2 शमूएल 1:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उसने मुझसे पूछा, 'तू कौन है?' मैंने उससे कहा, 'मैं तो अमालेकी हूँ।'

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2 शमूएल 1:8 पद-दर-पद बाइबल टीका

पाठ का संक्षेप और संदर्भ

2 शमूएल 1 में दाऊद के प्रति जो दुखद खबर आई, वह इस अध्याय के भीतर एक व्यक्तिगत क्रोध, शोक और विवेकपूर्ण निर्णय को उभारती है। अध्याय 1:8 में ग्वालेल के एक घायल अन्मेलकी सैनिक का एक संक्षिप्त, पर गहरा उद्घोष है: उसने मुझसे पूछा, 'तू कौन है?' मैंने उससे कहा, 'मैं तो अमालेकी हूँ।' यह कथन लेखक के शपथ-ग्रस्त गवाही का अंग है, जो यह दर्शाता है कि वह व्यक्ति दाऊद के शत्रुओं में से एक था और उसने अपने दिये गये कर्मों के कारण खुद का परिचय दिया।

पद का पाठ और अध्याय के भीतर स्थिति

यह पंक्ति दाऊद के समय के सैनिक-युद्ध और उसकी चिंता का चित्रण है। अमालेकी सैनिक जो भय-युद्ध में भाग ले रहा है, उससे पूछना कि वह कौन है और अपनी पहचान बताना—यह संदर्भ बताता है कि युद्ध की ध्वनि में पहचान और भावनाओं का सत्य कितना निर्णायक हो सकता है।

मुख्य आध्यात्मिक पाठ

  • पहचान का सत्य: हर व्यक्ति अपने कर्मों के परिणामों से पहचाना जाता है। यहां अमालेकी सैनिक ने अपनी जात, निष्ठा और कर्म के कारण अपनी पहचान को प्रकट किया।
  • निष्ठा और दायित्व की कीमत: दाऊद के शत्रु कितने भी करीब क्यों न हों, सत्य और साहस से जाना गया है कि कौन-कौन उनके पक्ष में है या विरोध में।

अनुच्छेद-तुलना: अन्य बाइबिल संदर्भ के अनुरूप निष्कर्ष

यह घटना कुछ अन्य प्रसंगों से मिलती-जुलती है जहाँ पहचान और सिद्धान्तों का सामना होता है:

  • यहोशू 6:21 के युद्ध-विवेक में भी निष्ठावान आचरण और पहचान के संकेत प्रमुख होते हैं—यह दिखाता है कि परमेश्वर के लिए क्या सही है, यह पहचान कर्म से निकलती है।
  • नीतिगत संदेशों में जो सत्य और साहस के साथ खड़े रहते हैं, उनके लिए परमेश्वर के विक्षेप में भी सुरक्षा की आशा मिलती है।

व्यावहारिक अनुप्रयोग

- अपने सचेत कर्मों से अपनी पहचान बनाएं: क्या आप अपने चुनावों में स्पष्ट, सत्यनिष्ठ और साहसी हैं?

- चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी पहचान और दायित्व के आधार पर कार्य करें, भले ही परिणाम विपरीत हों।

क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप में) और उनके संगत अर्थ

- प्रभावशाली सत्य की स्पष्टता के लिए: एकाधिक पुस्तकें व्यक्तिगत दृढ़ता के पाठ दिखाती हैं, जो चर्चित चरित्रों के निर्णयों में परिलक्षित होते हैं।

संक्षिप्त निष्कर्ष

2 शमूएल 1:8 की पंक्ति एक छोटी, पर अर्थपूर्ण चिह्न है कि पहचान और सत्य की भाषा युद्ध के मैदान पर भी स्पष्ट हो जाती है। यह संकेत देती है कि आत्म-स्वीकृति और कर्म के प्रति ईमानदारी ही परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप चलने का मूल आधार है।

उद्धरण नोट

यह पाठ-विश्लेषणMatthewHenry, AlbertBarnes और AdamClarke की सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणी-उद्धरणों के न्यूनतम, उचित संदर्भ को समाहित करता है; वास्तविक शाब्दिक उद्धरण केवल उपलब्ध होने पर ही शामिल किए जा सकते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 शमूएल 1:8 समानांतर पद और संबंधित वचन

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1 शमूएल 30:13 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 शमूएल 30:13 (HINIRV) »
तब दाऊद ने उससे पूछा, “तू किस का जन है? और कहाँ का है?” उसने कहा, “मैं तो मिस्री जवान और एक अमालेकी मनुष्य का दास हूँ; और तीन दिन हुए कि मैं बीमार पड़ा, और मेरा स्वामी मुझे छोड़ गया।

1 शमूएल 30:17 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 शमूएल 30:17 (HINIRV) »
इसलिए दाऊद उन्हें रात के पहले पहर से लेकर दूसरे दिन की सांझ तक मारता रहा; यहाँ तक कि चार सौ जवानों को छोड़, जो ऊँटों पर चढ़कर भाग गए, उनमें से एक भी मनुष्य न बचा।

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1 शमूएल 30:1 (HINIRV) »
तीसरे दिन जब दाऊद अपने जनों समेत सिकलग पहुँचा, तब उन्होंने क्या देखा, कि अमालेकियों ने दक्षिण देश और सिकलग पर चढ़ाई की। और सिकलग को मार के फूँक दिया,

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