Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 राजाओं 10:1 2 राजाओं 10:2 2 राजाओं 10:3 2 राजाओं 10:4 2 राजाओं 10:5 2 राजाओं 10:6 2 राजाओं 10:7 2 राजाओं 10:8 2 राजाओं 10:9 2 राजाओं 10:10 2 राजाओं 10:11 2 राजाओं 10:12 2 राजाओं 10:13 2 राजाओं 10:14 2 राजाओं 10:15 2 राजाओं 10:16 2 राजाओं 10:17 2 राजाओं 10:18 2 राजाओं 10:19 2 राजाओं 10:20 2 राजाओं 10:21 2 राजाओं 10:22 2 राजाओं 10:23 2 राजाओं 10:24 2 राजाओं 10:25 2 राजाओं 10:26 2 राजाओं 10:27 2 राजाओं 10:28 2 राजाओं 10:29 2 राजाओं 10:30 2 राजाओं 10:31 2 राजाओं 10:32 2 राजाओं 10:33 2 राजाओं 10:34 2 राजाओं 10:35 2 राजाओं 10:36



पद का वातावरण: 2 राजाओं 10:10
यह नज़ारा इस बात का प्रमाण है कि यहोवा अपने दासों के माध्यम से जो कुछ कहता है, वह पूरा होता है। एलिय्याह ने जो word-पत्र (वचन) दिया, उसे इस्राइल के सतह-साम्हानी राजवंश में से इशारा करते हुए कहा गया कि आयी बात पूरी होगी; और अहाब के घराने के विषय में जो कहा गया, वह एक-एक करके सच हो गया। यह पाठθεια खोजती है कि परमेश्वर का वचन कितनी जिम्मेदारी से पूरा किया जाता है, भले ही मानव-योजना कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हो।
ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से जो सीख मिलती है
इस verses से स्पष्ट हो जाता है कि परमेश्वर का वचन विश्वसनीय है और उसकी योजनाएं अचल हैं। वह सत्यनिष्ठा, न्याय और दया से कार्य करता है; वह अपने दासों के माध्यम से जो कहता है, उसे क्रियान्वित कर देता है। इस पाठ में विश्वासयोग्यता की परीक्षा है: आश्वासन का सामना जब आता है, तब भी परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं पर अडिग रहना चाहिए।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्ट व्याख्या
संबंधित क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप, पूर्ण पाठ नहीं)
• "यहोवा के वचन के अनुरूप जो कुछ कहा गया, वह सभी पूरा हुआ"—这一 बात को प्रेरित करती है कि परमेश्वर अपने दायित्वों के प्रति सच्चा है; अन्य जगह भी यह सिद्ध होता है कि परमेश्वर अपने चयनों के अनुरूप ही कदम उठाते हैं, चाहे इंसानी योजनाएं विपरीत हों।
• भविष्यवाणी और पूर्ति की चर्चा—जिनमें यह दिखता है कि दास-समूह के कार्यों से भी परमेश्वर का उद्देश्य पूरा होता है; विश्वास का दायरा बढ़ता है।
आज के संदर्भ में अनुप्रयोग
हम भी अपने जीवन में परमेश्वर के वचन को आधार बनाएं। चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों, उसकी प्रतिज्ञाओं पर अडिग रहें और उसकी योजना के अनुसार निर्णय लें। कठिन समय में उसका वचन आश्वस्त करता है कि उसकी बातों में सत्य है और वे पूरे होते हैं—यह हमारे विश्वास के लिए प्रेरणा है।
संयोजन: 3-चरणीय सार
1) पाठ का मूलक: परमेश्वर का वचन सच है और पूरा होता है।
2) अर्थ: एलिय्याह के माध्यम से दिए गए वचन प्रभु के विश्वासयोग्यता के परिचायक हैं।
3) today: हमारे हर दिन की योजना में भी परमेश्वर की प्रतिज्ञाएं कायम रहती हैं; उनका पालन करें, आशा बनाए रखें, और आचरण में सत्य दिखाएं।
महत्वपूर्ण उद्धरण (कथा-आधारित, सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों से प्रेरित)
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes, या Adam Clarke के समान अभिलाषी शब्दों के संक्षेप में देखना चाहें, तो याद रखें कि ये टिप्पणीकार यह मानते हैं कि परमेश्वर का वचन पृथ्वी पर रहने वाले हर दावे से ऊपर है और क्रिया-नियमन में उसकी ठहराव नहीं है।