Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 1:1 2 शमूएल 1:2 2 शमूएल 1:3 2 शमूएल 1:4 2 शमूएल 1:5 2 शमूएल 1:6 2 शमूएल 1:7 2 शमूएल 1:8 2 शमूएल 1:9 2 शमूएल 1:10 2 शमूएल 1:11 2 शमूएल 1:12 2 शमूएल 1:13 2 शमूएल 1:14 2 शमूएल 1:15 2 शमूएल 1:16 2 शमूएल 1:17 2 शमूएल 1:18 2 शमूएल 1:19 2 शमूएल 1:20 2 शमूएल 1:21 2 शमूएल 1:22 2 शमूएल 1:23 2 शमूएल 1:24 2 शमूएल 1:25 2 शमूएल 1:26 2 शमूएल 1:27



2 शमूएल 1:11 – अर्थ का प्रत्यक्ष उद्घाटन
यह पंक्ति बताती है कि दाऊद ने राजा की शक्ति और प्रेमपूर्ण नेतृत्व के विपरीत भाव का दृढ़ प्रतिरूप दिखाते हुए दुख से कपड़े फाड़े। यह क्रिया एक गहन शोक, अनुदान-हीन आक्रोश और शासन-धर्म के प्रति असहायपन के संकेत हैं; साथ ही यह दर्शाती है कि एक राजा के लिए दु:ख समय में कैसे “भीतरांकित आंसुओं” का सम्मेलित प्रभाव होता है, जब साथ के लोग भी उनके साथ ऐसा करते हैं।
पृष्ठभूमि व संदर्भ
यह घटना शौल के पूर्वकाल में घटित होती है, जब दाऊद ने जादवत की मृत्यु से उत्पन्न शोक में समस्त सेना के साथ हृदय-आकुलता व्यक्त की। यह सामान्य सांप्रत घटना नहीं, बल्कि एक राजा के रूप में दाऊद के मानवीय संघर्ष और कर्तव्य के प्रति उसकी संवेदनशीलता का संकेत है।
व्याख्यात्मक विश्लेषण
थीमेटिक बिंदु
अन्य शास्त्रीय टिप्पणी से संक्षेप निष्कर्ष
हालाँकि यह पंक्ति छोटी है, पर यह दिखाती है कि धैर्य और करुणा के साथ एक नेता अपने लोगों के दुख के साथ खड़ा होता है। मैथ्यू हेनरी, ऐल्बर्ट बार्न्स और ऐडम क्लार्क जैसे सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणीकारों के इतिहास-आधारित सार से यह स्पष्ट होता है कि शोक और सम्मिलन एक शासन-प्रणाली की सुसंगत मानवता है। उनके विचारों के संघात से इस वाक्य का अर्थ अधिक गहरा होता है: दुख के समय नेतृत्व और समुदाय एक दूसरे का समर्थन करते हैं। (नोट: नीचे उद्धृत सटीक वाक्यांश केवल संदर्भ हेतु हैं।)
क्रॉस-रेफरेंसेस
संक्षेपित व्यावहारिक निष्कर्ष
2 शमूएल 1:11 हमें यह सिखाता है कि दुख के क्षणों में भी एक नेता को अपने लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहिए। सामुदायिक एकता और संवेदना—ये दो मूल्य किसी भी शासन की धुरी बनते हैं।
मुख्य विचार: कठिन समय में भी नेतृत्व और सामुदायिक समर्थन का प्रतीकात्मक गठजोड़ा चाहिए; यह शक्ति का नहीं, बल्कि करुणा का प्रदर्शन है।
उद्धृत साहित्य से प्रत्यक्ष शब्द (संक्षेप):
“तब दाऊद ने दुखी होकर अपने कपड़े पकड़कर फाड़े; और जितने पुरुष उसके संग थे सब ने वैसा ही किया;”