Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 पतरस 5:4 बाइबल पद की व्याख्या
1 पतरस 5:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और जब प्रधान रखवाला प्रगट होगा, तो तुम्हें महिमा का मुकुट दिया जाएगा, जो मुरझाने का नहीं।
1 पतरस 5:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 पतरस 5:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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याकूब 1:12 (HINIRV) »
धन्य है वह मनुष्य, जो परीक्षा में स्थिर रहता है; क्योंकि वह खरा निकलकर जीवन का वह मुकुट पाएगा, जिसकी प्रतिज्ञा प्रभु ने अपने प्रेम करनेवालों को दी है।

1 कुरिन्थियों 9:25 (HINIRV) »
और हर एक पहलवान सब प्रकार का संयम करता है, वे तो एक मुरझानेवाले मुकुट को पाने के लिये यह सब करते हैं, परन्तु हम तो उस मुकुट के लिये करते हैं, जो मुरझाने का नहीं।

2 तीमुथियुस 4:8 (HINIRV) »
भविष्य में मेरे लिये धार्मिकता का वह मुकुट* रखा हुआ है, जिसे प्रभु, जो धर्मी, और न्यायी है, मुझे उस दिन देगा और मुझे ही नहीं, वरन् उन सब को भी, जो उसके प्रगट होने को प्रिय जानते हैं।
1 पतरस 5:4 — संदर्भित परिप्रेक्ष्य में विचार
पेत्रुस-पत्र का संदर्भण एक खुले दिल से कुशल-नेतृत्व और नम्रता की माँग करता है। यहाँ प्रेरित पेत्रुस विश्वासी नेताओं—जो रेवतियों के मार्गदर्शक हैं—से साहचर्य, सजगता और धैर्य की अपेक्षा करते हैं। वह उन्हें याद दिलाते हैं कि असली प्रेरणा और अधिकार परमेश्वर से आता है, न कि स्वयं की घमंड या पद-प्रतिष्ठा से। जब प्रभु ईसा प्रगट होंगे, तब उनके वे नेतृत्व, जो ईमानदारी और सेवकत्व के साथ काम कर चुके हैं, उनकी महिमा में सम्मिलित होंगे। यह वचन विशेष रूप से प्रेरितों के ढांचे को उद्धार के लक्ष्य से जोड़े रखता है: समर्पण, विश्वास, और लक्ष्य-स्पष्टता।
मुख्य अर्थ
इस पद का केंद्र यह है कि परमेश्वर के विश्वासयोग्य सेवकों को उनके काम के पूर्णता के समय महिमा प्राप्त होगी। यह महिमा उस वक्त मिलेगी जब प्रभु प्रगट होंगे—जो मुरझाने या क्षीण नहीं होगी। यह एक आश्वस्ति है कि संसार की नज़र में पतनशील या कमजोर दिखने वाली सेवा भी परमेश्वर की दृष्टि में दीर्घकालिक प्रभाव डालती है, और अंततः इश्वर के राज्य में सम्मानित होगी।
तीन मुख्य विषय
सम्बद्ध पाठ और उनके विचार
यह संदेश पुराने और नवीन नियमों के एक ही धागे को जोड़ता है: प्रभु की सेवा में् जो दिखावा नहीं, बल्कि सच्ची निष्ठा हो—उसी में समान महिमा है। क्लासिकल टिप्पणीकारों ने इसे निम्न प्रकार समझाया है:
Adam Clarke कहते हैं कि नेतृत्व ईश्वर की दिशा से उधार लिया गया अधिकार है, जो नम्रता और निरीहता के साथ कार्य करता है; अंत में परमेश्वर की महिमा के लिए किया गया कर्म स्थायी परिणाम देता है।
Albert Barnes नोट करते हैं कि महिमा से अभिप्राय है परमेश्वर के राज्य में मान-सम्मान, जो क्रायमन-प्रतिकार नहीं, बल्कि सच्चे सेवकत्व के फलस्वरूप मिलता है।
Matthew Henry का संकेत है कि विश्वासियों के लिए यह स्मरण रहना चाहिए कि प्रभु के लौटने पर वे एक ऐसी अस्थिर नहीं, बल्कि स्थायी दृष्टी से महिमा पाएंगे, जो शर्तों के बिना सत्य है।
क्रॉस-रेफरेंस
याकूब 1:12 — कठिन अनुभवों के दौरान धर्म का पालन कर अंत तक टिके रहने पर वचन-उत्पादन में आशीष मिलती है; यह पूर्व रूप से महिमा के आह्वान की राह दिखाती है कि धैर्य से आचरण संभव है।
रोम 8:17 — यदि हम साथ-राजा बनते हैं, तो सह-पीड़न के साथ-साथ महिमा भी भागीदार होगी; यह वाक्य पवित्र जीवन की महिमा-संबंधी दृष्टि को विस्तृत करता है।
2 कॉरिंथ 4:17 — यहाँ हल्की सी, क्षणिक परिसीमा में भी महिमा अकारण नहीं, बल्कि अत्यंत बड़ी और स्थायी है; यह अनुभव देता है कि अस्थाई कष्ट भी परिणामस्वरूप अनंत स्वतंत्रता में बदलते हैं।
व्यावहारिक चर्चा
संक्षेप
1 पतरस 5:4 हमें शिक्षाता है कि परमेश्वर के विश्वासयोग्य नेतृत्व अंततः एक अविनाशी महिमा के पात्र बनते हैं—यह महिमा उस समय देगा जाएगा जब प्रभु ईसा प्रकट होंगे। यह संदेश हमें नम्रता, धैर्य और ईश्वर-आज्ञाकारिता की ओर बुलाता है; अस्थायित्व में भी स्थिरता और विश्वास में आशा सबसे महत्वपूर्ण मूल्य हैं।
छोटी टिप्पणी: यदि आप अपने समृद्ध आत्म-विश्वास के बजाय सेवकत्व को प्राथमिकता दें, तो परमेश्वर के राज्य में आपको वह महिमा मिलेगी जिसे मुरझाने नहीं मिलता।