1 शमूएल 3:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और परमेश्‍वर का दीपक अब तक बुझा नहीं था, और शमूएल यहोवा के मन्दिर में जहाँ परमेश्‍वर का सन्दूक था, लेटा था;

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1 शमूएल 3:3 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 शमूएल 3:3 का सामान्य संदर्भ और पृष्ठभूमि

यह पद शमूएल के बच्चेपन के समय की कथा का भाग है, जब यहोवा के मंदिर में प्रभु की सेवा और दासों के अनुराग के बीच एक नया चरण शुरू हो रहा था। दीपक जल रहा था और शमूएल को यह लगता कि यहोवा बुला रहे हैं; पर मंदिर के भीतर मन्दिर के सेवक इओब का दिन-रात का काम और दावतें चल रहीं थीं। इस बिंदु पर यह दर्शाया गया है कि जबकि परमेश्वर अपनी आवाज़ देता है, शमूएल अभी बिल्कुल बालक है और वह नहीं समझ पाता कि बुलाहट किसकी है।

मुख्य संदेश

यह verses यह बताती है कि प्रभु अपनी योजना और आवाज़ से परिस्थिति के बावजूद सक्रिय है। दीपक अभी बुझा नहीं था—यानी परमेश्वर की दृष्टि और अवलोकन भक्तों पर बना रहा है, और वह अपनी ओर से बुलाने के लिए तैयार है। शमूएल की पहली अनुभूति में धैर्य, सेवा-निष्ठा और धीरे-धीरे जागृत होने की प्रक्रिया स्पष्ट है।

दो-तीन प्रमुख विषय

  • ईश्वर की बुलाहट का समय और तरीका: शमूएल खासकर यह नहीं समझ पाता कि बुलाहट किससे आ रही है; बाद में उसे यहोवा से संदेश मिलता है।
  • प्रबंधन और नैतिकता की तैयारी: मंदिर के वातावरण में पवित्रता और धैर्य का महत्व; कैसे एक बालक भी परमेश्वर के काम में सहभागी बन सकता है।
  • आरम्भ के संकेत और सीख: छोटी-छोटी घटनाओं से ही परमेश्वर बड़े संदेश फैलाते हैं; शमूएल की सुनवाई धीरे-धीरे विकसित होती है।

संबद्ध पाठ (क्रॉस-रेफरेंसेस)

• योहन्ना 10:3-4 के समान, जिसका में पालन होता है—परमेश्वर की आवाज़ सचेत और अपनी देखरेख में होती है, और भेड़ें उनके शब्दों को पहचानती हैं।

• निर्गमन 3:4 में वचन मिलता है कि परमेश्वर बुलाहट देता है और व्यक्ति उसे सुनकर उत्तर देता है; शमूएल भी सुन रहा है।

• इब्रानियों 5:14—परिपक्वता के संकेत के रूप में अधिक बोध और स्पर्श की अनुभूति; शमूएल की शुरुआती आवाज़ भी इसी प्रक्रिया का भाग है।

व्यावहारिक चिंतन

हम कैसे सुनते हैं? जैसे शमूएल ने आरम्भ में नहीं समझा, हमारा भी दायित्व है कि हम ईश्वर के संकेतों के लिए शांत रहें, पवित्रता के वातावरण में ध्यान दें, और प्रार्थना से स्पष्ट बुलाहट पहचानें। यह पाठ स्मरण कराता है कि परमेश्वर अपने चुने हुए माध्यमों के माध्यम से बोलते हैं, चाहे वे अभी बच्चों जैसे क्यों न हों; वह वृद्ध और अनुभवी दोनों के लिए भी मार्गदर्शक है।

संक्षेप

1 शमूएल 3:3 में दीपक अभी बुझा नहीं था—ईश्वर अपनी आवाज़ दे रहा है, और बच्चों की निस्वार्थ सेवा के बीच शमूएल को धीरे-धीरे आकाश से सच का संदेश सुनाई देता है। यह अवसर हमारे लिए भी संकेत है कि हम ईश्वर की बुलाहट के लिए तैयार रहें, धैर्यपूर्वक सुनें, और अपने दायित्वों में सचेत रहें।

मूल उद्धरण (अर्थ-सार): “और परमेश्‍वर का दीपक अब तक बुझा नहीं था, और शमूएल यहोवा के मन्दिर में जहाँ परमेश्‍वर का सन्दूक था, लेटा था।”

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 शमूएल 3:3 समानांतर पद और संबंधित वचन

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निर्गमन 27:20 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
निर्गमन 27:20 (HINIRV) »
फिर तू इस्राएलियों को आज्ञा देना, कि मेरे पास दीवट के लिये कूट के निकाला हुआ जैतून* का निर्मल तेल ले आना, जिससे दीपक नित्य जलता रहे।

लैव्यव्यवस्था 24:2 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
लैव्यव्यवस्था 24:2 (HINIRV) »
“इस्राएलियों को यह आज्ञा दे कि मेरे पास उजियाला देने के लिये कूट के निकाला हुआ जैतून का निर्मल तेल ले आना, कि दीपक नित्य जलता रहे*।

निर्गमन 30:7 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
निर्गमन 30:7 (HINIRV) »
और उसी वेदी पर हारून सुगन्धित धूप जलाया करे; प्रतिदिन भोर को जब वह दीपक को ठीक करे तब वह धूप को जलाए,

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