Old Testament
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मत्ती 1:22 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यह सब कुछ इसलिए हुआ कि जो वचन प्रभु ने भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा था, वह पूरा हो (यशा. 7:14)
मत्ती 1:22 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मत्ती 1:22 समानांतर पद और संबंधित वचन
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लूका 24:44 (HINIRV) »
फिर उसने उनसे कहा, “ये मेरी वे बातें हैं, जो मैंने तुम्हारे साथ रहते हुए, तुम से कही थीं, कि अवश्य है, कि जितनी बातें मूसा की व्यवस्था और भविष्यद्वक्ताओं और भजनों की पुस्तकों में, मेरे विषय में लिखी हैं, सब पूरी हों।”

मत्ती 2:23 (HINIRV) »
और नासरत नामक नगर में जा बसा, ताकि वह वचन पूरा हो, जो भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा कहा गया थाः “वह नासरी* कहलाएगा।” (लूका 18:7)

1 राजाओं 8:15 (HINIRV) »
और उसने कहा, “धन्य है इस्राएल का परमेश्वर यहोवा! जिस ने अपने मुँह से मेरे पिता दाऊद को यह वचन दिया था, और अपने हाथ से उसे पूरा किया है,
मुख्य बिंदु: परमेश्वर का वचन-सत्य अनुभव हेतु पूर्ण होना
मत्ती 1:22 में यह उद्घोष स्पष्ट करता है कि यीशु का जन्म नियम-पूर्व भविष्यवाणी के पूरा होने के साथ संगत था। यह कथन उस समय की परिस्थितियों में भगवान के plans के पूर्ण आश्वासन को दर्शाता है कि यह घटना, जो मानवीय दृष्टि से सामान्य लगती थी, परमेश्वर की कोमल and शक्तिशाली योजना का भाग थी। यह वचन यह बताता है कि इच्छित परिणाम और दूत-स्वर के निर्देशों के अनुसार घटनाओं की क्रमबद्धता परमेश्वर की उद्देशित योजना के अनुरूप घटी।
साहित्यिक संदर्भ: साहित्यिक संदर्भ के अनुरूप दृश्य-व्यवस्था
यह पाठ मैथी के द्वारा दिया गया है ताकि यीशु के जन्म की स्थापना और मसीही दायित्वों का आधिकारिक आरम्भ स्पष्ट हो सके। मत्ती अपने पहले अध्याय में दृढ़ता से यह दिखाना चाहता है कि नया वादा-आगमन पुरानी भविष्यवाणियों के साथ कैसे जुड़ा है। यहाँ “यशा” की भविष्यवाणी से जुड़ना यह दर्शाता है कि परमेश्वर का वचन स्थिर रहता है और इतिहास के हर मोड़ पर उसके पालनकर्ता होते हैं।
धार्मिक महत्व: नये वचनों के साथ पुराने वचनों का मेल
यह पहचान कि “जो वचन प्रभु ने भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा था, वह पूरा हो गया” हमें यह स्मरण कराती है कि यीशु का जन्म एक पूर्ण, बहुप्रतीक्षित वाचा का प्रभाव है। यह न तो अकस्मात घटना है और न ही एक साधारण बालक, बल्कि परमेश्वर के उद्धार-कार्य की पहली पंक्ति है जिसका लक्ष्य मानवजाति को नया जीवन देना है।
अनुबंध-संबंधी प्रेरणा
Cross-reference ideas (संक्षेप):
- यशा 7:14 से संकेत मिलती है कि मसीह का जन्म एक विशिष्ट प्रावधान के अनुसार है, जो नया संकल्प देता है।
- गलतफहमी बनती है जब लोग स्वतःस्फूर्त घटनाओं को उद्धार-कार्य से विभाजित करते हैं; यह वचन उसी एकात्मता को स्थापित करता है।
- मत्ती 2:15 में भी यह नीतिगत प्रयोजन दिखता है कि घटनाओं की क्रमिकता परमेश्वर के योजनाबद्ध समय के अनुसार है।
reflection प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
मत्ती 1:22 से स्पष्ट होता है कि यीशु के जन्म-घटना का हर पहलू परमेश्वर के महान उद्धार-कार्य का भाग है और यह पुराने भविष्यवाणी-विश्वास के अनुरूप पूर्ण हुआ। यह पाठ हमें याद दिलाता है कि ईश्वर के वचन में स्थिरता और प्रामाणिकता है, और उसकी योजना समय की कसौटी पर खरी उतरती है।
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प्रकाशित अंश (उद्धृत विचार):
Matthew Henry के शब्द: “...his promise is not only pledged, but performed in due time.”
Albert Barnes के शब्द: “The event occurred to fulfill the word spoken by the Lord by the prophet.”
Adam Clarke के शब्द: “This is the culmination and evidence of the divine foreknowledge and faithfulness.”