Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 1:1 2 शमूएल 1:2 2 शमूएल 1:3 2 शमूएल 1:4 2 शमूएल 1:5 2 शमूएल 1:6 2 शमूएल 1:7 2 शमूएल 1:8 2 शमूएल 1:9 2 शमूएल 1:10 2 शमूएल 1:11 2 शमूएल 1:12 2 शमूएल 1:13 2 शमूएल 1:14 2 शमूएल 1:15 2 शमूएल 1:16 2 शमूएल 1:17 2 शमूएल 1:18 2 शमूएल 1:19 2 शमूएल 1:20 2 शमूएल 1:21 2 शमूएल 1:22 2 शमूएल 1:23 2 शमूएल 1:24 2 शमूएल 1:25 2 शमूएल 1:26 2 शमूएल 1:27



पाठ का संक्षेप और संदर्भ
2 शमूएल 1 में दाऊद के प्रति जो दुखद खबर आई, वह इस अध्याय के भीतर एक व्यक्तिगत क्रोध, शोक और विवेकपूर्ण निर्णय को उभारती है। अध्याय 1:8 में ग्वालेल के एक घायल अन्मेलकी सैनिक का एक संक्षिप्त, पर गहरा उद्घोष है: उसने मुझसे पूछा, 'तू कौन है?' मैंने उससे कहा, 'मैं तो अमालेकी हूँ।' यह कथन लेखक के शपथ-ग्रस्त गवाही का अंग है, जो यह दर्शाता है कि वह व्यक्ति दाऊद के शत्रुओं में से एक था और उसने अपने दिये गये कर्मों के कारण खुद का परिचय दिया।
पद का पाठ और अध्याय के भीतर स्थिति
यह पंक्ति दाऊद के समय के सैनिक-युद्ध और उसकी चिंता का चित्रण है। अमालेकी सैनिक जो भय-युद्ध में भाग ले रहा है, उससे पूछना कि वह कौन है और अपनी पहचान बताना—यह संदर्भ बताता है कि युद्ध की ध्वनि में पहचान और भावनाओं का सत्य कितना निर्णायक हो सकता है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अनुच्छेद-तुलना: अन्य बाइबिल संदर्भ के अनुरूप निष्कर्ष
यह घटना कुछ अन्य प्रसंगों से मिलती-जुलती है जहाँ पहचान और सिद्धान्तों का सामना होता है:
व्यावहारिक अनुप्रयोग
- अपने सचेत कर्मों से अपनी पहचान बनाएं: क्या आप अपने चुनावों में स्पष्ट, सत्यनिष्ठ और साहसी हैं?
- चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी पहचान और दायित्व के आधार पर कार्य करें, भले ही परिणाम विपरीत हों।
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप में) और उनके संगत अर्थ
- प्रभावशाली सत्य की स्पष्टता के लिए: एकाधिक पुस्तकें व्यक्तिगत दृढ़ता के पाठ दिखाती हैं, जो चर्चित चरित्रों के निर्णयों में परिलक्षित होते हैं।
संक्षिप्त निष्कर्ष
2 शमूएल 1:8 की पंक्ति एक छोटी, पर अर्थपूर्ण चिह्न है कि पहचान और सत्य की भाषा युद्ध के मैदान पर भी स्पष्ट हो जाती है। यह संकेत देती है कि आत्म-स्वीकृति और कर्म के प्रति ईमानदारी ही परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप चलने का मूल आधार है।
उद्धरण नोट
यह पाठ-विश्लेषणMatthewHenry, AlbertBarnes और AdamClarke की सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणी-उद्धरणों के न्यूनतम, उचित संदर्भ को समाहित करता है; वास्तविक शाब्दिक उद्धरण केवल उपलब्ध होने पर ही शामिल किए जा सकते हैं।