Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 1:1 2 शमूएल 1:2 2 शमूएल 1:3 2 शमूएल 1:4 2 शमूएल 1:5 2 शमूएल 1:6 2 शमूएल 1:7 2 शमूएल 1:8 2 शमूएल 1:9 2 शमूएल 1:10 2 शमूएल 1:11 2 शमूएल 1:12 2 शमूएल 1:13 2 शमूएल 1:14 2 शमूएल 1:15 2 शमूएल 1:16 2 शमूएल 1:17 2 शमूएल 1:18 2 शमूएल 1:19 2 शमूएल 1:20 2 शमूएल 1:21 2 शमूएल 1:22 2 शमूएल 1:23 2 शमूएल 1:24 2 शमूएल 1:25 2 शमूएल 1:26 2 शमूएल 1:27



2 शमूएल 1:26 पर टिप्पणी
पद में दाऊद स्वयं अपने मित्र योनातान के प्रति गहन प्रेम और संवेदना व्यक्त करता है, जो मित्र के प्रति उसकी हार्दिकτέρα और समर्पण को रेखांकित करता है। योनातान, जो कि शाऊल के पुत्र थे, दाऊद के लिए एक महत्वपूर्ण सहयोगी और सहासी थे; इस verse में दाऊद अपने दुःख और प्रेम के गहरे मिलन का बखान करते हैं।
केंद्रीय अर्थ
यह पंक्ति मित्रता की सच्ची गहराई को दर्शाती है। योनातान ने दाऊद के लिए जो प्रेम और निष्ठा दिखाई, वह सामान्य मानवीय प्रेम से ऊपर उठकर एक आत्मीय बन्धन का प्रतीक बन गया है। दाऊद कहता है कि योनातान का प्रेम उसके लिए अद्भुत था—यह प्रेम सांसारिक लाभ के विपरीत, आत्मीय समर्पण और मित्रता की उच्चतम निशानी है।
मुख्य विषय
कथात्मक संदर्भ और संबंधित आयतें
यह शबू-युग के समय की राजनीतिक और व्यक्तिगत जटिलताओं के बीच दाऊद और योनातान के रिश्ते को उभारता है: यहोवा की योजनाओं में दाऊद के भविष्य की दिशा कितनी भी अस्थिर क्यों न हो, मित्रता एक स्थिर संदर्भ बनकर रहती है।
स्पष्ट संदर्भ: 1) शेम 1:25–26 में दाऊद ने योनातान के साथ अपने प्रेम और भावना को व्यक्त किया है; 2) 2 शमूएल 4:4 में दाऊद के जीवन के अन्य मोड़ भी दिखते हैं, जहाँ मित्रता और विश्वास की आस्था पर गहन प्रभाव पड़ता है; 3) प्रेरितियों के काल में भी मित्रता के चरित्र का मूल्य बारम्बार उभरता है।
व्यावहारिक चिंतन
हम कैसे अपने मित्रों के साथ प्रेम और निष्ठा दिखाते हैं? कठिन समय में एक-दूसरे के लिए और अधिक समर्पण कैसे संभव हो, यह कविता हमें सिखाती है। दोस्ती में संवेदनशीलता, सत्यनिष्ठा और कठिन समय में साथ देने का साहस आवश्यक है। स्वयं को दयालु, शांत और सहनशील बनाकर हम भी अपने मित्रों के लिए ऐसे प्रेम के उदाहरण बन सकते हैं।
छोटे cross-references और संकेत
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह पद दाऊद और योनातान की मित्रता की अत्यंत प्रेरक तस्वीर प्रस्तुत करता है—ऐसी निष्ठा जो दु:ख के समय भी बनी रहती है और प्रेम की गहराई को उजागर करती है। यह सन्देश बताता है कि सच्ची मित्रता परमेश्वर के आशीर्वाद से बनती है और जीवन की कठिनाइयों में सहारे का स्रोत बनती है।
मूल उद्धरण (मार्थवे, Barnes, Clarke के समान पंक्ति से): उद्धरण के लिए नीचे सन्निर्दिष्ट विशिष्ट पंक्तियाँ पूरी किताब से मिलती हैं; यहाँ पर संक्षेप में उनका तत्वात्मक योगदान है: मार्थवे का मानना है कि मित्रता ऐसी है जो जीवन में दुःख के समय भी जीवित रहती है; Barnes कहता है कि यह प्रेम आपसी निष्ठा और एक-दूसरे के लिए प्रतिबद्धता का प्रदर्शन है; Clarke ने इसे मानवीय प्रेम के उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया है।