Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 1:1 2 शमूएल 1:2 2 शमूएल 1:3 2 शमूएल 1:4 2 शमूएल 1:5 2 शमूएल 1:6 2 शमूएल 1:7 2 शमूएल 1:8 2 शमूएल 1:9 2 शमूएल 1:10 2 शमूएल 1:11 2 शमूएल 1:12 2 शमूएल 1:13 2 शमूएल 1:14 2 शमूएल 1:15 2 शमूएल 1:16 2 शमूएल 1:17 2 शमूएल 1:18 2 शमूएल 1:19 2 शमूएल 1:20 2 शमूएल 1:21 2 शमूएल 1:22 2 शमूएल 1:23 2 शमूएल 1:24 2 शमूएल 1:25 2 शमूएल 1:26 2 शमूएल 1:27



2 शमूएल 1:6— immediate setting
समाचार देनेवाला जवान गिलबो पर्वत पर बैसा हुआ एक दृश्य देखता है—शाऊल धर्मयुद्घ की स्थिति में है, उसका भाला टेक पर है और पीछे से आते हुए रथ-चालित सेनाएँ तेज़ी से उसके पास आ रही हैं। यह दृश्य उसकी हार की सूचना देता है, और यहाँ से यह कथा आगे बढ़ती है कि कैसे इस अचानक मिलने वाले समाचार ने भविष्य को एक नए मोड़ दिया।
पवित्र ग्रंथ से ईश्वर की अर्थकथा
इस वाक्य में ईश्वर के बारे में तीन बातें उभरकर सामने आती हैं: (1) परमेश्वर की योजना मानवीय घटनाओं के बीच चलती है, भले ही लोग उसे समझ न पाएं। (2) भय और हताशा के क्षणों में भी प्रभु अपने उद्देश्य को पूरा करते हैं, भले ही समाचार असामान्य या दुखद हो। (3) मानव के निर्णय और हालात—जैसे शाऊल का संघर्ष—ईश्वर की सम्यक दृष्टि के अधीन होते हैं।
शब्दों के अर्थ और चित्र
- समाचार देनेवाला: एक साधारण सैनिक या संदेशवाहक, जिसने वास्तविकता का सामना कर के सच बताया। उसका विवरण इस प्रकार है कि उसने घटनात्मक दृश्य को स्पष्ट किया—गिलबो पर्वत, शाऊल की स्थिति, पीछा करते रथ और तेज़ गति।
- गिलबो पर्वत: एक ऊँचा स्थान, जहाँ सैनिक अक्सर रणनीतिक स्थितियों पर विचार करते थे; यह दृश्य भावनात्मक ऊँचाई और निर्णायक क्षण को चिन्हित करता है।
अन्य प्रमुख संदर्भ (cross-references)
इन संदर्भों में यह विचार मिलता है कि ईश्वर समय के अनुसार काम करते हैं, और मानवीय समझ से परे घटनाओं के पीछे की भूमिका वे निभाते हैं।
पवित्र पाठ से सीख
इस वाक्य का मूल पाठ दिखाता है कि दुखद समाचार भी ईश्वर की योजना के भीतर एक पड़ाव हो सकता है—शाऊल की स्थिति दर्शाता है कि मनुष्यों के भीतर भय और नियंत्रण के longing कहाँ तक पहुँचते हैं। परन्तु यह भी संकेत देता है कि मानव इतिहास में अचानक मोड़ आ सकता है, जिसे बाद के अध्यायों में निर्णय, नीतियों और नेतृत्व के परिवर्तन में बदला जाएगा।
आज के लिए अनुप्रयोग
कथन-उद्धरण: Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के ठीक-ठीक संकलित शाब्दिक उद्धरण इस नोट में नहीं दिये जा रहे हैं, किन्तु उनके समकालीन विचारों के अनुसार शाऊल के विरुद्ध घटित घटनाओं में ईश्वर की दृष्टि और मानव-यात्रा के बीच संतुलन की सूक्ष्मता निहित है जिसे ऊपर के विश्लेषण में समाहित किया गया है।