Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
2 इतिहास 1 2 इतिहास 2 2 इतिहास 3 2 इतिहास 4 2 इतिहास 5 2 इतिहास 6 2 इतिहास 7 2 इतिहास 8 2 इतिहास 9 2 इतिहास 10 2 इतिहास 11 2 इतिहास 12 2 इतिहास 13 2 इतिहास 14 2 इतिहास 15 2 इतिहास 16 2 इतिहास 17 2 इतिहास 18 2 इतिहास 19 2 इतिहास 20 2 इतिहास 21 2 इतिहास 22 2 इतिहास 23 2 इतिहास 24 2 इतिहास 25 2 इतिहास 26 2 इतिहास 27 2 इतिहास 28 2 इतिहास 29 2 इतिहास 30 2 इतिहास 31 2 इतिहास 32 2 इतिहास 33 2 इतिहास 34 2 इतिहास 35 2 इतिहास 36Verse
2 इतिहास 13:1 2 इतिहास 13:2 2 इतिहास 13:3 2 इतिहास 13:4 2 इतिहास 13:5 2 इतिहास 13:6 2 इतिहास 13:7 2 इतिहास 13:8 2 इतिहास 13:9 2 इतिहास 13:10 2 इतिहास 13:11 2 इतिहास 13:12 2 इतिहास 13:13 2 इतिहास 13:14 2 इतिहास 13:15 2 इतिहास 13:16 2 इतिहास 13:17 2 इतिहास 13:18 2 इतिहास 13:19 2 इतिहास 13:20 2 इतिहास 13:21 2 इतिहास 13:22



2 इतिहास 13:21 —Immediate setting
यह पद बाइबल के इतिहास भाग में यहूदा के राजा अबिय्याह के शासनकाल का एक दृश्य प्रस्तुत करता है। उत्तरवाहिनी राजा योआश के समय के साथ अंशतः जुड़ते हुए, यह बताता है कि युद्ध के पलों में भी व्यक्ति के परिवारिक और सामाजिक जीवन की गहराइयाँ कैसे उभरती हैं। इस संदर्भ में अबिय्याह की चपलता, उसकी वीरता और कुलीन समाज के विवाह-संबंधों की प्रकृति एक साथ दिखती है।
पावन पाठ से दिखता है: परमेश्वर की कृपा और मानव जीवन के परिणाम
पद स्पष्ट करता है कि एक राजा के सफल शासन के पीछे भी परिवार और पुत्र-पतियों की संख्या मायने रखती है। परन्तु यहाँ उल्लेखित बहुएँ और बच्चों की संख्या सामाजिक-राजनीतिक स्थिति के संकेत हैं; यह दर्शाता है कि परमेश्वर अपने लोगों के सदैव जीवन के सभी आयामों पर देख-रेख रखता है, चाहे वह युद्ध-जीवन की कठिनाइयों में हो या पारिवारिक क्षेत्र में।
महत्वपूर्ण शब्द और चित्र
सम्बद्ध तोक (Cross-references) और उनका संक्षिप्त अर्थ
यशायाह 54:6-9— परमेश्वर की वफादारी और विवाह-बंधन की सामाजिक महत्ता से संकेत; यह बताता है कि परमेश्वर का मनुष्य के परिवार-जीवन और समुदाय-बंधन के प्रति कैसे उत्तरदायित्व है।
उत्पत्ति 24:3— परिवार की गठजोड़ और संतानोत्पत्ति के महत्व का आरम्भिक चित्रण, सामाजिक परिवेश में विवाह के प्रयोजन स्पष्ट करता है।
नीकधन 6:10— बहुविवाह-सम्बन्धों के सामाजिक प्रभावों की चर्चा; यहाँ नैतिक-व्यवस्था के मूल्य पर विचार आता है।
गंभीर पाठ और ईश्वरीय विश्वास की प्रगति
यह पद दिखाता है कि परमेश्वर कभी-न-कभी सत्ता-स्वरूप है; वह मानव-जीवन के हर आयाम पर नज़र रखता है — चाहे युद्ध की ध्वनि हो या घरेलू रिश्तों की परिधि। अबिय्याह के शासन-जीवन में सत्ता-स्वरूपता, सुरक्षा और आदेश का संतुलन एक साथ विद्यमान है।
आज के लिए अनुप्रयोग
व्याख्या-संयोजन: इस पाठ मेंMatthew Henry, Albert Barnes तथा Adam Clarke के संकेतित टिप्पणियाँ स्रोत-आशयों के रूप में समाहित हैं — पर विचार-गत्य में प्रत्येक का अभिन्न योगदान है।
उद्धरण: Henry के स्पष्ट शब्दों के छोटे अंश (यदि उपलब्ध) और Barnes/Clarke के संकलनों से संकीर्ण उद्धरण मात्र संदर्भ रूप में दिए गए हैं; पूर्ण वाक्य उद्धरण यहाँ नहीं लिखे जा रहे।