Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीमत्ती 1:12 बाइबल पद की व्याख्या
मत्ती 1:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
बन्दी होकर बाबेल पहुँचाए जाने के बाद यकुन्याह से शालतियेल उत्पन्न हुआ, और शालतियेल से जरुब्बाबेल उत्पन्न हुआ।
मत्ती 1:12 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मत्ती 1:12 समानांतर पद और संबंधित वचन
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लूका 3:27 (HINIRV) »
और वह यूहन्ना का, और वह रेसा का, और वह जरुब्बाबेल का, और वह शालतियेल का, और वह नेरी का, (एज्रा 3:2, नहे. 12:1)

एज्रा 3:2 (HINIRV) »
तब योसादाक के पुत्र येशू ने अपने भाई याजकों समेत और शालतीएल के पुत्र जरुब्बाबेल ने अपने भाइयों समेत कमर बाँधकर इस्राएल के परमेश्वर की वेदी को बनाया कि उस पर होमबलि चढ़ाएँ, जैसे कि परमेश्वर के भक्त मूसा की व्यवस्था में लिखा है। (मत्ती 1:12, लूका 3:27)

मत्ती 1:12 का मतलब: बन्धन से निकलकर यकुन्याह से शालतियेल तक
मुख्य व्याख्यान बिंदु यह है कि यीशु के वंशक्रम में हर चरण, चाहे बाधाओं से भरा हो या शांति से भरपूर, ईश्वर की योजना में एक आवश्यक क्रम बनकर आता है। बाबेल की captivity के बाद जो इतिहासिक क्रम उद्घाटित होता है, वह दैवीय वंशावली के क्रम को पुनः स्थापित करता है, जहाँ हर जन्म और हर lineage एकành उद्देश्य से जुड़ा है: मसीह का आगमन सुनिश्चित करना।
साहित्यिक संदर्भ (लिटरेरी कॉन्टेक्स्ट)
मैथ्यू की इन लाइनों में, पुराने टेस्टामेंट के कुल मिलाकर वंशावली को मुक्त छोड़ कर नई आशा के नृत्य में ढाला गया है। बाबेल से पहली बंधन के बाद का समय यकुन्याह से शालतियेल, फिर शालतियेल से जरुब्बाबेल—ये क्रम परमेश्वर के विधान के क्रम को दर्शाते हैं, कि कैसे पीड़ा और प्रतीक्षा के बीच महान उद्धार का प्रकाश धीरे-धीरे प्रकट होता है।
धार्मिक महत्त्व (थियोलॉजिक্যাল सिग्निफिकेंस)
जातीय क्रम में यह उल्लेख यह याद दिलाता है कि मसीह का जन्म पूर्ववर्ती पीढ़ियों के सौभाग्य और दोषों के साथ एक नवीन मोड़ पर किया गया है। यह दिखाता है कि परमेश्वर अपने लक्ष्य के अनुसार लोगों की निर्बलताओं में भी काम करता है—उत्पन्न शैतुत के वर्षों के बीच भी उद्धार की आकांक्षा बनी रहती है।
विभिन्न बाइबलों के साथ सम्बन्ध (Cross-References)
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि यीशु के वंशावली में लगे हर नाम का एक उद्देश्य है, न कि केवल इतिहास का विवरण।
चर्चित प्रश्न (Reflection Questions)
संक्षिप्त निष्कर्ष
बन्धन के बाद के क्रम में दाऊद की रेखा जैसी शक्तिशाली परंपरा का नाम-क्रम जीवन देता है कि मसीह के आगमन का समय-निर्धारण ईश्वर की सार्वभौमिक उद्धार योजना का भाग है। यह पाठ हमें याद दिलाता है कि हर पीढ़ी एक उद्देश्य के साथ जुड़ी है—और हर नाम एक प्रमाण है कि परमेश्वर अपने वादों को पूरा करता है।
हिंदी पाठ के लिए उद्धरण (Public-Domain) से मिलती टिप्पणियाँ
यदि आवश्यक हो, तो नीचे एकत्रित टिप्पणी-शैली में देखें: "यह क्रम दर्शाता है कि परमेश्वर अपने वचन के अनुसार कब-कहाँ उद्धार की रोशनी प्रकट करेगा, भले ही वह समय अड़चनों से भरा हो।" यह सार Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के मौलिक टिप्पणी-सीनों से समकक्ष है—परन्तु मैंने इन उद्धरणों को संक्षेप में वर्णित रखा है ताकि पाठक को मूल भाव स्पष्ट रहे।