Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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2 इतिहास 9:16 का अर्थ संक्षेप में
इस पद में बताई गई सुधरी और विलासिता का संकेत है: राजा शालम के स्तर की राजसी पूर्णता और समृद्धि की सीमा-शिथिलता। यहाँ सोने से ढालें बनवाने और उन्हें लबानोन के वन महामहालय-like mahal में रखने की बात बताई गई है, जो एक तरह से राजा के शक्ति-चिह्न और समृद्धि की प्रदर्शनी है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पद 2 इतिहास पुस्तक के एक विस्तृत खाते का भाग है जिसमें सुलैमान के शासनकाल की कई बहुमूल्य सूचियाँ आती हैं। पूर्व के अध्यायों में शासकों के राजसी अभियानों, व्यापार-यात्राओं और धरोहरों का उल्लेख है; यह विवरण शासक के वैभव और निर्माण-कार्य की एक परिप्रेक्ष्य झलक देता है। यहाँ तीन सौ छोटी ढालों का उल्लेख और प्रत्येक में तीन सौ शेकेल सोने का दान, एकदम अलंकरण-पूर्वक दर्शाता है कि शासक की भरी-पूरी संपदा कैसी एक शाही शान का प्रतीक बनी।
व्याख्यात्मक अवलोकन
मुख्य विचार
सापेक्ष क्रॉस-रेफरेंसे
नीचे कुछ संबद्ध प्राचीन टिप्पणीकारों के दृष्टिकोण से छोटे संदर्भ दिखते हैं, ताकि पाठ के भाव को व्यापक रूप में समझा जा सके:
आशीर्वचनात्मक अध्ययन बिंदु
1) संपदा कैसे शासक के शासन को दर्शाती है; 2) अनुपातित विनियोग—क्या यह महत्त्वकांक्षा या राष्ट्र-कल्याण के लिए किया गया है; 3) आंतरिक सुरक्षा बनाम बाहरी शो-आफ का सही संतुलन।
सीधी सीख
विद्यमान संपदा का सही उपयोग, एक मजबूत राज्य के लिए आवश्यक हो सकता है, परंतु सच में सुरक्षा और कृपा का आधार आध्यात्मिक-नैतिक मूल्य, न्याय और समुदाय‑कल्याण है। राजा के वैभव के साथ उसका दायित्व भी विकसित होता है: प्रजा की संरक्षा और परमेश्वर के उद्देश्य के प्रति बंधन।
Cross-References (संक्षेप में)
1) सतह पर दिखने वाले बलों के प्रतीक के बारे में देखें: संहार-प्रतीक बनाम सुरक्षा-प्रतीक;
2) अन्य राजाओं के समृद्धि-वर्णन: धन का उपयोग किस तरह नियम और दायित्व के साथ जुड़ा रहता है;
3) सामाजिक-धार्मिक केंद्रों के निर्माण के संदर्भ: सत्ता के प्रदर्शन के साथ आध्यात्मिक-उद्देश्य का संयोजन।