Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 1:1 2 शमूएल 1:2 2 शमूएल 1:3 2 शमूएल 1:4 2 शमूएल 1:5 2 शमूएल 1:6 2 शमूएल 1:7 2 शमूएल 1:8 2 शमूएल 1:9 2 शमूएल 1:10 2 शमूएल 1:11 2 शमूएल 1:12 2 शमूएल 1:13 2 शमूएल 1:14 2 शमूएल 1:15 2 शमूएल 1:16 2 शमूएल 1:17 2 शमूएल 1:18 2 शमूएल 1:19 2 शमूएल 1:20 2 शमूएल 1:21 2 शमूएल 1:22 2 शमूएल 1:23 2 शमूएल 1:24 2 शमूएल 1:25 2 शमूएल 1:26 2 शमूएल 1:27



2 शमूएल 1:23 पर टिप्पणी — शाऊल और yोनातान
प्लॉट के इस क्षण में दाविद के उत्कंठित उद्धरण से अलग, यह वाक्य शाऊल और योनातान की मित्रता और वीरता का एक उच्च आदर्श प्रस्तुत करता है। छंद कहता है कि शाऊल और योनातान जीवनकाल में प्रिय और मनभाऊ थे, और उनकी मृत्यु के समय एक-दूसरे से अलग नहीं हुए; वे उकाब से भी वेग से चलनेवाले, और सिंह से भी अधिक पराक्रमी थे। यह महाकाव्य-सी पंक्ति उनके साहस, प्रेम और दृढ़ता के प्रतीक के रूप में उद्धृत होती है।
पाठ का पृष्ठभूमि और अध्याय-घटना
यह शमूएल के बाद के समय की घटनाओं को दर्शाता है जब यरूशलेम के राजा शाऊल और उनके पुत्र योनातान की वीरता और कथित शक्ति का स्मरण किया जाता है। लेखक ने दो पक्षों के बीच गहरे रिश्ते को दिखाने के लिए इनकी दोस्ती की तुलना कर दी है और मौत के समय भी उनके बंधन की अटूटता पर जोर दिया है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस छुटे हुए शृंगारिक पंक्ति में तीन प्रमुख धधकते विचार उभरते हैं:
अन्य आयतों के साथ तुलनात्मक विवरण
यहाँ तीन सामान्य cross-references से संवेदना मिलती है:
इन आयतों में वीरता के साथ विवेक, और मित्रता के साथ दयालुता के संयोजन की पर्याप्त परिकल्पना मिलती है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
- मित्रता और निष्ठा की मिसाल को आत्मसात करें: जीवन के उच्च मुकामों में भी आपके साथी के साथ ईमानदार और सहयोगी रहें।
— संकट के समय साहस और विवेक को एक साथ बनाए रखें: वीरता केवल शारीरिक शक्ति नहीं, बल्कि परिस्थितियों के प्रति धैर्य और सही निर्णय लेने की क्षमता है।
— सत्ता और पुरुषार्थ के बीच नैतिकता को न छोड़ें: प्रमुखता मिलने पर भी धर्म-सत्य और दया का मार्ग न छोड़ना ही वास्तविक वीरता है।
संक्षेप
2 शमूएल 1:23 में शाऊल और योनातान की मित्रता, साहस और एक-दूसरे के लिए अटूट प्रतिबद्धता का सम्मानपूर्ण स्मरण है। यह वाक्य दोनों के लिए एक महान हृदय-चिह्न है—कि वीरता और प्रेम मिलकर जीवन के सबसे कठिन क्षणों में भी रोशनी देते हैं।
महत्वपूर्ण उद्धरण (क्रमशः सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के अनुसार)
एडम क्लार्क, अॉलबर्ट बार्न्स और मैथ्यू हेन्री के समान धारावाहिक व्याख्यान से संबंधित टिप्पणी संरचना इस प्रकार मिलती है: वे मित्रता, वीरता, और दायित्व के मिलन की प्रशंसा करते हैं—जो शाऊल और योनातान के उदाहरण से संगत है। आवश्यक स्पष्ट उद्धरण यदि उपलब्ध हो, तो नीचे नीचे दिया गया है:
“शाऊल और योनातान एक-समय में प्रिय और मनभाऊ थे”—यह वाक्यांश पाठक के मन में मित्रता की गहराई और एकत्व की ध्वनि देता है।