Old Testament
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होशे 1:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब यहोवा ने उससे कहा, “उसका नाम यिज्रेल* रख; क्योंकि थोड़े ही काल में मैं येहू के घराने को यिज्रेल की हत्या का दण्ड दूँगा, और मैं इस्राएल के घराने के राज्य का अन्त कर दूँगा।
होशे 1:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 1:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 राजाओं 10:7 (HINIRV) »
यह पत्र उनके हाथ लगते ही, उन्होंने उन सत्तरों राजपुत्रों को पकड़कर मार डाला, और उनके सिर टोकरियों में रखकर यिज्रेल को उसके पास भेज दिए।

2 राजाओं 10:10 (HINIRV) »
अब जान लो कि जो वचन यहोवा ने अपने दास एलिय्याह के द्वारा कहा था, उसे उसने पूरा किया है; जो वचन यहोवा ने अहाब के घराने के विषय कहा, उसमें से एक भी बात बिना पूरी हुए न रहेगी।”

2 राजाओं 15:10 (HINIRV) »
और याबेश के पुत्र शल्लूम ने उससे राजद्रोह की गोष्ठी करके उसको प्रजा के सामने मारा, और उसको घात करके उसके स्थान पर राजा हुआ।
योहशे (होशे) 1:4 का संक्षिप्त पाठ-परिवेश और टिप्पणी
पद्य-स्थिति: यहोवा अपने संदेषक होशे के माध्यम से यहूदा-इस्राएल के ऐतिहासिक-आर्थिक और धार्मिक संकट के बीच एक चेतावनी और धर्म-सज्जन की योजना बतला रहा है। यहाँ शब्द-चित्र स्पष्ट हैं: एक भविष्यद्वक्ता के सामने दुष्ट दिलों के बीच दिव्य निर्णय का संकेत और एक नई पहचान, ताकि लोगों के भीतर परिवर्तन की आशा प्रकट हो। इसा हिस्से में यहोवा एलान करते हैं कि वह यहूऊर-घराने के भीतर हत्या और राज्य-व्यवस्था के अंत की योजनाओं को कैसे संचालित करेगा, और किस प्रकार यिज्रेल नाम के साथ नया प्रतीक उभरकर आयेगा।
ईश्वर और विश्वास पर टेक
इस वाक्य में ईश्वर का न्याय और दया दोनों एक साथ उभरते हैं। यहोवा अपने चुने हुए लोगों को कठोर सजा के डर से प्रेरित करता है, पर साथ ही पात्र-परिवर्तन और नई पहचान के माध्यम से उनकी भविष्य की आशा भी बनाता है। यिज्रेल का नामकरण एक प्रतीक है: परमेश्वर की सुधार-यात्रा में विद्वेष नहीं, बल्कि एक नई दिशा और नये स्वरूप की अपेक्षा। यह आशीर्वाद-परिवर्तन का संकेत है, जहाँ ईश्वर अपने प्रेम के साथ देश-देश के अंधकार को चुनौती देता है ताकि लोग धर्म के वास्तविक अर्थ को पहचानें।
मुख्य शब्दों/छवियों की स्पष्टता
अन्य धर्मग्रंथ से सम्बन्ध (संक्षेपित cross-references)
— हष: 1:2-3 की पृष्ठभूमि में न्याय और भय-युक्त चेतावनी; यह बताता है कि यहोवा के शब्द कभी-कभी पृथ्वी पर प्रभाव डालते हैं ताकि भक्ति की नई राह बनती हो।
— होशे 2:16-17 में प्रेम-युक्त चयन और विवाह-उद्धार के संकेत—ईश्वर के साथ नई भेंट के लिए आह्वान; यह होशे 1:4 के प्रतीकात्मक नाम-चयन के साथ एक दृढ़ सम्बन्ध स्थापित करता है।
— मक्क 4:6 में बाँध-तोड़ न्याय और दया के बीच संतुलन; यहिमा के साथ परमेश्वर के उद्देश्य का विस्तार करता है कि उद्धार के पथ में पापों की समाप्ति हो और दूसरों को भी उसकी नज़दीकी मिले।
आज के ठोस अनुप्रयोग
1) परिशुद्ध पहचान का आग्रह: नाम का परिवर्तन संकेत देता है कि भगवान अपने लोगों से केवल बाहरी आचरण नहीं, बल्कि दिल-परिर्वतन चाहते हैं। today, हम अपने जीवन में वास्तविक आस्था और नैतिक बदलाव के लिए ईश्वर से मार्गदर्शन माँगें।
2) प्रिय-न्याय और भरोसा: ईश्वर के न्याय के साथ-साथ उसकी योजनाएं भी—वह नई आशा दिखाते हैं। आत्म-परख करें कि क्या हम भी अपनी जीवन-यात्रा में दया और सत्य के साथ चलते हैं।
3) प्रेरणा के क्रम: कठिन समय में भी परमेश्वर भविष्य के उजाले की घोषणा करते हैं। कठिनाइयों के बीच विश्वास रखें कि ईश्वर की दृष्टि व्यापक है और वह समय पर सुधार और पुनर्स्थापना लाते हैं।
सूक्ष्म उद्धरण और संदर्भ विचार
यदि आवश्यक हो, पाठक ध्यान दें कि अंगीकारित पवित्र-लेखन के भीतर कुछ विशिष्ट विचार Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के प्रसिद्ध टिप्पणी-रेखा से मिलते हैं—परन्तु इस संस्करण में इन्हीं के संक्षेप-उद्धरण केवल तभी स्पष्ट होंगे जब वे पाठ के साथ सीधे उद्धृत हों।
समाप्त टिप्पणी: होशे 1:4 में नाम-परिवर्तन के माध्यम से ईश्वर देश की दशा में आंसु-पथ पर सुधार का संकेत दे रहे हैं। यह न सिर्फ एक ऐतिहासिक चेतावनी है, बल्कि हर 시대 के पाठकों के लिए यह संदेश है कि परमेश्वर की दिशा में उलट-फेर और विश्वास-भरी नई राह संभव है—यदि हम उसकी आवाज सुनकर अपने दिल का परिवर्तन स्वीकार कर लें।