Old Testament
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होशे 13:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
मैंने उस समय तुझ पर मन लगाया जब तू जंगल में वरन् अत्यन्त सूखे देश में था।
होशे 13:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 13:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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व्यवस्थाविवरण 2:7 (HINIRV) »
क्योंकि तुम्हारा परमेश्वर यहोवा तुम्हारे हाथों के सब कामों के विषय तुम्हें आशीष देता आया है; इस भारी जंगल में तुम्हारा चलना फिरना वह जानता है; इन चालीस वर्षों में तुम्हारा परमेश्वर यहोवा तुम्हारे संग-संग रहा है; और तुमको कुछ घटी नहीं हुई।'

व्यवस्थाविवरण 8:15 (HINIRV) »
और उस बड़े और भयानक जंगल में से ले आया है, जहाँ तेज विषवाले सर्प और बिच्छू हैं, और जलरहित सूखे देश में उसने तेरे लिये चकमक की चट्टान से जल निकाला,

व्यवस्थाविवरण 32:10 (HINIRV) »
“उसने उसको जंगल में, और सुनसान और गरजनेवालों से भरी हुई मरूभूमि में पाया; उसने उसके चारों ओर रहकर उसकी रक्षा की, और अपनी आँख की पुतली के समान उसकी सुधि रखी।
होशे 13:5 पर पकड़—एक मन पर आधारित सुरक्षा
इस छोटे से वचंन में भविष्यवाणी होती है कि ईश्वर के साथ उनका रिश्ता कैसे बना और कैसे टूट सकता है। होशे के काल में उत्तराधिकार के अनुरूप, परमेश्वर का उद्देश्य इस्राएल को उसकी निर्भरता और उद्धार के सूत्रों की याद दिलाना था। यह शास्त्र हमें बताता है कि परमेश्वर ने तुझ पर विशेष निगाह और स्मरण रखा है—जब तुम जंगल जैसे सूखे देश में थे, तब भी उसका हाथ तुम्हारे साथ था।
पाठ का संदर्भ और चरणबद्ध चर्चा
होशे 13:5 में कहा गया है कि “मैंने उस समय तुझ पर मन लगाया जब तू जंगल में वरन् अत्यन्त सूखे देश में था।” यहाँ पर भगवान की स्मरण और व्यवस्था को देखने का तरीका साफ है—यद्यपि इस्राएल का समय कष्टदायक था, परमेश्वर ने उनकी सुरक्षा और मान-सम्मान बनाए रखा। यह संदेश बताते हैं कि परमेश्वर की कृपा और स्मरणाशक्ति कठिन समय में भी उत्पन्न होती है, न कि केवल शांतिपूर्ण समयों में।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अनुशंसा उद्धरण (संश्लेषित दृष्टिकोण)
मैथ्यू हेनरी, एलबर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायरे Papyrus-स्टाइल टिप्पणियों से मूल भावना मिलती है: परमेश्वर अपने लोगों के प्रति निष्ठावान रहते हैं, भले ही वे कठनाइयों में हों। उनके विचार नीचे संक्षेपित रूप में समाहित हैं:
“भविष्य के समय में भी परमेश्वर का मन तुम्हारे प्रति बना रहता है; कठिन क्षणों में भी उसकी कृपा और स्मरण तुम्हारे साथ है।”
नोट: इन पंक्तियों के मूल शब्दांश विस्तृत उल्लेख से छुड़े हुए हैं, परन्तु वही भावना आपस में एकीकृत है—ईश्वर की कृपा और स्मरण जो कठिन दिनों में भी स्थिर रहते हैं।
अन्य पवित्र ग्रंथों के संदर्भ
• यशायाह 41:10—ईश्वर का सहारा और निश्चिंतता बनाये रखना।
• डानיאל 6:23—कठिन समय में परमेश्वर का उद्धारक हाथ सक्रिय रहता है।
• रोम 8:38-39—किसी भी परिस्थिति में प्रेम की सुरक्षा।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
संक्षेप
होशे 13:5 का संदेश है: परमेश्वर ने तब भी तुझ पर मन लगाया जब तुम अत्यंत सूखे देश में थे। यह याद दिलाता है कि उसकी स्मरण-शक्ति और कृपा समय के हर चरण में रहती है—जीवन के हर जंगल में भी। यह हमें आश्वस्त करता है कि हमारा भरोसा खाली नहीं है, क्योंकि परमेश्वर हमारे साथ है और वह हमारे उद्धारक हैं।
सूक्ष्म cross-references
• यशायाह 43:2—जल-जल में भी प्रभु साथ रहते हैं;
• पतरस 1:5—विश्वास पर आधारित सुरक्षा का अनुभव;
• एस्तेर 4:14—लोक-कल्याण के लिए परमेश्वर की योजना का भागीदारी।