Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31


मुख्य व्याख्या का केंद्रबिंदु
1 शमूएल 3:7 बताता है कि युवा शमूएल उस समय तक यहोवा को नहीं पहचानता था, और न ही यहोवा का वचन उसका जाग्रत हो पाया था। यह पल दिखाता है कि परमेश्वर का mukha-प्रकाश और वचन का उद्घोष हर किसी पर एक साथ प्रकट नहीं होता; यह धैर्य, मार्गदर्शन और विश्वास के अभ्यास से विकसित होता है। जब तक शमूएल ने यह नहीं जाना कि वह यहोवा की बुलाहट को सुन रहा है, तब तक वह एक सामान्य सहायकर_notification जैसा था। किंतु धीरे-धीरे यह स्पर्श वह अनुभव बन गया जो उसे यहोवा के कार्यों के लिए प्रशिक्षित करता है।
पाठ-संदर्भ: साहित्यिक परिप्रेक्ष्य
यह पाठ शमूएल के युवा जीवन का आरम्भिक चरण दर्शाता है—एक परिवार के भीतर पुण्यता और सेवा के दृढ़ संकल्प के साथ। कथा में तीन बार यहोवा का बुलावा आता है और प्रत्येक बार शमूएल अपने अधिष्ठाता भूमिका में रहता है, परन्तु सच स्पष्ट तब होता है जब ईश्वर का वचन उसका आह्वान बनता है। यह क्रमिक बुलाहट यह भी दिखाता है कि धार्मिक अनुभव कभी अचानक नहीं आता; यह पूर्व तैयारी और भक्ति की निरंतरता से खुलता है।
धार्मिक महत्व
यह पाठ यह बताता है कि यद्यपि यहोवा प्रत्यक्ष रूप से किन्हीं को पहले पहचान देता है, फिर भी वह अपने अपने तरीके से लोगों को जागृत करता है। शमूएल के मामले में, भविष्य के नबी के रूप में उसकी बुलाहट का आरम्भ यहोवा के वचन के गूंजने से होता है—जो यह दर्शाता है कि परमेश्वर के उद्देश्य समय के साथ स्पष्ट होते हैं।
प्रमुख विचार और समेकन
पवित्रशास्त्र से सम्बन्ध (क्रॉस-रेफरेंसेस)
1) यहोवा के बुलावे के समय में व्यक्ति को यह अनुभव होता है कि उनकी आवाज़ उनके भीतर की सूझ-बूझ से अधिक है; यह संदर्भ यशायाह 6 के बुलावे के क्रम की याद दिलाता है—जब यहोवा के बुलाने पर नबी की पवित्र तैयारी सामने आती है।
2) नतालीय को बुलाहट की कथा से प्रेरणा मिलती है कि परमेश्वर कैसे छोटे कदमों के माध्यम से बड़े उद्देश्य की ओर ले जाते हैं; यह प्रेरणा प्रेरितियों 1:8 के प्रसार के लिए भी परिलक्षित होती है।
3) यहोवा के वचन के उद्घोष से जुड़ा एक अन्य संदर्भ यहूदियों के भीतर दाऊद की वंशावली में भी भाव देता है कि परमेश्वर अपने लोगों के साथ अपने वचन के आधार पर ही मार्गदर्शन करता है।
विचार करने योग्य प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
1 शमूएल 3:7 यह दिखाता है कि परमेश्वर का वचन कभी थमे नहीं रहता, पर हमारे अनुभव में वह समय-समय पर खुलता है। शमूएल के लिए यह आरम्भ था—युवा सेवक बनना और एक दिन बड़े दायित्वों के लिए तैयार होना। लेखन के अनुसार, यहोवा का बुलावा धीरे-धीरे प्रकट होता है, जो हमारी आत्मिक यात्रा की मौलिक धारणाओं को दिशा देता है।
कथा-टिप्पणियाँ (कथन उद्धरण)
यहाँ आवश्यक स्रोतों के मौलिक-आधार पर संक्षिप्त संकेत हैं, जिनमें Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-domain विचारों से मिलते-जुलते सार शामिल हैं।
योगदान-उद्धरण (संकेतित)
कथन-उद्धरण: “The Lord called Samuel; yet Samuel did not know the L ord, nor did the word of the Lord yet become clear to him”—यह विचार Matthew Henry के समेकित सार से प्रेरित है, जो यह दर्शाता है कि बुलाहट के आरम्भ में व्यक्ति नहीं पहचान पाता।
Cross-reference notes: यह पंक्ति पुराने समय के अनुभवों के बावजूद भविष्य के दायित्व के लिए तैयारी का संकेत देती है, जैसे कि इब्रानी पाठ में भी यह बताता है कि परमेश्वर अपने लोगों को बुलाकर उन्हें उनकी भूमिका के लिए तैयार करता है (क्रॉस-रेफरेंसेस के रूप में देखें; पंक्तियाँ संक्षेप में उपलब्ध हैं)।