Old Testament
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मत्ती 1:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
हिजकिय्याह से मनश्शे उत्पन्न हुआ, मनश्शे से आमोन उत्पन्न हुआ, और आमोन से योशिय्याह उत्पन्न हुआ।
मत्ती 1:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
मत्ती 1:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 राजाओं 13:2 (HINIRV) »
उस जन ने यहोवा से वचन पाकर वेदी के विरुद्ध यह पुकारा, “वेदी, हे वेदी! यहोवा यह कहता है, कि सुन, दाऊद के कुल में योशिय्याह नामक एक लड़का उत्पन्न होगा, वह उन ऊँचे स्थानों के याजकों को जो तुझ पर धूप जलाते हैं, तुझ पर बलि कर देगा; और तुझ पर मनुष्यों की हड्डियाँ जलाई जाएँगी।”

2 राजाओं 24:3 (HINIRV) »
निःसन्देह यह यहूदा पर यहोवा की आज्ञा से हुआ, ताकि वह उनको अपने सामने से दूर करे। यह मनश्शे के सब पापों के कारण हुआ।

2 राजाओं 20:21 (HINIRV) »
अन्त में हिजकिय्याह मर कर अपने पुरखाओं के संग जा मिला और उसका पुत्र मनश्शे उसके स्थान पर राज्य करने लगा।
मत्ती 1:10 का आलोचनात्मक संदर्भ: प्रेरित वंशावली के क्रम में
योजना के अनुसार इस पद में उत्तर से उत्तर तक राजसी वंशावली का क्रम दिखता है: हिजकिय्याह, मनश्शे, आमोन, और फिर योशिय्याह। यह क्रम एक विशेष उद्देश्य से दिया गया है—पश्चात्ताप, दया और दायित्व के बीच गहरे सम्बन्ध को उभारना। इसे स्मरणीय बनाते हुए, लेखक अपने पाठक को यह संकेत देता है कि ईश्वर की योजनाएं इतिहास के हर मोड़ पर चलती रहती हैं, यहाँ तक कि वंश-वास्तव के घुमाव भी परमेश्वर की पवित्र योजना के अंश हैं।
ईश्वर और विश्वास के बारे में टेक्स्ट क्या बताता है
यहाँ एक क्रमबद्ध सूची और राजसी वंशावली है जो भविष्य के उद्धारकर्ता मसीह के आगमन से जुड़ी है। हर नाम एक परिवारिक धागा है, जो पाप और पश्चात्ताप के चक्र के बीच ईश्वर की संकल्पना को प्रस्तुत करता है—न केवल इतिहास कीकथा, बल्कि दायित्वपूर्ण जीवन की त्रुटियों के बावजूद ईश्वर की चंगेरी और करुणा का प्रमाण है।
प्रमुख शब्दों का स्पष्टीकरण
अन्य प्रचलित बाइबल टिप्पणीकारों से संकेत
एडम क्लार्क और एलबर्ट बार्न्स के विश्लेषण इस बात पर बल देते हैं कि यह वंशावली भीतर-भीतर पाप और सन्तोष दोनों के चक्र का चित्रण है, जो परमेश्वर की योजना के सुधारक कदम के रूप में दिखता है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (मैथ्यू हेनरी, एलबर्ट बार्न्स या एडम क्लार्क): यदि इन टिप्पणीकारों के पंक्तियों से विशेष छोटी-छोटी पंक्तियाँ उपलब्ध हों, उन्हें पाठ में संक्षेप में उद्धृत किया जा सकता है, किन्तु पूर्ण टेक्स्ट प्रकट नहीं किया गया है।
अनुकरणीय क्रॉस-रेफरेंसे
1) भ्रातृत्व के पथ पर आने वाले परिवर्तन—यशायाह या दाऊद के वंश के साथ मिलकर: यह दिखाता है कि ईश्वर की योजना समय के साथ गतिशील है।
2) दया का पुनरावलोकन—पाप के क्रम के बावजूद वरदान का पुनरोद्धार: यह प्रेरित करता है कि हम अपनी कमजोरियों में भी ईश्वर की कृपा देखते रहें।
3) उद्धारकर्ता के आगमन के संकेत—वंशावली का उद्देश्य मसीह तक पहुँच बनाना है, ताकि विश्वासी उसे पहचान सकें।
आज के संदर्भ में अनुप्रयोग
- इतिहास के अंशों में भी ईश्वर की योजना निरन्तर चलती है; हमारे जीवन के छोटे-छोटे पल भी उस महान योजना का हिस्सा हो सकते हैं।
- असफलताओं के बीच धैर्य और दया की आशा बनाकर चलना चाहिए; परमेश्वर के कार्य में परिवर्तन संभव है।
- वंशावली की याद दिलाती है कि हमारे व्यक्तिगत पथ में भी उत्तरदायित्व और आशीर्वाद दोनों साथ चलते हैं; यदि हम ईश्वर की राह पर रहें, तो स्थिरता मिलती है।