Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 पतरस 5:11 बाइबल पद की व्याख्या
1 पतरस 5:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उसी का साम्राज्य युगानुयुग रहे। आमीन।
1 पतरस 5:11 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
1 पतरस 5:11 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

1 पतरस 4:11 (HINIRV) »
यदि कोई बोले, तो ऐसा बोले मानो परमेश्वर का वचन है; यदि कोई सेवा करे, तो उस शक्ति से करे जो परमेश्वर देता है; जिससे सब बातों में यीशु मसीह के द्वारा, परमेश्वर की महिमा प्रगट हो। महिमा और सामर्थ्य युगानुयुग उसी की है। आमीन।

रोमियों 11:36 (HINIRV) »
क्योंकि उसकी ओर से, और उसी के द्वारा, और उसी के लिये सब कुछ है: उसकी महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन।

प्रकाशितवाक्य 1:6 (HINIRV) »
और हमें एक राज्य और अपने पिता परमेश्वर के लिये याजक भी बना दिया; उसी की महिमा और पराक्रम युगानुयुग रहे। आमीन। (निर्ग. 19:6, यशा. 61:6)
1 पतरस 5:11 का महत्व और समझ
यह शेष शब्द एक ऐसी मंज़िल की ओर इशारा करते हैं जहाँ हमारे सारे विश्वास और जीवन-यात्रा अंततः पहुँचती है: प्रभु के राज का स्थायित्व। इस छोटे से वचन में आशा, स्थिरता और परमेश्वर के महिमामय साम्राज्य के अनवरत शासन की पुष्टि मिलती है। अस्थिरताओं, आंतरिक संघर्षों और बहिष्करणों के बीच भी यह संदेश देता है कि परमेश्वर का शासन चिरस्थायी है और वही हमारी सीटियों का ठिकाना है।
पृथ्वी पर लेखन का वास्तविक संदर्भ
पतरस पहली पत्रकी लेखन में मसीही समुदाय को धैर्य, विनम्रता और विश्वासी रहने के इच्छुक मार्ग दिखाये गए हैं। इस वचन-उद्धरण में लेखक ने यह बार-बार याद दिलाया है कि प्रभु का साम्राज्य मानवीय सत्ता से परे और अनंत काल तक कायम है। यह संदेश खास तौर पर उन चर्चों के लिए है जो परख और कटुता के समय में भी ईश्वर के योजनाबद्ध राज्य की आशा बनाए रखते हैं।
मुख्य संदेश
आध्यात्मिक विषय-संबंध
यह वचन चित्रित करता है कि ईश्वर का राज समय और परिस्थितियों से निर्भर नहीं है; यह दया, न्याय और पवित्रता पर आधारित है। नवीनीकरण के क्रम में यीशु मसीह के जन्म, जीवन, क्रूस और पुनरुत्थान से जुड़ा जोश और दृढ़ता भी इसी स्थायित्व की पुष्टि करते हैं।
क्रॉस-रेफरेंसेस (सहायकारी संदर्भ और संक्षिप्त व्याख्या)
- दानियों 1:25: परमेश्वर के रहम और उसकी योजना का स्थायित्व; यह वचन एक ही धागे में है कि प्रभु का राज्य अटल है।
- याकूब 1:12: धैर्यस्वरूपी विश्वास का पुरस्कार—जो निष्कर्षतः ईश्वर के राज्य की मान्यता में परिणत होता है।
- मरकुस 13:31: न तो आकाश और पृथ्वी ही कट जाएंगे; ईश्वर के शब्द स्थिर रहते हैं, उनके राज्य का क्रम निरंतर चलता है।
इन संदर्शनों से दिखता है कि परमेश्वर के राज्य की ज्योति अनंत है, और यह विश्वासियों को आंतरिक टिकाव और आश्वासन देती है कि एक दिन पूरी शांति और अनुग्रह का राज प्रकट होगा।
व्यावहारिक उपयोग
व्याख्या-नोट्स (संक्षिप्त उद्धरण)
यदि आप किन्हीं प्रसिद्ध सार्वजनिक-डायम-commentary के बिंदुओं को देखें, तो उनके विचार क्रम में यह सुझाते हैं कि परमेश्वर के राज की निरंतरता विश्वास-जीवन के मूल आधार है।
महत्वपूर्ण उद्धरण: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke जैसे स्रोतों के छोटे उद्धरण उपलब्ध होने पर नीचे दर्ज किए जा सकते हैं—
“...यह राज युगानुयुग तक ठहरा रहेगा”—ऐसे शब्दधारक शब्द-रूलिंग का संकेत देते हैं।
Devotional क्रिया-प्रभाव
आज का क्षण यह स्मरण दिलाता है कि परमेश्वर का शासन किसी भी राजनीतिक सत्ता या सामाजिक उथल-पुथल से ऊपर है। जब जीवन में अस्थिरता हो, तब यह याद रखें कि ईश्वर के साम्राज्य का दीपक दूर-दूर तक जलता रहेगा। अपनी आशाओं को चलती-फिरती परिस्थितियों से विचलित न करें; विश्वास में स्थिर रहें और प्रभु के राज्य के आने की प्रतीक्षा करें—यही जीवन का वास्तविक ध्येय है।