Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीहोशे 1:6 बाइबल पद की व्याख्या
होशे 1:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वह स्त्री फिर गर्भवती हुई और उसके एक बेटी उत्पन्न हुई। तब यहोवा ने होशे से कहा, “उसका नाम लोरुहामा रख; क्योंकि मैं इस्राएल के घराने पर फिर कभी दया करके उनका अपराध किसी प्रकार से क्षमा न करूँगा। (1 पत. 2:10)
होशे 1:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 1:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 राजाओं 17:6 (HINIRV) »
होशे के नौवें वर्ष में अश्शूर के राजा ने शोमरोन को ले लिया, और इस्राएलियों को अश्शूर में ले जाकर, हलह में और गोजान की नदी हाबोर के पास और मादियों के नगरों में बसाया।

होशे 2:23 (HINIRV) »
मैं अपने लिये उसे देश में बोऊँगा, और लोरुहामा पर दया करूँगा, और लोअम्मी से कहूँगा, तू मेरी प्रजा है, और वह कहेगा, 'हे मेरे परमेश्वर'।” (रोम. 9:25, 1 पत. 2:10)

होशे 1:6 का अर्थ और संदर्भ
इस पद में कहती स्त्री का नाम लोरुहामा रखा गया—“मेरे प्रेम से या मेरी ममता से नहीं”—जो इस्राएली समाज के लिए एक कठोर संकेत है कि परमेश्वर अब उनके लिए क्षमा के रास्ते नहीं खोलेंगे। यह वाक्यांश एक चेतावनी के रूप में आता है कि इस्राएल के साथ विश्वासघात और बुरे रास्तों के कारण परमेश्वर کی दया में कमी आएगी, भले ही भविष्य में उनपर दया मिल सके या न मिले, यह उसके निर्णय पर निर्भर है।
पार्श्वभूमि और संदर्भ
होशे का ऐतिहासिक संदर्भ अस्सूरी राजाओं के काल से है जब इस्राएल और यहुदा बार-बार प्रचलित पथभ्रष्टियों में लिप्त थे। होशे के विवाह और उसके बच्चों के नाम एक धार्मिक-आलोचना का रूप लेते हैं—ईश्वर के साथ विश्वासघात की गूंज को व्यक्त करते हैं। लोरुहामा का मतलब स्पष्ट संदेश देता है: “मैं तुम्हें नहीं सुनूँगा” या “मैं दया नहीं दिखाऊँगा।” यह एक काव्यमय संकेत है कि ईश्वर अब उनका निष्ठा-पथ से विचलन के कारण प्रतिक्रिया देंगे।
व्याख्यात्मक निष्कर्ष
दृष्टांत और क्रॉस-रेफरेंसेस
1) षडयंत्रपूर्ण रिश्तों के परिणाम के बारे में आख्या दिखाने वाले अन्य प्रकरणों की तरह, होशे 1-3 में संकेत मिलता है कि ईश्वर के कोप के साथ साथ पुलोदय भी है।
2) पतरस 2:10 जैसे दुराचार के कारण दया की कमी का संकेत — नये परिप्रेक्ष्य में यह तुलना यह बताती है कि दया-हृदय के साथ अनुशासन का संतुलन कैसे बना रहता है।
3) मत्ती 23:37 जैसी प्रवचनों मेंroads का पाठ यह बताता है कि ईश्वर क्यों पथभ्रष्टों के लिये चेतावनियाँ देते हैं ताकि वे फिर से लौट आएं।
पश्चात्त्य उदाहरण और संयोग
यह भाग होशे के संदेश के साथ-साथ “क्यों फिर भी दया है?” के प्रश्न को उठाता है: दया और न्याय के बीच संतुलन कैसे बना रहे? यह प्रश्न हमारे दैनिक आचरण और समुदाय के लिए मार्गदर्शक बना रहता है।
संवेगपूर्ण निष्कर्ष
होशे 1:6 हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर की चेतावनियाँ और न्याय भी प्रेमपूर्ण उद्देश्य को दर्शाते हैं—उन्हीं का उद्देश्य न केवल दंड देना है, बल्कि पथपर लौटना और टिके रहना है। अगर हम अपने जीवन में ईश्वर के संकेतों को पहचानें, तो वह परिवर्तन की ओर प्रेरित कर सकता है।
क्यों पढ़ें और कैसे लागू करें
- परमेश्वर के अधिकार और दया के बीच संतुलन को समझेंगे।
- आत्म-निरीक्षण करें: क्या हमारे व्यवहार में भी अस्थिरता और विश्वासघात जैसे संकेत हैं, जिन्हें सुधारना है?
- समुदाय में एक-दूसरे के लिए दया और सच्ची चेतावनी के साथ मार्गदर्शक बनें।