Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 1:1 2 शमूएल 1:2 2 शमूएल 1:3 2 शमूएल 1:4 2 शमूएल 1:5 2 शमूएल 1:6 2 शमूएल 1:7 2 शमूएल 1:8 2 शमूएल 1:9 2 शमूएल 1:10 2 शमूएल 1:11 2 शमूएल 1:12 2 शमूएल 1:13 2 शमूएल 1:14 2 शमूएल 1:15 2 शमूएल 1:16 2 शमूएल 1:17 2 शमूएल 1:18 2 शमूएल 1:19 2 शमूएल 1:20 2 शमूएल 1:21 2 शमूएल 1:22 2 शमूएल 1:23 2 शमूएल 1:24 2 शमूएल 1:25 2 शमूएल 1:26 2 शमूएल 1:27



मुख्य Interpretive बिंदु
2 शमूएल 1:17 के अनुसार दाऊद ने शाऊल और योनातान के लिए विलापगीत रचा, जो पाप-परिणामों के बीच दाऊद की निष्ठा, शोक और ईश्वर के साथ प्रतिश्रुति को दर्शाता है। यह गीत केवल शहादत का दुख नहीं है, बल्कि विश्वास की दृष्टि से यह ईश्वर के न्याय और दया के बीच संतुलन प्रस्तुत करता है।
साहित्यिक संदर्भ
यह विलापगीत दाऊद के भीतर भावनात्मक तीव्रता को उभारता है — राजा के पुत्रों की मृत्यु पर व्यक्तिगत शोक, लेकिन साथ ही अपने राज्य के भविष्य के बारे में चिंतन। पाठ में माधुर्य और कड़वा सच एक साथ उभरता है, क्योंकि दाऊद शाऊल और योनातान दोनों के प्रति सम्मान दिखाता है, जबकि यह भी स्पष्ट कर देता है कि राजा की मृत्यु whole इस्राइल की राजनीतिक और धार्मिक संरचना को कैसे कमजोर बनाती है।
उच्चारणीय théological significance
गीत में तीन प्रमुख धाराएं मिलती हैं: (1) शोक की आस्था: दुख के बीच भी दाऊद अपनी आस्था और ईश्वर के कार्य के बारे में आशा बनाए रखता है; (2) शत्रु-विरोधी सत्य: शाऊल की मौत के साथ यहूदियों के लिये विरोधी शक्तियों के विरुद्ध स्थिरता का संदेश मिलता है; (3) उत्तराधिकार और राजशाही की वैधता: योनातान जैसे युवा प्रायः राजा की सत्ता के वैध उत्तराधिकारी के रूप में स्मरणीय होते हैं।
अन्य ग्रंथों के साथ जोड़तोड़
यह विलाप पुराने नियम के अन्य विलाप-गीतों से प्रेरणा लेता है जिनमें राजा के पवित्र नेतृत्व और समुदाय की सुरक्षा के आग्रह होते हैं। साथ ही, दाऊद का आध्यात्मिक दृष्टिकोण यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर के उद्देश्यों के सामने व्यक्तिगत दर्द कितना गहरा हो सकता है।
धार्मिक दृष्टिकोण से उपयोगी विचार
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त रूप से) और उनका तात्पर्य
- समय-समय पर विलाप की धारणा अन्य taarat में भी दिखती है, जहाँ नायकों के लिये शोक एक आध्यात्मिक विरासत बनता है।
- राजा के पतन के बाद भी ईश्वर के उद्धार के आशय को याद रखना, यहुदियों के इतिहास में पुनर्निर्माण के संकेत देता है।
- विश्वासियों के लिए यह एक अवसर है कि वे अपने दुखों को ईश्वर के समक्ष प्रस्तुत करें और सुरक्षित आशा पथ खोजें।
Reflection के लिए कुछ प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
2 शमूएल 1:17 का विलाप गीत दाऊद की निष्ठा, समुदाय के प्रति सम्मान और राजसी उत्तराधिकार के प्रश्न को एक साथ प्रस्तुत करता है। यह हमें यह सिखाता है कि दुख के समय भी हम परमेश्वर की योजना के प्रति विश्वास और प्रार्थना को बनाए रखें, ताकि हमारी संवेदनाएं परमेश्वर के उद्देश्य के प्रकाश में निखरें।
उद्धरण-आधार: यह commentary Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट टुकड़ों के चयनित विचारों के साथ एकीकृत किया गया है। नीचे दोनों प्रमुख टिप्पणीकारों के छोटे उद्धरण उपलब्ध हैं:
“Let us not murmur at the Lord’s dispensations, but adore the wisdom that appoints every sorrow.” — Matthew Henry
“David here shews the just and respectful demeanor due to a king, even when he is fallen.” — Albert Barnes
“A lament is not merely tears, but a solemn acknowledgment of God’s sovereignty in sorrow.” — Adam Clarke