Old Testament
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मत्ती 1:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और यिशै से दाऊद राजा उत्पन्न हुआ। और दाऊद से सुलैमान उस स्त्री से उत्पन्न हुआ जो पहले ऊरिय्याह की पत्नी थी। (2 शमू. 12:24)
मत्ती 1:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मत्ती 1:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 शमूएल 17:12 (HINIRV) »
दाऊद यहूदा के बैतलहम के उस एप्राती पुरुष का पुत्र था, जिसका नाम यिशै था, और उसके आठ पुत्र थे और वह पुरुष शाऊल के दिनों में बूढ़ा और निर्बल हो गया था।

2 शमूएल 12:24 (HINIRV) »
तब दाऊद ने अपनी पत्नी बतशेबा को शान्ति दी, और वह उसके पास गया; और उसके एक पुत्र उत्पन्न हुआ, और उसने उसका नाम सुलैमान* रखा। और वह यहोवा का प्रिय हुआ। (मत्ती 1:6)

1 शमूएल 16:1 (HINIRV) »
यहोवा ने शमूएल से कहा, “मैंने शाऊल को इस्राएल पर राज्य करने के लिये तुच्छ जाना है, तू कब तक उसके विषय विलाप करता रहेगा? अपने सींग में तेल भर कर चल; मैं तुझको बैतलहमवासी यिशै के पास भेजता हूँ, क्योंकि मैंने उसके पुत्रों में से एक को राजा होने के लिये चुना है*।” (लूका 3:31-32)
येशायाह के समान नहीं, परन्तु मसीह की रेखा में एक महत्त्वपूर्ण विगत
मत्ती 1:6 में जो कहा गया है, वह यीशु के वंश-संयुक्त इतिहास का एक अंश है। यह वचन डाले गए राजसी मार्ग के भीतर दाऊद तक जाकर पहुँचता है, फिर दाऊद से सुलैमान का नाम आता है, और अंत में एक ऐसी स्त्री का उल्लेख है जो पहले ऊरिय्याह की पत्नि थी। यह पाठ इतिहास की कड़ियों को जोड़कर दिखाता है कि प्रभु की कृपा कैसे प्रतिज्ञाओं के अनुसार पूरी होती है।
इस पद के तुरंत सेटिंग के बारे में
यह वही जाल है जहाँ इतिहास के पन्नों से मसीहा का घेरा बनना शुरू होता है। ग़ौरतलब है कि यह वंश-वृक्ष राजसी और कानून-नियम के बिल्कुल बाहर की घटनाओं से भी परे है, क्योंकि यहाँ परमेश्वर की व्यवस्था के अनुसार एक पाप के परिणाम, और उसकी कृपा द्वारा पुनर्जीवन, दोनों को साथ दिखाया गया है।
ईश्वर और विश्वास के बारे में यह टेक
इस वाक्य के पीछे का संदेश यह है कि परमेश्वर अपने वचन के अनुसार सफलताओं और निर्बलों दोनों प्रकार के लोगों से काम लेता है ताकि उद्धार की कहानी पूरी हो। यहाँ दाऊद का नाम और फिर एक स्त्री—जो पहले ऊरिय्याह की पत्नी थी—का उल्लेख इस बात की पुष्टि देता है कि ईश्वर की योजना मानवीय स्वच्छंद कल्पनाओं से ऊपर है और वह पाप को भी उसकी योजना के भाग के रूप में पवित्र उद्देश्य के लिए मोड़ सकता है।
महत्त्वपूर्ण शब्द और चित्र
अन्य सुसमाचार-सम्बन्धी स्थान (Cross-references)
1) 2 शमूएल 12:24-कथन— दाऊद के घर परिवार में घटना और कथित पाप के प्रोत्साहन के समय ईश्वर की योजना की दिशा स्पष्ट होती है।
2) दाऊद-वंश के ग्रंथों का संदर्भ— यह दिखाता है कि क्यों यीशु का वंश दाऊद से जुड़ा है, ताकि उन्होंने मसीह के दायरे में विश्व-उद्धार की प्रतिज्ञा पूरी की जा सके।
3) अन्य दूतावाही पुस्तके— यीशु के जन्म-परिवार की कहानी में विश्वास, दुःख और कृपा एक साथ मिलते हैं (यशायाह की भविष्यवाणी के संदर्भ में उद्धार का मार्ग स्पष्ट होता है)।
इन संदर्भों से समझ में आता है कि व्यक्ति-कथाओं का चित्रण भी परमेश्वर के उद्देश्य से जुड़ा है, तथा पाप और पुनर्स्थापन के बीच एक संतुलन बनता है।
आधुनिक अनुप्रयोग
1) विश्वास की स्पष्टता: हमें यह याद रखना चाहिए कि परमेश्वर की योजना मनुष्यों के व्यक्तिगत इतिहासों की ग़लतियों के बावजूद आगे बढ़ती है।
2) दया और उद्धार की आशा: हमारी गलतियों के बावजूद ईश्वर कैसे उद्धार के मार्ग खोलता है—यह पाठ इस पुनर्वास की गवाही देता है।
3) धैर्य और निष्ठा: दाऊद के वंश से यीशु तक का क्रम हमें यह सिखाता है कि धैर्य और विश्वास के साथ चलना परमेश्वर के समय-सारणी के अनुसार संभव होता है।
संक्षेप
मत्ती 1:6 इस बात की प्रमाणिता है कि यीशु का आगमन इतिहास के सबसे गहरे स्थानों से निकला है—दाऊद के वंश से, और एक ऐसी स्त्री के सम्बन्ध से जिसने पहले ऊरिय्याह की पत्नि होने के कारण एक असामान्य परिस्थिति प्रस्तुत की। यह सब परमेश्वर की योजनाबद्ध कृपा के चिह्न हैं, जो उद्धार के महान कार्य को पूरा करते हैं।
महत्वपूर्ण उद्धरण (अगर उपलब्ध हो): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के समान पंक्तियाँ इस पाठ की गहराई को समझाने में मदद करती हैं; किन्तु यहाँ विशेष उद्धरण को संक्षेप में जोड़ा गया है ताकि पाठ स्वाभाविक और संकलन-संगत रहे।