Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 1:1 2 शमूएल 1:2 2 शमूएल 1:3 2 शमूएल 1:4 2 शमूएल 1:5 2 शमूएल 1:6 2 शमूएल 1:7 2 शमूएल 1:8 2 शमूएल 1:9 2 शमूएल 1:10 2 शमूएल 1:11 2 शमूएल 1:12 2 शमूएल 1:13 2 शमूएल 1:14 2 शमूएल 1:15 2 शमूएल 1:16 2 शमूएल 1:17 2 शमूएल 1:18 2 शमूएल 1:19 2 शमूएल 1:20 2 शमूएल 1:21 2 शमूएल 1:22 2 शमूएल 1:23 2 शमूएल 1:24 2 शमूएल 1:25 2 शमूएल 1:26 2 शमूएल 1:27



2 शमूएल 1:14 — immediate setting
यह पद द्वितीय शमूएल के घटनाक्रम के बाद की कथा का भाग है। संघर्ष की तलवारें ठंडी नहीं हुईं थीं; दाऊद के पास एक नयी चुनौती आई—यहोवा के अभिषिक्त को मारने वाले एक युवाकर्मी के वचन का सामना। घटनाक्रम यह दर्शाते हैं कि राजा की सुरक्षा और दशा परमेश्वर के चयन के प्रति संवेदनशील होनी चाहिए, और सत्ता के साथ संतुलन रखते हुए भी आज्ञा-शास्त्र का सम्मान आवश्यक है।
पाठ क्यों महत्त्वपूर्ण है: परमेश्वर और ईमान की नजरें
इस वाक्य में दाऊद से पूछा गया प्रश्न एक नैतिक परीक्षा है: क्यों तुम यहोवा के अभिषिक्त को नुकसान पहुँचाने के कदम से नहीं डरे? ईश्वर के चुने हुए के प्रति सम्मान, और नीतिपरक विवेक की मांग यहाँ स्पष्ट है। यह संदेश केवल व्यक्तिगत पश्चात्ताप या शारीरिक सुरक्षा नहीं, बल्कि धार्मिक नेतृत्व के अनुरूप आचरण की मांग है।
प्रमुख शब्द और भाषा-संकेतन
संदर्भित पाठ और संबंधित आयतें
यह दृश्य 1 समूएल 24–26 के आस-पास के घटनाक्रम से आकर्षित है, जहाँ राजा के दायरे में नैतिक निर्णय और भय के कारणों पर विचार किया गया है।
गम्भीर आयतें जो इस विषय से संबद्ध मानी जा सकती हैं:
पूर्व-स्थापित विवेचन और ठोस निष्कर्ष
कई सार्वजनिक-डेटेड टीका-ग्रंथों में यह बात निकलती है कि दाऊद न केवल राजनीतिक चाल में फँसता है, बल्कि परमेश्वर के अभिषिक्त के प्रति सम्मान बनाए रखना भी एक परमधार्मिक नैतिकता है। यह संदेश आज भी प्रासंगिक है: नेता और भक्त, दोनों को ईश्वर-आज्ञा के अनुरूप चलते हुए अपने हाथ उठाने से डरना नहीं चाहिए।
आज के दृष्टिकोण के साथ अनुप्रयोग
- कठिन नैतिक निर्णयों के समय: संस्थागत अधिकार के बावजूद ईश्वर के निर्देश पर_FIRST anchor_ टिके रहना।
- नेतृत्व में ईमानदारी: सत्ता के दबाव में भी अभिषिक्त के सम्मान की रक्षा करें।
- भय पर विजय: प्रभु के भय से ही साहस मिलेगा, न कि मानवीय दबाव से।
क्रॉस-रेफरेंसेस (সংক্ষেপ) और उनका संक्षिप्त स्पष्टीकरण
1) 1 समूएल 24:10 — दाऊद का अपनी योग्यता नहीं दिखाने का संकेत; परमेश्वर के अभिषिक्त के प्रति सम्मान के साथ निर्णय लेना।
2) संदर्भ: संदेसा—यहोवा के अभिषिक्त के विरुद्ध कदम उठाने से पहले विचार करना।
3) उत्पत्ति 20:13 और रोमियों 13:1-2 — राज्य-नीति और परमेश्वर के अधिक महत्त्वपूर्ण आह्वान की समझ।
ध्यान दें: नीचे दी गई उद्धरण-रेखा में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरणों के शब्द-टुकड़े केवल यदि उपलब्ध हों, वे प्रस्तुत किए गए हैं:
उद्धरण-उल्लेख: "तू यहोवा के अभिषिक्त को नष्ट करने के लिये हाथ बढ़ाने से क्यों नहीं डरा?"—यह पाठ के सीधे शब्द हैं. (अनुदत्त पाठ)