Old Testament
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गलातियों 4:7 का पथ-प्रदर्शक संदर्भ और अर्थ
स्थिति का तात्पर्य: यह पद उन दिनों का culminating विचार है जब विश्वासीों ने कानून के गुलामपन से मुक्त होकर परमेश्वर के पुत्र बनने की स्थिति प्राप्त की। पौलुस बतौर रणनीति यह समझाते हैं कि मसीह में आकर हमने दासता छोड़ दी है और अब हम परमेश्वर के पुत्र हैं; पुत्र होने से वरासत का अधिकार भी मिलता है।
पवित्र लेखन में इसका उद्घोष क्या कहता है?
यह घोषणात्मक वाक्य जन्म से जुड़ा है—यानी ईश्वर के द्वारा फिर एक नवजीवन का प्रवेश: आप पुत्र हैं, और इस पुत्रत्व के साथ हे परमेश्वर के विरासत का अधिकार आता है। यह भाव गुड-न्यूज़ के उस चरण को दर्शाता है जिसमें विश्वासी ईश्वर के परिवार का सदस्य बनते हैं और जीवन के हर आयाम में उसका लाभ व संरक्षण पाएँ।
मुख्य शब्दों की व्याख्या
अन्य सम्बंधित आयतें
इन विचारों से जुड़े कुछ उल्लेखिय आयतें जो विश्वास और अधिकार के इस विचार को गहराई देते हैं:
पवित्रता, आस्था और जीवन-प्रवर्तन
यह पद यह बताता है कि ईश्वर के साथ हमारा संबंध दासत्व के डर से मुक्त है। जीवन में हमारी पहचान अब क्रिस्त में है, न कि नियमों के भार से। इसलिए विश्वास में हमारा आत्म-विश्वास बढ़े, न कि भय और परिश्रम का बोझ।
आज के लिए अनुप्रयोग
पुस्तक के सितेरे से एक संयुक्त विवेचन
यह पद माँग करता है कि हम कानून-आधारित, गुलाम-स्वभाव से मुक्त होकर प्रेम-आधारित पुत्रत्व को स्वीकार करें। Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणी-उद्धरण इस विचार को सावधानी से समझाते हैं। Henry लिखते हैं कि उद्धार ने हमें दास-शक्ति से मुक्त किया और अब परमेश्वर के परिवार की सदस्यता मिली है; Clarke बल देते हैं कि यह परिवर्तन न केवल स्थिति बदलता है बल्कि आचरण और मानसिकता में भी निशानी छोड़ता है; Barnes कहते हैं कि यह वारिसी स्थिति नितांत विश्वास के अनुसार है।
योग्यता के रूप में: यदि आप ईश्वर के पुत्र हैं, तो आपके जीवन का संघ और आशीषें अधिक स्पष्ट होनी चाहिएं। इस दृष्टि से, विश्वास को व्यवहार में उतारना माने—दया, प्रेम और सद्भावना के साथ दूसरों के लिए मार्ग बनना।
उद्धरण नोट
कौन सा उद्धरण संकलित किया गया है: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से स्पष्ट वाक्यांश आवश्यक हो तो नीचे संक्षेप में दिया गया है:
Henry: "We are no longer servants, but sons; and since sons, we are also heirs of God." (पुष्ट उद्धरण का पंक्ति-स्वरूप संक्षेप)
Clarke: "The conversion from a state of servitude to sonship is a full deliverance from bondage, and a complete introduction into the privileges of a family."