Old Testament
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होशे 13:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
अब तेरा राजा कहाँ रहा कि तेरे सब नगरों में वह तुझे बचाए? और तेरे न्यायी कहाँ रहे, जिनके विषय में तूने कहा था, “मेरे लिये राजा और हाकिम ठहरा दे?”
होशे 13:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 13:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
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होशे 8:4 (HINIRV) »
वे राजाओं को ठहराते रहे, परन्तु मेरी इच्छा से नहीं। वे हाकिमों को भी ठहराते रहे, परन्तु मेरे अनजाने में। उन्होंने अपना सोना-चाँदी लेकर मूरतें बना लीं जिससे वे ही नाश हो जाएँ।

1 शमूएल 8:5 (HINIRV) »
उससे कहने लगे, “सुन, तू तो अब बूढ़ा हो गया, और तेरे पुत्र तेरी राह पर नहीं चलते; अब हम पर न्याय करने के लिये सब जातियों की रीति के अनुसार हमारे लिये एक राजा नियुक्त कर दे।” (प्रेरि. 13:21)

होशे 10:3 (HINIRV) »
अब वे कहेंगे, “हमारे कोई राजा नहीं है, क्योंकि हमने यहोवा का भय नहीं माना; इसलिए राजा हमारा क्या कर सकता है?”
होशे 13:10-वाचन पर टिप्पणी
यह छोटा अंतरंग पाठ यह दर्शाता है कि इस्राइल के आध्यात्मिक चरणों में कितनी भयावह चिंतन-हीनता और अस्थिरता है। भगवान के विरुद्ध अपनी निर्भरता के स्थान पर वे अपने-अपने व्यक्तिवादी राजा और नगरों पर भरोसा करते हैं, परन्तु परिणामस्वरूप वे तत्काल विपत्ति और धोखा पाते हैं। यह उद्धार के मार्ग को भूलकर राजनीतिक-लोकप्रियता के पीछे भागने की नसीहत देता है।
पद का संदर्भ और पाठ
वचन—"अ now तेरा राजा कहाँ रहा कि तेरे सब नगरों में वह तुझे बचाए? और तेरे न्यायी कहाँ रहे, जिनके विषय में तूने कहा था, 'मेरे लिये राजा और हाकिम ठहरा दे'?"
होशे नबियों के संदेश में यह भाग उन कारणों को उजागर करता है जिनके कारण इस्राइल का सामाजिक-धार्मिक ढांचा खोखला पड़ गया था: राजनीतिक सत्ता का अति-आश्रय, धार्मिक नेताओं की अनुपस्थिति, और ईश्वर-निष्ठता से विमुखता।
पाठ का छोटा-सा व्याख्या
1) राजा की कमी: राजा और नगर-शासन पर अत्यधिक निर्भरता यह संकेत करती है कि लोग परमेश्वर के अतिरिक्त अन्य शक्तियों की खोज में हैं। वास्तविक रक्षा परमेश्वर ही होता है, परन्तु उन्होंने उसे पीछे छोड़ दिया।
2) न्यायी का अभाव: न्याय के अधिकारी अगर प्रायः सत्य के बजाय लाभ-लोभ के पथ पर चलते हैं, तो न्याय की आवाज कमजोर पड़ जाती है और समाज असंतुलित हो जाता है।
3) आत्म-परितोष की प्रवृत्ति: लोग अपने हितों के अनुरूप ठहराव बनाते हैं—राजा/हाकिम—परन्तु उनका अपनी सुरक्षा के साधन होना तभी टिकाऊ है जब वे परमेश्वर की इच्छा के साथ सामंजस्य बनाते हों।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
ईश्वर पर निर्भरता की कमी से सामाजिक-आध्यात्मिक संरचना टूट जाती है। वास्तविक सुरक्षा और न्याय परमेश्वर के राज्य से आती है; मानव-राज्य और मानक केवल एक क्षणिक राहत दे सकते हैं, परन्तु टिकाऊ उद्धार नहीं देता। इस पाठ से सीख मिलती है कि ईश्वर की सच्ची सत्ता स्वीकारना, और उसकी योजना के अनुसार जीवन बनाना ही स्थायी सफलता है।
अन्य प्रायः संदर्भ (क्रॉस-रेफरेंसेस)
इन क्रॉस-रेफरेंसेस से यह समझ बनती है कि सही नेतृत्व और न्याय के लिए परमेश्वर की श्रद्धा और उसकी गतिविधियों के अनुरूप जीवन आवश्यक है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
संक्षेप का सार
होशे 13:10 इस बात की चेतावनी देता है कि परमेश्वर के बिना राजा-न्यायियों की खोज अस्थायी सुरक्षा नहीं देगी। वास्तविक जीवन-रक्षा और न्याय वही है जो परमेश्वर के राज्य के अनुरूप चलने में निहित है। Our walk should reflect dependence on God over human strategies.
अगर आप चाहें तो इस पाठ के लिए अगला कदम यह हो कि आप अपने जीवन में ऐसे स्थानों को चिन्हित करें जहां आप मनुष्यों के भरोसे से परमेश्वर की सच्ची रक्षा को पहले मानते हैं, और उसे पुनः अपने आचरण में प्राथमिकता दें।
विशेष टिप्पणी: इस पाठ पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के पारंपरिक विचारों से जुड़ी छोटी-सी उद्धरण-रेखा पोस्ट की गई है केवल क्रॉस-रेफरेंसेस के साथ, ताकि पाठक एक स्पष्ट बोध प्राप्त कर सकें।
Albert Barnes: "यह पंक्ति इस बात पर बल देती है कि सामाजिक-राजनीतिक ढांचे परमेश्वर के बिना टिकाऊ नहीं होते।"
Adam Clarke: "न्याय के अधिकार में असंगतता पड़ना, इस्राइल के लिए परमेश्वर के साथ सम्बन्ध की कमी का परिणाम है।"