ से हम समझते हैं कि ईश्वर ने अतीत में जो किया, वही आज के सच को जन्म दे रहा है। यीशु के पूर्वजों के नाम याद दिलाते हैं कि ईश्वर की योजना निर्गम और धैर्य से भरी है—जहाँ पवित्र इतिहास और व्यक्तिगत आशा एक साथ मिलती है।
उद्धृत अंश: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से सीधी उद्धरण इस पंक्ति में आवश्यक नहीं है; यदि उठाया गया हो तो नीचे संक्षेप में नोट किया जाएगा।