Old Testament
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रूत 1:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
मैं भरी पूरी चली गई थी, परन्तु यहोवा ने मुझे खाली हाथ लौटाया है। इसलिए जब कि यहोवा ही ने मेरे विरुद्ध साक्षी दी, और सर्वशक्तिमान ने मुझे दुःख दिया है*, फिर तुम मुझे क्यों नाओमी कहती हो?”
रूत 1:21 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रूत 1:21 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 शमूएल 2:7 (HINIRV) »
यहोवा निर्धन करता है और धनी भी बनाता है, वही नीचा करता और ऊँचा भी करता है। (लूका 1:52)

अय्यूब 1:21 (HINIRV) »
“मैं अपनी माँ के पेट से नंगा निकला और वहीं नंगा लौट जाऊँगा; यहोवा ने दिया और यहोवा ही ने लिया; यहोवा का नाम धन्य है।” (सभो. 5:15)

अय्यूब 16:8 (HINIRV) »
और उसने जो मेरे शरीर को सूखा डाला है, वह मेरे विरुद्ध साक्षी ठहरा है, और मेरा दुबलापन मेरे विरुद्ध खड़ा होकर मेरे सामने साक्षी देता है।
रूत 1:21 पर टिप्पणी — मार्ग और विश्वास का कथन
यह पद रूत की गहन बेरूनी यात्रा का उद्घोष है: जीवन के सुख-दुःख में नहीं, बल्कि परमेश्वर की पूर्ण भूमिका में ग्रहणशीलता। नाओमी के शब्दों की तरह, यह वचन दिखाता है कि किस तरह पुण्य प्रयासों के बावजूद मानव जीवन कभी-कभी खाली हाथ लौट आता है, और यहोवा की वही व्यवस्था है जिसमें विश्वासी अपने भाग्य को समझते हैं। यहूदा का इतिहास बताता है कि संतोष और दृढ़ विश्वास कैसे कठिन समय में भी संजोए जाते हैं।
क्लिपिक पंक्ति का बिंदु
पद कहता है कि नाओमी ने कहा, “मैं भरी पूरी चली गई थी, परन्तु यहोवा ने मुझे खाली हाथ लौटाया है… फिर तुम मुझे क्यों नाओमी कहती हो?” यह त्याग-आत्म-स्वीकृति और निष्ठा का बयान है। वह अतीत के सुख-स्वर्ग के बावजूद वर्तमान की थकान और अशांति को पहचानती हैं, परन्तु यह भी स्पष्ट कर देती हैं कि परमेश्वर की योजना में उसकी स्थिति क्षणभंगुर नहीं, बल्कि एक उद्देश्यपूर्ण भाग है।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा
अनुसंधान-समन्वय: अन्य पवित्र पदों से जोड़
1) रोम 8:28 के संदर्भ में — परमेश्वर के समस्त योजनाओं में मिलकर भलाई के लिए चीजें काम करती हैं; यहोवा की संज्ञा से यह सत्य जुड़ता है कि नुकसान भी ईश्वर की योजना की एक इकाई हो सकता है। weighing में इसे देखते हुए नाओमी का अनुभव एक नया आरम्भ बन सकता है।
2) यशा 53:3–4 से — दुःख सहना और अनुभव करना, यीशु के आस्थागत मिशन के प्रतीक-तत्वों के समान; यहाँ यहूदियों के बीच मानव जीवन के दुःख में भी परमेश्वर की देखभाल का संकेत मिलता है।
3) विचार के आधुनिक संदर्भ: जीवन की उलट-फेर के समय में भी ईश्वर की निष्ठा के प्रति भरोसा बना रहना है, क्योंकि संकट में भी वे हमारे साथ होते हैं।
निष्कर्ष-आवेदन
रूत 1:21 हमें सिखाता है कि भले ही परिस्थितियाँ हमें खाली हाथ लौटा दें, व्यक्ति की आस्था और परिवार-परंपरा के भीतर ईश्वर की योजना जारी रहती है। नाओमी ने अपनी स्थिति को स्वीकार किया और इससे आगे की कहानी को प्रेरित किया—रूत के साथ मिलकर एक नई आशा और वंश की शुरुआत हुई। हमारे लिए भी यह पाठ है कि दुख के समय में धैर्य रखें, जबकि परमेश्वर के उद्देश्य पर भरोसा रखें, ताकि कठिनाईयाँ भी भविष्य के उद्धार और आशीष की कुंजी बनें।
संक्षिप्त संदर्भ
- यहोवा का कार्य हमारे मानवीय अनुभव से परे है; प्रत्येक परिस्थिति में उसकी योजना चलती है।
- दुःख के बावजूद भी सच्चे विश्वास और प्रतिज्ञान से नया अवसर बन सकता है।
क्रॉस-रेफरेंसेस के लिए नोट: यहोवा की नीति और भविष्य के उद्धार की दिशा में प्रतीकात्मक संकेत; पुराने नियम के वचनों में धैर्य और विश्वास की समरूपता का परिचय देता है।
Quoted insights (जहां उपलब्ध):
Matthew Henry से संरचित संक्षेप उद्धरण कभी-कभी "God disposes all events" के समान विचार दे सकता है, परन्तु यहाँ संक्षेप में आवश्यक शब्द-रचना के भीतर ही भाव प्रवाहित किया गया है।
समाप्त विचार: नाओमी और रूत की कथा हमें यह दिखाती है कि भरी-पूरी यात्रा अंततः विश्वास और वफादारी के माध्यम से पुनः आशा में बदली जाती है।