Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीहोशे 1:9 बाइबल पद की व्याख्या
होशे 1:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब यहोवा ने कहा, “इसका नाम लोअम्मी रख*; क्योंकि तुम लोग मेरी प्रजा नहीं हो, और न मैं तुम्हारा परमेश्वर रहूँगा।”
होशे 1:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
होशे 1:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

यिर्मयाह 15:1 (HINIRV) »
फिर यहोवा ने मुझसे कहा, “यदि मूसा और शमूएल भी मेरे सामने खड़े होते, तो भी मेरा मन इन लोगों की ओर न फिरता। इनको मेरे सामने से निकाल दो कि वे निकल जाएँ!
होशे 1:9 पर टिप्पणी (HINIRV)
यह वाक्य उस समय का है जब ईश्वरीय घोषणा के द्वारा इस्राएल के आध्यात्मिक पिता और पत्नी रूपी प्रतीक युवा पत्नी-के तौर पर होशे की कथा में नया नामकरण किया गया। पहले भाग में अभिशाप की ध्वनि सुनाई देती है—परमेश्वर के विरुद्ध उनका पलायन और असली पहचान खोना—और फिर एक नई पहचान का उद्घोष होता है: लोअम्मी, जिसका अर्थ है “ग़ालत नहीं” या “मेरी प्रिय नहीं।” यह शब्दावली तब का सामाजिक-धार्मिक परिणाम है जब लोग परमेश्वर के साथ अपने संबंध को तात्कालिक लाभ-हानि के साथी समझने लगते हैं; परमेश्वर उनकी प्रजा का दायित्व नहीं उठाते और न ही वे उसकी ईमानदारी के पात्र बनते हैं।
पाठ का संकल्पनात्मक विवरण
होशे 1:9 में यहोवा सीधे कहता है कि इस पत्नी का नाम लोअम्मी रख लिया जाए; क्योंकि “तुम लोग मेरी प्रजा नहीं हो, और न मैं तुम्हारा परमेश्वर रहूंगा।” इस उद्घोष में तीन बातें स्पष्ट हैं: एक व्यक्ति-परिवर्तन का संकेत, एक आध्यात्मिक पहचाने का क्षण, और एक सामाजिक-धार्मिक परिणाम। लोअम्मी के बदले यह शब्द, इजराइल की धार्मिक-आत्मा के क्षरण को दर्शाता है: वे अब परमेश्वर के साथ अपनी पहचान खो चुके हैं और परमेश्वर भी उनके साथ अपने संबंध को नया स्वरूप नहीं दे रहे।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस Verse का मुख्य पाठ यह है: परमेश्वर की स्थिति और मानव के भीतर की स्थिति का स्पष्ट विभाजन। जब लोग परमेश्वर के साथ अपने रिश्ते को केवल रीतियों और लाभ के ढांचे में देखते हैं, तो परमेश्वर उनके नाम को भी बदल कर देखते हैं—ताकि उनके वास्तविक स्थिति का संकेत मिले। यह साक्षात्कार यह भी दिखाता है कि परमेश्वर अपनी सच्ची पहचान के साथ प्रेमी-प्रजा के संबंध को वापस बनाने के लिए तैयार रहते हैं, परन्तु इसके लिए निजता और आत्म-स्वीकार आवश्यक है।
अन्य स्रोतों से संकल्पनाएँ
हिनिर्व पर टिप्पणी हेतु अन्य प्राचीन टिप्पणियाँ यह बताती हैं कि लोअम्मी नाम का विविध अर्थ है “कौन-सी-आत्मा” या “क्यों-क्यों मेरी जगह नहीं।” Matthew Henry भी इस संदेश को उद्धृत करते हैं कि परमेश्वर अपने लोक के बीच स्थित रहते हैं और जब लोग अपने आप को उनके बिना समझते हैं, तब वह दूरी बनाते हैं; परन्तु उनकी करुणा और वसूली का रास्ता खुला रहता है। Albert Barnes कहते हैं कि यह नामकरण यह दर्शाता है कि परमेश्वर के साथ संबंधों की कमी ने सामाजिक और आन्तरिक विश्वास-घटाओं को जन्म दिया है। Adam Clarke इसके साथ यह जोड़ते हैं कि यह परिवर्तन समाज के दृष्टिकोण में भी होने वाले परिवर्तन का संकेत है—तब लोग वास्तविक धार्मिकता से दूर हो जाते हैं, और परमेश्वर अपनी न्याय-व्यवस्था के अनुसार परिणाम दिखाते हैं।
उन में प्रयुक्त शब्द-सार और उद्धरण
यहाँ किन्हीं अंश-उद्धरणों का संक्षेपित उपयोग किया गया है, ताकि पाठक को मूल विचार स्पष्ट हो: “तुम लोग मेरी प्रजा नहीं हो, और न मैं तुम्हारा परमेश्वर रहूंगा।” (होशे 1:9) क्योंकि यह वाक्य सीधे शब्दों में है, अतः अन्य टिप्पणीकारों के सम्यक विचार भी इस उद्घोष के पवित्र अर्थ को संश्लेषित करते हैं।
क्रॉस-रेफरेंस और उनके संक्षेप उदाहरण
इन क्रॉस-रेफरेंसों से यह स्पष्ट होता है कि क्रोध के बावजूद परमेश्वर का प्रेम-आत्मा पुनः जुड़ाव की राह दिखाता है और विश्वास के साथ व्यवहार में सुधार लाने का अवसर देता है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
सारांश
होशे 1:9 एक चेतावनी और चंगा करने वाला संदेश दोनों है: यदि हम धर्म के रिकॉर्ड्स में भटक जाते हैं और परमेश्वर को अपनी ज़रूरतों के बीच नहीं पाते, तो हमारा नाम और पहचान भी बदल सकता है। लेकिन यह भी दिखाता है कि परमेश्वर के प्रेम-व्यवहार के रास्ते खुलते रहते हैं—ताकि हम लौटकर उनकी प्रजा बनें और वे हमारे परमेश्वर बनें।