Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31Verse
1 शमूएल 26:1 1 शमूएल 26:2 1 शमूएल 26:3 1 शमूएल 26:4 1 शमूएल 26:5 1 शमूएल 26:6 1 शमूएल 26:7 1 शमूएल 26:8 1 शमूएल 26:9 1 शमूएल 26:10 1 शमूएल 26:11 1 शमूएल 26:12 1 शमूएल 26:13 1 शमूएल 26:14 1 शमूएल 26:15 1 शमूएल 26:16 1 शमूएल 26:17 1 शमूएल 26:18 1 शमूएल 26:19 1 शमूएल 26:20 1 शमूएल 26:21 1 शमूएल 26:22 1 शमूएल 26:23 1 शमूएल 26:24 1 शमूएल 26:25


परिचयात्मक दृश्य: दाऊद और अन्याय की स्थिति
1 शमूएल 26:13 में दाऊद एक बार फिर अपने शत्रु सम्वन्धी जोखिम और फिलिस्तीनी दुष्टों की चातुर्यता से बचते हुए बचे हुए सैनिकों के बीच दूसरी ओर जाकर दूर के पहाड़ की चोटी पर खड़ा हुआ; और दोनों के बीच बड़ा अन्तर था। यह दृश्य दाऊद के जीवन के एक ऐसे क्षण को दर्शाता है जिसमें वह राजा Saul की पकड़ से बचकर एक बार फिर सुरक्षित दूरी बनाता है।
पवित्र पाठ से निकलती बात: परमेश्वर में विश्वास की गहराई
यह अंश दिखाता है कि दाऊद ने अपने जीवन-स्तम्भ में किस प्रकार परमेश्वर की देखरेख और मार्गदर्शन पर बड़ी निर्भरता दिखाई। भय के समय में भी वह आत्म-निर्भर नहीं होता, बल्कि परमेश्वर की योजना और समय पर भरोसा रखता है। यह हमारे लिए भी यह संदेश देता है कि कठिन परिस्थितियों में भी हमें ईश्वर के संरक्षण की आशा बनाए रखनी चाहिए।
पद के शब्दों के महत्व और चित्र
यहां “दूसरी ओर … पहाड़ की चोटी” की गति एक दृश्य है जो दूरी और अस्थिरता को दर्शाती है। पहाड़ी चोटी से नीचे फैले मैदानों-घासों की भाषा हमें यह बताती है कि दाऊद ने सुरक्षित ऊँचाई से अपने दुश्मनों के स्थान और चालों को देखा, और इसलिए घटनाओं को शांतचित्त तरीके से समझने का अवसर पाया। यह दूरी दिखाती है कि प्रभु की योजना के अनुसार, सही समय पर ही परिणाम निकलते हैं—भले ही मनुष्य समझे कि खतरा बढ़ गया है।
संबंधित ग्रंथ से विचार
पवित्र इतिहास के धागे से संयोजन
यह दृश्य 1 शमूएल के दौरान दाऊद के विरोधियों के साथ संघर्षों की पुनरावृत्ति को जोड़ता है। जैसे-जैसे कथा आगे बढ़ती है, हम देखते हैं कि दाऊद की दूरी और धैर्य एक प्रेरणा बनते हैं—परमेश्वर ने उसे आगे बढ़ने और शत्रुओं को हराने की योजना में भागीदारी दी।
आज के लिए अनुप्रयोग
विशेष उद्धरण (पूर्वक प्रकाशित टिप्पणीकारों से)
मार्थर हेन्री की परामर्श-युक्त भाषा में मिलता है कि दाऊद का व्यवहार “धैर्य से शत्रुओं से दूरी बनाए रखना” एक नैतिक पाठ है। ALBERT BARNES के अनुसार, इस दूरी का अर्थ है कि दाऊद ने अपने पक्ष में निर्णायक-आख्यान की प्रतीक्षा की, न कि जल्दबाजी में निर्णय लिया। एडम क्लार्क ने भी संकेत किया है कि यह दूरी केवल भौतिक नहीं, बल्कि मन की एक स्थिति है—परमेश्वर के नियंत्रण में विश्राम। इन तीनों स्रोतों के छोटे-छोटे बिंदु इस एक दृश्य में एक साथ बिन-भेद समाहित दिखते हैं।
कठोर पाठ के छोटे उद्धरण
“तब दाऊद दूसरी ओर जाकर दूर के पहाड़ की चोटी पर खड़ा हुआ, और दोनों के बीच बड़ा अन्तर था;”
नोट: नीचे दिये गए तीनों टिप्पणीकारों के संक्षिप्त विचारवाक्य सीधे उद्धृत नहीं हैं; केवल उनके दृष्टिकोण के संकेत यहां संकलित हैं।