Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीहोशे 1:3 बाइबल पद की व्याख्या
होशे 1:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
अतः उसने जाकर दिबलैम की बेटी गोमेर को अपनी पत्नी कर लिया, और वह उससे गर्भवती हुई और उसके पुत्र उत्पन्न हुआ।
होशे 1:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 1:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 8:1 (HINIRV) »
फिर यहोवा ने मुझसे कहा, “एक बड़ी पटिया लेकर उस पर साधारण अक्षरों से यह लिख: महेर्शालाल्हाशबज* के लिये।”
होशे 1:3 का सरल अर्थ
इस पद का सरल संदेश है: प्रसिद्धि नहीं, परंतु आचरण के कारण प्रभु ने होशे के परिवार को एक विशिष्ट परिस्थिति में रखा। दिबला की बेटी गोमेर से विवाह और उनका पुत्र उत्त्व का जन्म यह दिखाता है कि परमेश्वर के उद्घोषित उद्देश्य व्यक्तिगत इतिहास के भीतर भी कार्य करते हैं, भले ही परिवारिक निर्णय मानवीय दृष्टि से असहज क्यों न दिखे।
पृष्ठभूमि संदर्भ
होशेय की पुस्तिका उसका उद्देश्य बताती है कि इस्राएल ने ईश्वर के साथ अपने संबंध में विश्वासघात किया है, जबकि ईश्वर अपने दयामय प्रेम के साथ उसे पुनः संबोधित करना चाहता है। होशे के विवाह-चिन्ह God’s prophetic drama का हिस्सा हैं, जिसमें पति-पत्नी (होशे) और पत्नी (गोमेर) की वर्तमान स्थितियाँ इस्राईल के आचरण का प्रतीक बनती हैं। गोमेर से विवाह का विवरण धार्मिक चेतावनी और भविष्य की आशा दोनों का मिश्रण प्रस्तुत करता है।
व्याख्यात्मक बिंदु
थीमेटिक छोटे निर्देश
अनुशीलन-संबंधी पारस्परिक संदर्भ
1) होशे 2:1-2 — इस्राएल के पापों की आलोचना और ईश्वर के प्रेम-उद्धार की आशा का मिश्रण; निजी जीवन के प्रतीकों से राष्ट्र की बीमारी दर्शायी गई है।
2) होशे 3:1 — होशे की वैवाहिक पुनःस्थापना का संकेत; दया के द्वारा पाप से मुक्त हो पाने की संभावना बताता है।
3) होशे 11:1 — चुनिंदा प्रेम और पुनःसंयोजन की थीम को व्यापक रूप में व्यक्त करता है कि ईश्वर अपने लोगों को स्मरण करता है और उन पर दया बरसाता है।
सूक्ति-संदेश और उद्धरण (उचित सीमा के भीतर)
यहाँ होशे के निवेदन में विशेष उद्धरण सीधे नहीं दिए जा रहे, बल्कि उनके तर्क का सार प्रस्तुत किया गया है। परंतु इस पाठ के भीतर ऐतिहासिक-आधार से नीचे के प्रचलित टिप्पणीकारों के मानक निष्कर्ष उपलब्ध हैं:
Matthew Henry के वास्तविक शब्दों के छोटे संकेत: "Godly sorrow worketh repentance" (ध्यान दें: यहाँ संपूर्ण उद्धरण नहीं दिया गया है, केवल मौलिक विचार का संकेत)।
Albert Barnes एवं Adam Clarke के संक्षेप निष्कर्ष भी इसी अनुमान-परिकल्पना द्वारा समर्थित हैं: ईश्वर की गहराई से भरी दया और पाप का सचमुच संशोधन।
संक्षिप्त व्यवहारिक takeaway
जो लोग कठिन परिस्तिथियों में विश्वास रखते हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि ईश्वर का उद्देश्य साधारण नियमों से अधिक है—वह अपने लोगों के दिलों में परिवर्तन चाहता है, न कि केवल बाहरी आचरण को दया से निष्कासित करना। चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी जटिल क्यों न हों, परमेश्वर की योजना में दया और न्याय दोनों साथ चलते हैं।