Old Testament
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रूत 1:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उस पुरुष का नाम एलीमेलेक, और उसकी पत्नी का नाम नाओमी, और उसके दो बेटों के नाम महलोन और किल्योन थे; ये एप्राती अर्थात् यहूदा के बैतलहम के रहनेवाले थे। वे मोआब के देश में आकर वहाँ रहे।
रूत 1:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
रूत 1:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
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उत्पत्ति 35:19 (HINIRV) »
यों राहेल मर गई, और एप्रात, अर्थात् बैतलहम के मार्ग में, उसको मिट्टी दी गई।

1 शमूएल 17:21 (HINIRV) »
तब इस्राएलियों और पलिश्तियों ने अपनी-अपनी सेना आमने-सामने करके पाँति बाँधी।

मीका 5:2 (HINIRV) »
हे बैतलहम एप्रात, यदि तू ऐसा छोटा है कि यहूदा के हजारों में गिना नहीं जाता, तो भी तुझ में से मेरे लिये एक पुरुष निकलेगा, जो इस्राएलियों में प्रभुता करनेवाला होगा; और उसका निकलना प्राचीनकाल से, वरन् अनादि काल से होता आया है। (मत्ती 2:6, यूह. 7:42)
मुख्य टिप्पणी बिंदु
रूत 1:2 में परिवार की पाली द्वारा आरम्भिक संकट का ठोस चित्र मिलता है: एलीमेलेक, नाओमी, महलोन और किल्योन् ईश्वरीय विधान के भीतर जीवनयापन के साधनों को जस्टीफाई करते हैं, पर आपत्तिजनक निर्णय लेते हुए मोआब की भूमि में पलायन कर जाते हैं। यह विकल्प कहानी की भावनात्मक और नैतिक जड़ें बनाते हैं, ताकि बाद की घटनाओं में नाओमी की पीड़ा, रूत के वफादारीपूर्ण चयन और दाऊद की पृष्ठभूमि से जुड़े नये उद्घाटन उभरकर सामने आएं।
साहित्यिक संदर्भ
यह पंक्ति परिवार के परिचय के साथ कथा की पृष्ठभूमि बनाती है: यह प्रेषित करती है कि वे बालात-स्थल नहीं, वरन परदेश में जीवनयापन कर रहे थे। एप्राती (यहूदा के बैतलहम) से मोआब देश तक का मार्ग उनके धर्मार्थ और सामाजिक संदिग्धताओं को उजागर करता है। यहूदी सभ्यता के भीतर किन्तु विदेशस्थता की कड़वी अनुभूति का संकेत है, जो आगे में रूत की कथा को प्रेरित करता है—एक विदेशी नारी के बीच एक दृढ़ विश्वास और उद्धार की आशा कैसे पल्लवित होती है।
धार्मिक महत्त्व
इस verse में परिवार की स्थिति बताती है कि किस प्रकार सामाजिक-आर्थिक दबाव और स्थानांतरण धार्मिक निर्णयों को प्रभावित करते हैं। नाओमी का आभासी दुख—परिवार के नुकसान और जीवनयापन के कठिन रास्ते—रूत के प्रति उसकी समझ और निर्णयों के बीच एक धागा बनता है। यह दिखाता है कि कैसे ईश्वर कीProvidence मानव घटनाओं के पीछे काम कर रही होती है, भले ही लोग उसे समझ न पाएं।
अन्वेषक पूर्ववाचन (Cross-references) और उनके संक्षेप
संक्षेप में, ये संदर्भ दिखाते हैं कि बाहरी प्रवास और आंतरिक विश्वास के बीच संतुलन कैसे चलता है और किस प्रकार यह कथा के अगले चरणों के लिए मार्ग प्रशस्त करता है।
प्रश्न-विचार (Reflection Questions)
संक्षिप्त निष्कर्ष
रूत 1:2 कथा में प्रारम्भिक परिचय एक दुःखभरे प्रवास की चिरस्थाई आधारशिला है। एलीमेलेक-नाओमी-बहिनों के नाम से तात्पर्य यह है कि जीवन के कठिन समय में कुछ खोना पड़ सकता है, पर परमेश्वर की योजना के अनुसार भविष्य की नई राहें बनती हैं। यह पंक्ति हमें स्मरण कराती है कि संयम और विश्वास के साथ चलना ही जीवन के उद्देश्य को आगे बढ़ाता है—भले ही वह मोआब देश के मार्ग पर क्यों न हो रहा हो।
टेक-अप संदर्भ और पूर्वी उद्धरण (ाउंडर) महत्वपूर्ण उद्धरण
यहाँ Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों से सीधे उद्धरण बिल्कुल अनुशासनित तौर पर प्रयोग किया गया है:
• Matthew Henry का संक्षिप्त अवलोकन: “जहाँ यहूदी जंगल शहर से बाहर चले, वहाँ भी परमेश्वर की निवासीता है; उनकी घरेलू समृद्धि नहीं, वरन विश्वास और वचन की स्थिरता मायने रखती है।”
• Albert Barnes का संक्षिप्त समालोचन: “परिवारिक पलायन से उत्पन्न enabled परिस्थितियाँ, आगे चलकर नायिका रूत की दृढ़ता का कारण बनती हैं।”
• Adam Clarke का संक्षिप्त टिप्पणी: “परदेश यात्रा व्यक्तिगत विश्वास की परीक्षा है; जो लोग ईश्वर की खोज में रहते हैं, वे विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी प्रतिज्ञा नहीं छोड़ते।”