Old Testament
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होशे 13:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
चाहे वह अपने भाइयों से अधिक फूले-फले, तो भी पुरवाई उस पर चलेगी, और यहोवा की ओर से मरुस्थल से आएगी, और उसका कुण्ड सूखेगा; और उसका सोता निर्जल हो जाएगा। उसकी रखी हुई सब मनभावनी वस्तुएँ वह लूट ले जाएगा।
होशे 13:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
होशे 13:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहेजकेल 19:12 (HINIRV) »
तो भी वह जलजलाहट के साथ उखाड़कर भूमि पर गिराई गई, और उसके फल पुरवाई हवा के लगने से सूख गए; और उसकी मोटी टहनियाँ टूटकर सूख गई; और वे आग से भस्म हो गई।

यहेजकेल 17:10 (HINIRV) »
चाहे, वह लगी भी रहे, तो भी क्या वह फूले फलेगी? जब पुरवाई उसे लगे, तब क्या वह बिलकुल सूख न जाएगी? वह तो जहाँ उगी है उसी क्यारी में सूख जाएगी।”

उत्पत्ति 49:22 (HINIRV) »
यूसुफ बलवन्त लता की एक शाखा है, वह सोते के पास लगी हुई फलवन्त लता की एक शाखा है; उसकी डालियाँ दीवार पर से चढ़कर फैल जाती हैं।
होशे 13:15 पर टिप्पणी
पवित्रि ग्रंथ में होशे ने इसVerse के माध्यम से यह स्पष्ट किया है कि जो लोग प्रभु के भक्त बनने के बजाय अपना बोलबाला दिखाते हैं, वे परमेश्वर के न्याय से बच नहीं पाते। यहाँ यह दिखाया गया है कि आत्म-आश्रय और बाह्य सामर्थ्य कितनी भी बड़ी क्यों न हो, पूरबी आंधी—यानी परमेश्वर के निर्णय—उनकी प्रारब्ध-रेखाओं को उखाड़ फेंकती है। Hosea के दिनों में यह संदेश अस्थिर सामरिक-धन-परायणता की प्रवृत्ति पर चोट करता है, ताकि इस्रायली लोग सचेत रहें कि उनका सुरक्षा स्रोत कितना स्थिर और सच्चा है।
केंद्रीय अर्थ
यह वाक्य बताता है कि शत्रु-श्रमताओं के बावजूद, आत्म-गौरव या भाइयों से अधिक होने का आरोप दिखाने वाला व्यक्ति भी परलोक-यात्रा के दौरान तबाह होने वाला है। पुरवाई और मरुस्थल से आने वाला साधन—यानी प्राकृतिक और दिव्य निर्णय—उसकी स्थिति को विभाजित कर देगा; उसके धन-सम्पदा और प्रिय वस्तुएँ क्षणभर के लिए उसकी सुरक्षा बन जाती हैं, परन्तु अंततः लूट और निर्जनता उसे घेरेगी। यह न्याय का संदेश है: पृथ्वी के राजा हों या प्रजा, परमेश्वर के नियम से ऊपर कोई नहीं।
मुलभूत विषय
संदर्भ-चिन्ह और संलapost
यथार्थ संदर्भों से यह प्रेरणा मिलती है कि: - होशे का संदेश प्रायः इस्राएली नेता और समाज के अंहकार पर चोट करता है, ताकि धर्म के वैचारिक और नैतिक ढांचे फिर से स्थापित हों। - अन्य जहाँ जहां प्रमुख राजा-प्रशासन ने आचरण-हीनता दिखाई, वहाँ भी परमेश्वर ने चेतावनी दी।
व्यावहारिक मनन
आज के विश्वासियों के लिए यह पद यह स्मरण कराता है कि आपकी सुरक्षा और औचित्य केवल बाहरी सफलता पर निर्भर नहीं करते। यदि आप अपने जीवन को प्रभु के निर्देशों के अनुरूप नहीं रखते, तो भटकने का खतरा रहता है। धनी-सम्पदा, प्रभाव, या सामाजिक स्थिति भले ही बढ़ती रहे, पर असली शांति और सुरक्षा उसी के पास है जो परमेश्वर के आज्ञाकारी जीवन को अपनाता है।
क्रॉस-रेफ़रेंसेस (संक्षेप)
1) होशे 6:1–3: प्रभु की पुकार और आत्म-स्वीकृति की आवश्यक्ता।
2) यिर्मयाह 17:5–7: मनुष्य की भरोसा-स्थल का विकल्प—परमेश्वर बनाम मनुष्य की शक्तियाँ।
3) निर्गमन 14:13–14: प्रभु के उद्धार-कर्तव्य के प्रति भरोसा।
इन संदर्भों में यह दिखता है कि स्व-गौरव बनाम परमेश्वर की कृपा में स्पष्ट फैसला करना पड़ता है: जो परमेश्वर पर निर्भर रहते हैं, वे भय से मुक्त रहते हैं; जो केवल अपनी क्षमताओं पर टिकते हैं, वे जल्द ही असहाय बन जाते हैं।
संक्षिप्त समापन
होशे 13:15 हमें स्मरण कराता है कि चाहे आदमी कितना भी फैला-फूला क्यों न हो, परमेश्वर के न्याय के चक्र से बचना असंभव है। सच्ची सुरक्षा और समृद्धि केवल विश्वास में है जो परमेश्वर के रास्तों के अनुसार चलता है।
उद्धरण संकेत: यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के समानंदर उद्धरणों के बारे में रुचि रखते हैं, तो नीचे वे उपलब्ध संक्षिप्त पंक्तियाँ दे दी गई हैं:
“हर आत्म-प्रचार तात्कालिक है, पर परमेश्वर का स्थान न कभी बदला है, न बदलेगा।” — मैथ्यू हेनरी की शैली से सारसंकेत
“धन और शोहरत से समर्थ व्यक्ति भी परमेश्वर के निर्णय से बंधे हुए हैं।” — ऐल्बर्ट बार्न्स का संक्षेप
“जो अपनी शक्ति पर निर्भर रहता है, उसे निर्जल उजाड़ का सामना करना पड़ता है।” — एडम क्लार्क का संदेश