Old Testament
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मत्ती 1:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वह पुत्र जनेगी और तू उसका नाम यीशु* रखना, क्योंकि वह अपने लोगों का उनके पापों से उद्धार करेगा।”
मत्ती 1:21 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मत्ती 1:21 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यूहन्ना 1:29 (HINIRV) »
दूसरे दिन उसने यीशु को अपनी ओर आते देखकर कहा, “देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना* है, जो जगत के पाप हरता है। (1 पत. 1:19, यशा. 53:7)

प्रेरितों के काम 13:23 (HINIRV) »
उसी के वंश में से परमेश्वर ने अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार इस्राएल के पास एक उद्धारकर्ता, अर्थात् यीशु को भेजा। (2 शमू. 7:12-13, यशा. 11:1)

प्रेरितों के काम 4:12 (HINIRV) »
और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिसके द्वारा हम उद्धार पा सके।”
यीशु नामाकरण का उद्धारकारी उद्देश्य
मत्ती 1:21 के केंद्र में परमेश्वर की योजना का स्पष्ट सार है: पुत्र का जन्म होगा और उसका नाम यीशु रखा जाएगा, क्योंकि वह अपने लोगों को उनके पापों से उद्धार देगा। यह वाक्यांश सिर्फ एक नामकरण नहीं है, बल्कि उद्धार के कार्यवाह को उद्घाटित करता है। यीशु का नाम tejh में 'येशुआ' का एक रूप है जिसका मूल अर्थ है “यहोवा उद्धार करता है।” इस वचन द्वारा प्रेरित लेखन यह बताता है कि मसीही इतिहास की प्रमुख घटना—जन्म से लेकर उद्धार तक—के केंद्र में एक व्यक्तिगत उद्धारकर्ता है।
साहित्यिक संदर्भ: कथा-गठन और पृष्ठभूमि
यह दूतागमन (फिरौन-पूर्वां) के समय की संस्था है जहाँ पराश्रयकथा में पिता-राहत के साथ एक पवित्र योजना सामने आती है। मत्ती यह स्पष्ट कर रहा है कि यीशु का जन्म दया और विश्वास के एक लक्ष्य की पूर्ति करता है: पाप की विवशता से मनुष्यों को मुक्त करना। इस संदर्भ में दूत का कथन तुरंत Joseph को आश्वस्त करता है कि उसका पुत्र ईश्वर की योजनाओं का कौनसा केंद्र बनेगा।
आपके पापों से उद्धार का theological significance
“पापों से उद्धार करेगा” यह एक समग्र घोषणा है। यह बताती है कि उद्धार केवल व्यक्तिगत मोक्ष नहीं, बल्कि पाप की स्थिति, बुराई के शासन और शाश्वत मृत्यु के खतरे से मुक्ति है। यीशु का नाम-निर्देश यह संकेत करता है कि उद्धार का स्रोत कौन है और उसका उद्देश्य क्या है—मनुष्य को पुनः जीवित संबंध में लाना तथा परमilio के साथ सहभागिता देना।
अन्य पतों से सम्बन्ध (Cross-references) — संक्षिप्त विचार
इन संदर्भों से दिखता है कि उद्धार का संदेश एक सतत भाग है जो पुराने भविष्यवाणियों से लेकर नए विधान तक एक साथ चलता है।
प्रश्न-चिन्ह, अभिप्रेरण विचार
कनिष्ठ निष्कर्ष
मत्ती 1:21 उद्धार की कड़ी शुरुआत के रूप में सामने आता है—एक ऐसा नाम जो कार्यकर्ता-कार्य की पहचान कराता है। यीशु का जन्म नहीं केवल एक इतिहास-घटना है, बल्कि पाप की बंधन से मुक्त करने की ईश्वर की प्रतिज्ञा का चरण-चिह्न है। इस नाम के पीछे छुपी हुई घटनाएँ और वचन, सभी मिलकर यह बताते हैं कि परमेश्वर मानवता के लिए अपने उद्धारकर्ता को कैसे भेजता है—एक ऐसा सच्चा सन्तान जो हमारे पापों से उद्धार करेगा।
एब्नाम, ऐतबार और विश्वास की दृष्टि से उद्धार का यह संदेश हमारे दैनिक जीवन में भी उतारना चाहिए: तुम जिस पथ पर चलते हो, वहाँ यीशु के नाम पर तुम्हारी आशा, तुम्हारी माँग और तुम्हारी जीवनी का केंद्र होना चाहिए।
उद्धरण-नोट: Matthew Henry के आधुनिक उद्धरणों के समान, इस विवेचन में उद्धार के उद्देश्य और नाम के अर्थ पर जोर दिया गया है।